लुधियाना पुलिस की बड़ी साजिश का पर्दाफाश: ‘जीत समाचार’ के संपादक कमल पवार पर हुए जानलेवा हमले को दबाने का प्रयास!

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जीत समाचार (विशेष रिपोर्ट)

लुधियाना पुलिस की बड़ी साजिश का पर्दाफाश: ‘जीत समाचार’ के संपादक कमल पवार पर हुए जानलेवा हमले को दबाने का प्रयासCp

  • हमले से 14 दिन पहले सुरक्षा (PSO) हटाने के आदेश छुपाए, आरटीआई (RTI) का जवाब तक नहीं दिया।
  • मौके पर चली गोली का ‘खोल’ (Bullet Shell) शिकायतकर्ता के पास मौजूद, लेकिन थाना PAU के अधिकारियों ने फाइल से गोली ही कर दी गायब!
  • असंज्ञेय (Non-Cognizable) बताकर केस बंद करने वाले लुधियाना पुलिस कमिश्नर और थाना PAU के अधिकारी अब हाई कोर्ट और नेशनल एससी कमीशन के सामने होंगे जवाबदेह।

लुधियाना / चंडीगढ़ (जीत समाचार ब्यूरो):
पंजाब में पत्रकारों और सामाजिक नेताओं की सुरक्षा को लेकर लुधियाना पुलिस प्रशासन और स्थानीय थाना पी.ए.यू. (PAU) एक बड़े विवाद और कानूनी साजिश के गहरे घेरे में आ गए हैं। ‘जीत समाचार’ अखबार के मुख्य संपादक, लोकसभा चुनाव लड़ चुके और प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था ‘समूह समाज संगठन’ के अध्यक्ष श्री कमल पवार पर 31 मार्च 2026 को हुए जानलेवा गोलीबारी के हमले को लुधियाना पुलिस कमिश्नरेट और थाना PAU के अधिकारियों द्वारा महज “कार पार्किंग का साधारण झगड़ा” दिखाकर दबाने की सनसनीखेज कोशिश बेनकाब हुई है।

क्या है सुरक्षा (PSO) हटाने की गुप्त साजिश?

प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, श्री कमल पवार के उच्च सामाजिक कद और जान के खतरे (Threat Perception) को देखते हुए पंजाब सरकार द्वारा आधिकारिक तौर पर सरकारी सुरक्षा (PSO हेड कांस्टेबल सतपाल सिंह, नंबर 3033/LDH) मुहैया कराई गई थी। लेकिन एक सोची-समझी साजिश के तहत हमले से कुछ दिन पहले उनकी सुरक्षा अचानक वापस ले ली गई। श्री पवार ने अंदेशा जताते हुए 17 मार्च 2026 को ही पुलिस कमिश्नर कार्यालय में आरटीआई (RTI) दायर कर सुरक्षा हटाने के सरकारी आदेश मांगे थे। पुलिस ने साजिश का पर्दाफाश होने के डर से कानून का उल्लंघन करते हुए 30 दिनों में आरटीआई का कोई जवाब नहीं दिया, जिसके खिलाफ अब पंजाब स्टेट इंफॉर्मेशन कमीशन चंडीगढ़ में दूसरी अपील दायर कर दी गई है।

थाना PAU के अधिकारियों की भूमिका बेहद संदिग्ध, ‘बंदूक और गोली’ को तफ्तीश से किया गायब!

श्री कमल पवार ने बताया कि जब वह बिना सुरक्षा के थे, तभी 31 मार्च को सुनियोजित तरीके से विरोधियों (हरीश खन्ना और अन्य) ने ऋषि नगर में उन पर जानलेवा हमला किया और पिस्तौल से सीधी गोली चलाई। हमले के दौरान चली गोली का असली खोल (Bullet Shell / Empty Cartridge) आज भी श्री पवार के पास बतौर पक्का सबूत सुरक्षित मौजूद है।

हैरानी और घोर लापरवाही की बात यह है कि इस पूरे मामले की कमान संभाल रहे थाना पी.ए.यू. (PAU) के अधिकारियों ने आरोपी पक्ष के साथ कथित तौर पर मियामी (मिलीभगत) कर ली। थाना PAU के अधिकारियों ने इस इतने बड़े और अकाट्य भौतिक सबूत (गोली के खोल) को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट से पूरी तरह गायब कर दिया। इसी झूठी और मनगढ़ंत रिपोर्ट के आधार पर पुलिस कमिश्नर लुधियाना द्वारा 21 मई 2026 को ‘Speaking Order’ (नंबर 9648/Litigation) जारी करवाया गया। थाना PAU के अधिकारियों ने आरोपियों को बचाने के लिए हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) और आर्म्स एक्ट (Arms Act) जैसे संगीन गैर-जमानती जुर्म को दबा दिया और केस को एक मामूली असंज्ञेय (Non-Cognizable) मारपीट (BNS 115) की धारा का रंग देकर फाइल बंद कर दी।

एससी कमीशन और हाई कोर्ट में घिरेंगे थाना PAU के अधिकारी

माननीय पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा 22 अप्रैल 2026 को दिए गए आदेशों और नेशनल एससी कमीशन (NCSC) द्वारा जारी सख्त रिमाइंडरों के बावजूद, थाना PAU और लुधियाना पुलिस ने तथ्यों को पूरी तरह से तोड़-मरोड़ कर पेश किया है। श्री कमल पवार सोमवार (25 मई 2026) को नेशनल एससी कमीशन के चंडीगढ़ कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से पेश होकर इस पूरे मामले में थाना PAU के जांच अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका और आरोपी पक्ष से सांठगांठ की लिखित शिकायत दर्ज कराएंगे। वह कमीशन को गोली का खोल सौंपकर मांग करेंगे कि इसकी सेंट्रल फॉरेंसिक लैब (CFSL) से स्वतंत्र बैलिस्टिक जांच कराई जाए। इसके साथ ही हाई कोर्ट में पुलिस की इस पक्षपातपूर्ण जांच को रद्द कराने और केस की तफ्तीश थाना PAU व लुधियाना पुलिस से छीनकर स्टेट क्राइम ब्रांच (SIT) को देने के लिए एक अर्जेंट रिट पिटीशन दायर की जा रही है।

श्री पवार ने साफ शब्दों में कहा, “मेरा PSO हटाना, फिर गोली चलना और उसके बाद थाना PAU के अधिकारियों द्वारा उस गोली के खोल को अपनी जांच रिपोर्ट से गायब कर देना एक बहुत बड़ी प्रशासनिक व आपराधिक साजिश है। मैं इन भ्रष्ट अधिकारियों को जेल भिजवाकर ही दम लूंगा और आखिरी सांस तक कानूनी लड़ाई लड़ूंगा।”

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