कमिश्नर की सख्ती से सियासी गलियारों में हलचल!—‘काम नहीं तो सिफारिश क्यों?’ बिल्डिंग ब्रांच पर शिकंजा कसते ही बढ़ी बेचैनी की चर्चाएं”

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फील्ड में कमर्शियल निर्माणों को लेकर उठ रहे सवाल, कर्मचारियों की भूमिका पर भी चर्चा

लुधियाना | जीत समाचार विशेष रिपोर्ट

लुधियाना नगर निगम में बिल्डिंग ब्रांच को लेकर चल रही चर्चाओं ने अब सियासी गलियारों तक हलचल पैदा कर दी है। शहर में चर्चा है कि कमर्शियल निर्माणों पर निगम कमिश्नर के सख्त रुख के बाद कुछ राजनीतिक हलकों में नाराजगी की बातें सामने आ रही हैं।

सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि कुछ राजनीतिक लोगों के बीच कमिश्नर की कार्यशैली को लेकर चर्चा चल रही है और उन्हें बदलने की मांग तक की बातें हो रही हैं। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और किसी विधायक या राजनीतिक दल की ओर से आधिकारिक रूप से ऐसी मांग सामने नहीं आई है।

‘नियम तो नियम हैं’—फिर सिफारिशों की चर्चा क्यों?

निगम प्रशासन की ओर से भवन निर्माण नियमों के पालन और स्वीकृत नक्शे के अनुसार निर्माण करने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि यदि अधिकारी नियमों के अनुसार कार्रवाई कर रहे हैं, तो राजनीतिक हस्तक्षेप की चर्चाएं आखिर क्यों सामने आ रही हैं?

बिल्डिंग ब्रांच के फील्ड स्टाफ की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ जगहों पर निर्माण शुरू होने के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया दिखाई देती है। इन आरोपों की पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड और विभागीय जांच से ही हो सकती है।

बाजार में चल रही चर्चाओं के अनुसार, कुछ लोगों का आरोप है कि फील्ड में तैनात कुछ कर्मचारी और अधिकारी राजनीतिक संपर्कों के सहारे काम करवाने की कोशिश करते हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जीत समाचार द्वारा नहीं की गई है।

पहले निर्माण, बाद में कागजी कार्रवाई’—क्या व्यवस्था पर सवाल?

शहर में कई जगहों पर ऐसे निर्माणों को लेकर चर्चा है जहां लोगों का कहना है कि पहले निर्माण कार्य तेजी से होता है और बाद में नोटिस, चालान या अन्य कार्रवाई की प्रक्रिया सामने आती है।सवाल यह है कि अगर किसी निर्माण के लिए स्वीकृत बिल्डिंग प्लान जरूरी है, तो बिना मंजूरी निर्माण शुरू होने से पहले फील्ड स्तर पर निगरानी क्यों नहीं होती?नगर निगम पहले भी लोगों से अपील कर चुका है कि भवन निर्माण शुरू करने से पहले भवन नक्शे की मंजूरी लेना जरूरी है और नियमों का उल्लंघन होने पर कार्रवाई की जाएगी।

राजनीतिक गलियारों में कमिश्नर को लेकर चर्चा की खबर—कितनी सच्चाई?

जीत समाचार को नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर एक व्यक्ति ने दावा किया कि राजनीतिक हलकों में कमिश्नर को लेकर चर्चा चल रही है और कुछ लोग उनकी कार्यशैली से असहज बताए जा रहे हैं।हालांकि, कमिश्नर को हटाने या किसी विधायक द्वारा ऐसा दबाव बनाए जाने की स्वतंत्र पुष्टि हमारे पास नहीं है। इसलिए इस दावे को फिलहाल एक सूत्र के आरोप/दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।नगर निगम की राजनीति में अलग-अलग पदाधिकारियों और प्रशासन के बीच मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आते रहे हैं। सितंबर में मेयर और सीनियर डिप्टी मेयर के बीच F&CC बैठक को लेकर मतभेद की खबर भी सामने आई थी।

सबसे बड़ा सवाल—दफ्तर में कानून चलेगा या सिफारिश?

अब असली सवाल यही है कि शहर में भवन निर्माण से जुड़े नियम सभी के लिए समान रूप से लागू होंगे या फील्ड स्तर पर किसी को नोटिस, किसी को चालान और किसी को राहत मिलने की शिकायतें सामने आती रहेंगी?अगर किसी कर्मचारी या अधिकारी पर राजनीतिक दबाव में काम करने, अवैध निर्माण को संरक्षण देने या नियमों की अनदेखी करने के आरोप हैं, तो इनकी जांच दस्तावेजों, स्वीकृत नक्शों, साइट निरीक्षण रिपोर्ट, नोटिस और कार्रवाई के रिकॉर्ड के आधार पर होनी चाहिए

सबसे बड़ा सवाल!

अगर अधिकारी नियमों के मुताबिक काम कर रहा है, तो उसे बदलने की चर्चा क्यों?

अगर कोई निर्माण नियमों के खिलाफ है, तो उस पर कार्रवाई रोकने की कोशिश क्यों?

और अगर राजनीतिक दबाव की कोई बात नहीं है, तो फिर ऐसी चर्चाएं बाजार में क्यों चल रही हैं?

इन सवालों का जवाब नगर निगम प्रशासन, राजनीतिक प्रतिनिधियों और बिल्डिंग ब्रांच—तीनों से अपेक्षित है।

जीत समाचार की नजर में मामला साफ है—

नियम किसी व्यक्ति, नेता या अधिकारी के लिए अलग नहीं हो सकते।

अब आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि लुधियाना नगर निगम में चलेगा बिल्डिंग बायलॉज का कानून या राजनीतिक सिफारिशों की चर्चा?

फिलहाल शहर की नजर कमिश्नर के अगले कदम पर है।

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