माता ही बच्चे की पहली शिक्षिका होती है। बिझड़ी में प्री-प्राइमरी बच्चों की माताओं के लिए एक दिवसीय जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया
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बड़सर, 28 फरवरी.सतीश शर्मा
पीएम राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बिझड़ी में ब्लॉक बिझड़ी के प्री-प्राइमरी स्कूलों के बच्चों की माताओं के लिए एक विशेष जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य नन्हे बच्चों के सर्वांगीण विकास में माताओं की भूमिका को रेखांकित करना और उन्हें आधुनिक दौर की चुनौतियों के प्रति सचेत करना था। इस कार्यक्रम में क्षेत्र की 100 से अधिक माताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विशेषज्ञों ने माताओं को जागरूक करते हुए कहा कि बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए फास्ट फूड से दूर रखना अनिवार्य है और इसके स्थान पर घर का बना पौष्टिक और संतुलित आहार देना आवश्यक है।उन्होंने बच्चों में बढ़ती मोबाइल की लत पर चिंता व्यक्त करते हुए माताओं से आग्रह किया कि वे बच्चों को गैजेट्स के बजाय खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रेरित करें। खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी अरविंद चौधरी और स्थानीय विद्यालय के प्रधानाचार्य देवेन्द्र कुमार ने उपस्थित माताओं को संबोधित करते हुए कहा कि एक बच्चे के जीवन में उसकी माँ ही पहली शिक्षिका होती है और बच्चे घर पर जो देखते हैं, वही सीखते हैं। इसलिए माताओं का कर्तव्य है कि वे बच्चों के सामने आदर्श प्रस्तुत करें और उनके संतुलित विकास में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
प्रधानाचार्य देवेन्द्र कुमार ने माताओं को संबोधित करते हुए कहा कि एक बच्चे के जीवन की नींव घर से ही पड़ती है और माता उसकी प्रथम शिक्षिका होती है। उन्होंने कहा कि बच्चे का संतुलित विकास तभी संभव है जब घर और स्कूल दोनों मिलकर प्रयास करें। उन्होंने माताओं को उनके कर्तव्यों की याद दिलाई और बच्चों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने की प्रेरणा दी। शिविर में शिक्षा विभाग द्वारा सरकारी स्कूलों में दी जा रही आधुनिक सुविधाओं, मुफ्त वर्दी, पुस्तकों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई और माताओं को प्रेरित किया गया कि वे निजी स्कूलों के बजाय अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिल करवाएं, जहाँ अनुभवी शिक्षकों द्वारा बच्चों के भविष्य को संवारा जा रहा है।
कराना सरकार की प्राथमिकता है।
