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निगम ने मांगा जनवरी से अब तक का पूरा हिसाब, बैठक में रिपोर्ट लेकर नहीं पहुंचे एटीपी ज़ोन सी  अब 14 सितंबर की रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

जीत समाचार | लुधियाना। 10 सितंबर 2026 विक्की कुमार

लुधियाना नगर निगम के ज़ोन सी बिल्डिंग ब्रांच में अवैध निर्माण को लेकर एक बार फिर सवालों का बाजार गर्म है। निगम ने जनवरी 2026 से अब तक हुई कार्रवाई का प्वाइंटवाइज हिसाब मांगा, लेकिन 10 सितंबर की बैठक में संबंधित एटीपी ज़ोन सीरिपोर्ट लेकर ही नहीं पहुंचे। इसके बाद जॉइंट कमिश्नर तपन भनोट की नाराजगी ने बिल्डिंग ब्रांच की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।मामला सिर्फ रिपोर्ट न लाने तक सीमित नहीं है। ज़ोन सी  में एटीपी ज़ोन सी और बिल्डिंग इंस्पेक्टर एटीपी ज़ोन सी स्तर पर अवैध निर्माण के मामलों की निगरानी और कार्रवाई को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। अब जब निगम ने नोटिस, चालान, फीस, अवैध क्षेत्रफल, शिकायतों और कार्रवाई के बाद की स्थिति तक का हिसाब मांग लिया है, तो चर्चाओं ने और जोर पकड़ लिया है।

निगम ने खोल दिया हिसाब-किताब का पिटारा!

8 सितंबर को जारी पत्र में एटीपी ज़ोन सी को 10 सितंबर की बैठक में जनवरी 2026 से अब तक की कार्रवाई का पूरा ब्यौरा देने के निर्देश दिए गए थे।निगम ने जानना चाहा—कितने नोटिस? कितने चालान? कितनी फीस? कितनी वसूली? कितनी शिकायतें? कितनी कार्रवाई? और कार्रवाई के बाद बिल्डिंग की असली स्थिति क्या है?यानी इस बार निगम सिर्फ कागजों पर कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे रिकॉर्ड का मिलान करना चाहता है।

बैठक में रिपोर्ट गायब, जवाब भी संतोषजनक नहीं!

10 सितंबर की बैठक में ATP बिना प्वाइंटवाइज रिपोर्ट के पहुंच गए। जब जॉइंट कमिश्नर ने रिपोर्ट साथ न लाने का कारण पूछा तो पत्र के मुताबिक कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा सका।इसके बाद रिपोर्ट पेश करने के लिए 17 सितंबर तक का समय मांगा गया।जॉइंट कमिश्नर ने सख्त रुख अपनाते हुए ATP को ताड़ना जारी की और पूरी रिपोर्ट के साथ दोबारा उपस्थित होने के निर्देश दिए।

एटीपी ज़ोन सी और इंस्पेक्टर ज़ोन सी की जोड़ी पर उठ रहे सवाल

जोन-C में बिल्डिंग की जांच से लेकर नोटिस, चालान और आगे की कार्रवाई तक बिल्डिंग ब्रांच के अधिकारियों की भूमिका अहम होती है। ऐसे में सवाल यह है कि ATP और संबंधित बिल्डिंग इंस्पेक्टर द्वारा क्षेत्र में हो रहे निर्माणों की निगरानी आखिर किस स्तर पर हो रही है?यदि निगम को अब जनवरी से सितंबर तक का पूरा रिकॉर्ड अलग से मांगना पड़ रहा है, तो यह भी जांच का विषय है कि इतने महीनों में बिल्डिंग ब्रांच ने अवैध निर्माणों पर क्या-क्या कार्रवाई की और कितने मामलों में कार्रवाई कागजों तक सीमित रही।

मिलीभगत के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम ने ATP और इंस्पेक्टर की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

अब 14 सितंबर को खुलेगा असली राज?

1 अब सबकी नजर 14 सितंबर सुबह 11 बजे होने वाली बैठक पर है। इस बैठक में ATP को सत्यापित और टिप्पणी सहित रिपोर्ट पेश करनी होगी।

2 अगर रिपोर्ट में नोटिस और चालानों की संख्या सामने आती है, तो अगला सवाल होगा—जिन इमारतों पर कार्रवाई हुई, उनका आज क्या स्टेटस है?

3  कितनी इमारतें सील हैं? कितनी में काम बंद हुआ? कितनी में निर्माण फिर शुरू हुआ? कितने मामलों में फीस वसूली गई? और कितनी शिकायतें अभी भी लंबित हैं?

जीत समाचार का सवाल—कार्रवाई या सिर्फ कागजी खानापूर्ति?

जोन-C बिल्डिंग ब्रांच को अब इन सवालों का जवाब देना होगा। अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई वास्तव में जमीन पर हुई या फाइलों में?

ATP और इंस्पेक्टर की भूमिका भी अब जांच के दायरे में आ सकती है। यदि निगम द्वारा मांगी गई रिपोर्ट में रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर सामने आता है, तो जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी होगा।

अब 14 सितंबर की रिपोर्ट बताएगी कि जोन-C में कार्रवाई का सच क्या है—सख्ती या फिर सिर्फ कागजों का खेल?