संपादक की तीखी टिप्पणी
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सरकार की नियत ‘हज़ार’ की है, विपक्ष की नजर ‘खलल’ की है, और पंजाब की जनता की हालत उस ‘गोलगप्पे’ जैसी है जिसे दोनों तरफ से दबाया जा रहा है। पैसा खाते में आए न आए, लेकिन चर्चा ने सबका ‘बीपी’ ज़रूर बढ़ा दिया है।
पब्लिक का पंच: “साहब! फॉर्म भरें या चूल्हा जलाएं ?”
अखबार के प्रतिनिधि ने जब शहर के ‘गपशप चौक’ पर महिलाओं और बुजुर्गों से पूछा कि उन्हें ये ₹1000 वाली ‘मिठाई’ कैसी लगी, तो जवाब ऐसे मिले कि आप भी मुस्कुरा देंगे:
किरण आंटी (घरेलू महिला): “बेटा, सरकार कह रही है ₹1000 देंगे, पर शर्तें इतनी हैं कि लगता है नासा (NASA) का टेस्ट पास करना पड़ेगा। ऊपर से पड़ोस वाली कह रही है कि अगर फॉर्म में गलती हुई तो क्या जेल होगी? हमें पैसे चाहिए, सिरदर्द नहीं!”
बनवारी लाल (रिटायर्ड बाबू): “भई, ये राजनीति भी गजब है। एक तरफ से ₹1000 जेब में डालते हैं, दूसरी तरफ से बस का किराया या बिजली का बिल बढ़ाकर ₹2000 निकाल लेते हैं। ये तो वही बात हुई कि ‘हाथी दिखा दिया और पूंछ काट ली’।”
पिंकी (कॉलेज स्टूडेंट): “सर, ₹1000 में तो आजकल एक ढंग का ‘मेकअप किट’ भी नहीं आता, पर चलो, कम से कम सहेलियों के साथ मोमोज की पार्टी तो पक्की हो जाएगी। थैंक यू मान साहब!”
