ब्लॉक-21 की बिल्डिंग पर निगम में जवाबदेही का इम्तिहान! चालान हुआ, निर्माण नहीं रुका—अब किससे होगी वसूली ?

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हेडक्वार्टर ATP का दावा—सरकारी राजस्व की भरपाई करवाएंगे; ऑनलाइन शिकायत और कमिश्नर की ई-मेल तक पहुंचा मामला, अब जांच की निष्पक्षता और कार्रवाई पर सबकी नजर।

लुधियाना 04 नवंबर 206 विक्की/ शर्मा

लुधियाना नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच में कथित अनियमितताओं को लेकर जीत समाचार लगातार सवाल उठा रहा है। अखबार की ओर से ऐसी कई इमारतों के मामले प्रशासन के ध्यान में लाए गए हैं, जिनके नक्शों, निर्माण और कंपाउंडिंग फीस को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब जोन-C के ब्लॉक-21 की एक इमारत फिर चर्चा में है।

इस इमारत को लेकर पहले भी खबरें प्रकाशित की गई थीं। आरोप है कि निर्माण जारी रहने के बावजूद बिल्डिंग ब्रांच की ओर से केवल चालान काटने की कार्रवाई की गई और निर्माण रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। अब सवाल यह है कि जब इमारत का निर्माण संबंधित अधिकारियों की निगरानी के दायरे में हो रहा था, तो बिल्डिंग इंस्पेक्टर और ATP ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की?

चालान काटा, लेकिन सरकारी राजस्व की पूरी वसूली हुई या नहीं?

इस मामले का सबसे अहम पहलू सरकारी राजस्व है। सूत्रों के हवाले से चर्चा है कि इस इमारत की कंपाउंडिंग या अन्य जरूरी फीस की पूरी वसूली नहीं हुई। यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि निर्माण में नियमों का उल्लंघन हुआ था, तो क्या केवल 50 हजार रुपये जमा करवाना ही पर्याप्त था?

यह स्पष्ट होना जरूरी है कि 50 हजार रुपये किस मद के तहत जमा करवाए गए, किस आदेश के आधार पर जमा हुए और क्या यह राशि नियमों के अनुसार निर्धारित पूरी फीस थी? इसकी पुष्टि नगर निगम के आधिकारिक रिकॉर्ड से ही हो सकती है।

हेडक्वार्टर ATP का जवाब—मामला चेक करवाकर होगी कार्रवाई

इस मामले को लेकर जब जीत समाचार की ओर से हेडक्वार्टर में तैनात ATP से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि वह मामले को चेक करवाएंगे और जो भी कानूनी कार्रवाई बनती होगी, वह की जाएगी। ATP ने यह भी कहा कि सरकार के खाते में पैसा जमा करवाया जाएगा और सरकारी राजस्व का जो नुकसान हुआ है, उसकी वसूली पूरी करवाई जाएगी।

जब उनसे पूछा गया कि क्या संबंधित जगह पर इस तरह की बिल्डिंग का निर्माण नियमों के अनुसार हो सकता है, तो ATP ने जवाब दिया कि वहां अन्य बिल्डिंगें भी बनी हुई हैं। उन्होंने दोबारा कहा कि वह मामले की जांच करवाएंगे और सरकारी राजस्व की वसूली सुनिश्चित करेंगे।

ATP का यह आश्वासन सामने आने के बाद अब निगाहें निगम की कार्रवाई पर टिकी हैं। लेकिन सवाल यह भी है कि जब यही अधिकारी पहले संबंधित क्षेत्र में तैनात थे, तब निर्माण के दौरान प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यदि उस समय नियमों का उल्लंघन हो रहा था, तो उसे रोकने और सरकारी फीस की वसूली करने के लिए क्या कदम उठाए गए थे?

जांच की फाइल दोबारा पुराने अधिकारी के पास पहुंचने की चर्चा

जीत समाचार की ओर से लगातार खबरें प्रकाशित किए जाने के बाद मामला जांच के लिए हेडक्वार्टर तक पहुंचने की जानकारी सामने आई थी। अब सूत्रों के हवाले से चर्चा है कि जांच से संबंधित फाइल दोबारा उसी अधिकारी के पास पहुंच गई है, जिसके कार्यकाल के दौरान यह इमारत बनी थी।

यदि यह जानकारी सही है, तो जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। क्या इस मामले की जांच किसी स्वतंत्र अधिकारी से नहीं करवाई जानी चाहिए, ताकि निर्माण के समय हुई कार्रवाई, जिम्मेदारी और राजस्व से जुड़े पूरे मामले की निष्पक्ष पड़ताल हो सके?

ऑनलाइन शिकायत और कमिश्नर की ई-मेल पर भी पहुंचा मामला

इस इमारत को लेकर शिकायत ऑनलाइन दर्ज करवाने के साथ-साथ नगर निगम कमिश्नर की आधिकारिक ई-मेल पर भी भेजे जाने की जानकारी दी गई है। अब देखना होगा कि शिकायत और मीडिया में उठाए गए सवालों के बाद निगम प्रशासन मौके पर जांच करवाता है या मामला केवल फाइलों तक ही सीमित रह जाता है।

कमिश्नर साहब! दफ्तर में नहीं, मौके पर जाकर करवाएं जांच

जीत समाचार का सवाल है कि यदि इमारतों की जांच केवल दफ्तरों में बैठकर फाइलों के आधार पर होगी, तो मौके की वास्तविक स्थिति कैसे सामने आएगी? नगर निगम कमिश्नर को चाहिए कि ब्लॉक-21 की इमारत का मौके पर निरीक्षण करवाएं और नक्शे, निर्माण, चालान, फीस तथा कंपाउंडिंग से संबंधित पूरे रिकॉर्ड की जांच करवाएं।

यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो उसकी जिम्मेदारी तय करके कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही यदि सरकारी राजस्व की कम वसूली हुई है, तो नियमानुसार पूरी बकाया राशि वसूल की जानी चाहिए।

अब कमिश्नर के फैसले पर टिकी निगाहें—राजस्व वसूली होगी या फाइल ठंडे बस्ते में जाएगी?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पहले हुई कथित चूक की जिम्मेदारी तय होगी? क्या सरकारी खजाने को हुए नुकसान की पूरी भरपाई करवाई जाएगी? क्या जांच की जिम्मेदारी ऐसे अधिकारी को दी जाएगी, जिसकी निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे? या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?

फिलहाल गेंद नगर निगम कमिश्नर के पाले में है। ऑनलाइन शिकायत और कमिश्नर की ई-मेल पर भेजी गई शिकायत के बाद अब प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार है।

जीत समाचार इस मामले पर नजर बनाए रखेगा। संबंधित अधिकारियों और इमारत मालिक का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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