स्थायी मंदिर अधिकारी की नियुक्ति का मामला

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हिमाचल से सतीश शर्मा की रिपोर्ट

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध में दान, चढ़ावे और सुविधाओं के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं के मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं, जिन्हें स्थानीय लोग और श्रद्धालु अक्सर ‘घोटाले’ के रूप में देखते हैं। इन मुद्दों में मुख्य रूप से चढ़ावे की गिनती में पारदर्शिता की कमी, दान की गई राशि का सही उपयोग न होना, और मंदिर के विकास कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोप शामिल हैं।

अक्टूबर 2025 में मंदिर के चढ़ावे की गिनती के दौरान धांधली का मामला सामने आया था, जिसमें पुलिस ने मंदिर ट्रस्ट के दो कर्मचारियों को गिरफ्तार किया था

पूर्व के मामले:2025

रसीद घोटाला: पूर्व के कार्यकाल में मंदिर में रसीद रसीद घोटाला काफी चर्चित रहा है।

सोना-चांदी/राशन: श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोना-चांदी और राशन में भी हेरा-फेरी के मामले सामने आए थे

घटना: मंदिर में चढ़ावे की गिनती के दौरान, दो कर्मचारियों ने चालाकी से 500 रुपये के नोटों के बंडल में 100 नोटों के बजाय 140 नोट डाल दिए थे।गिरफ्तार कर्मचारी: पुलिस ने

इस मामले में मंदिर ट्रस्ट के जूनियर असिस्टेंट (काउंटिंग क्लर्क) केशव दत्त और अकाउंटेंट गुरचैन सिंह को गिरफ्तार किया था।

ताज़ा मामले का विवरण (मार्च 2026):

गणना में धांधली: मंदिर में दानराशि की गिनती के दौरान 5 बंडल की जगह 6 बंडल डालने का मामला ट्रस्टी द्वारा पकड़ा गया।

व्यवस्था पर सवाल: बार-बार हेरा-फेरी के मामले आने से मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

मंदिरों के प्रबंधन में पारदर्शिता और कुप्रबंधन को रोकने के लिए पक्के तौर पर एक सरकारी या न्यासी अधिकारी (HAS) की नियुक्ति एक महत्वपूर्ण विषय है।

 

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