सरकारी स्कूलों का रिजल्ट सुधारने को लिया गया बड़ा निर्णय, स्टूडेंट्स के लिए टेंशन और राहत

चंडीगढ़:हरियाणा के सरकारी स्कूलों में खराब परीक्षा परिणाम सुधारने के लिए सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। यह फैसला स्टूडेंट्स को टेंशन और राहत दोनों देगा। स्कूल शिक्षा बोर्ड परीक्षा के प्रश्न पत्रों में इस सत्र से ही बदलाव करेगा। प्रश्न पत्र में बहुविकल्प और लघु स्तरीय प्रश्न शामिल किए जाएंगे। यह जानकारी स्कूल शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. जगबीर सिंह ने जीरो से दस प्रतिशत रिजल्ट वाले स्कूल मुखिया के साथ पंचकूला में बुलाई गई बैठक में दी। बैठक की अध्यक्षता स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास ने दी।

दास ने कहा कि स्कूल हेड यह सुनिश्चित करें कि मौजूदा शैक्षणिक सत्र के बचे हुए समय में किस प्रकार की रणनीति बना कर परीक्षा परिणामों में सुधार लाया जा सकता है। बैठक में सत्र 2017-18 की दसवीं कक्षा की परीक्षा में शून्य से 10 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले स्कूलों के मुखिया से भी सुझाव लिए गए। बैठक में अंबाला, कुरुक्षेत्र, कैथल, यमुनानगर, करनाल, पानीपत, सोनीपत, रोहतक, भिवानी, हिसार, फतेहाबाद, जींद और चरखीदादरी जिलों के स्कूल मुखिया शामिल हुए। दास ने कहा कि पाठ्यक्त्रस्म के उस हिस्से की विशेष तौर पर तैयारी कराई जाए जिसे कर सुगमता से विद्यार्थी पास-प्रतिशत हासिल कर सकें।

विद्यार्थियों को परीक्षाओं में आने वाले संभावित प्रश्नों की प्रश्नावली तैयार कर परीक्षा की तैयारी कराएं। शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. जगबीर सिंह और सचिव कै. मनोज कुमार से भी दास ने इस विषय पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि परीक्षा प्रारूप में भी कुछ बदलाव करते हुए बहुविकल्पी व लघु स्तरीय प्रश्न डाले जाएंगे। इससे न केवल नकल की प्रवृत्ति कम होगी, बल्कि विद्यार्थी भी परीक्षा को लेकर भयभीत नहीं होंगे और उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा। दास ने कहा कि मुखिया ‘जहां चाह-वहां राह’ की उक्ति के अनुरूप प्रयास करें। पहला संकल्प पास-प्रतिशतता में सुधार का होना चाहिए, इसके बाद औसत प्रदर्शन के सुधार के लिए प्रयास किए जाएं।

दसवीं का परिणाम 65 व बारहवीं का 85 प्रतिशत करने का लक्ष्य

सेकेंडरी शिक्षा महानिदेशक डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि सत्र 2017-18 में दसवीं और बारहवीं कक्षा के परीक्षा परिणाम शून्य से 10 प्रतिशत तक रहने वाले विद्यालयों की संख्या 121 और 10 थी। खराब प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों के मुखियाओं से उम्मीद की जा रही है कि वे आगामी परीक्षा में अपने विद्यालयों में परीक्षा परिणामों में 30 से 40 प्रतिशत सुधार लाएंगे। प्रदेश में दसवीं के परीक्षा परिणाम को 44 प्रतिशत से 65 प्रतिशत व बारहवीं के परीक्षा परिणाम को 64 से बढ़ाकर 85 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य रखा गया है।

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