मेलों में कथित धांधली के बाद अब पटाखा कारोबार में जीएसटी चोरी का शक, सरकारी खजाने को चूना कौन लगा रहा?

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लुधियाना में पटाखों की बिक्री और स्टॉक पर उठे सवाल; दुकानदारों के बिल, जीएसटी रिटर्न, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और लाइसेंस की जांच की मांग, जिम्मेदार विभागों की निगरानी भी कटघरे में

लुधियाना (विक्रम सैनी)

शहर में मेलों के दौरान पार्किंग वसूली, ठेकों, स्टॉलों और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर उठे सवालों के बाद अब पटाखा कारोबार में जीएसटी चोरी की आशंका ने एक नई बहस छेड़ दी है। त्योहारों के सीजन में पटाखों की खरीद-बिक्री से बड़े कारोबार की संभावना रहती है, लेकिन सवाल यह है कि इस कारोबार में होने वाले प्रत्येक लेन-देन का हिसाब सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो रहा है या नहीं?

यदि पटाखों की बिक्री बिना बिल की जा रही है, ग्राहकों को पक्का बिल नहीं दिया जा रहा या खरीद-बिक्री के वास्तविक आंकड़ों और जीएसटी रिटर्न में अंतर है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि, किसी दुकानदार द्वारा जीएसटी चोरी किए जाने की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और विभागीय जांच के बाद ही हो सकती है।

दुकानदारों के साथ निगरानी करने वाले विभागों से भी सवाल

पटाखों का कारोबार केवल बिक्री तक सीमित नहीं है। इसमें माल की खरीद, परिवहन, भंडारण, लाइसेंस, बिक्री के बिल और कर संबंधी नियमों का पालन भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में संबंधित विभागों को यह जांचना चाहिए कि लाइसेंसधारी दुकानदारों के पास उपलब्ध स्टॉक का खरीद रिकॉर्ड क्या है, बिक्री के बिल जारी किए जा रहे हैं या नहीं और जीएसटी रिटर्न में कारोबार का सही विवरण दिया गया है या नहीं।

यदि कहीं नियमों की अनदेखी हो रही है, तो केवल मौके पर औपचारिक जांच करके लौटना पर्याप्त नहीं होगा। दस्तावेजों का मिलान कर नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।

प्रशासन की जिम्मेदारी भी कम नहीं

शहर में पटाखों की बिक्री के लिए निर्धारित स्थानों, लाइसेंस की शर्तों और सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि किसी क्षेत्र में बिना अनुमति बिक्री, नियमों के विपरीत भंडारण या अन्य अनियमितताएं सामने आती हैं, तो संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट करना चाहिए कि निरीक्षण कब किया गया और उल्लंघन मिलने पर क्या कार्रवाई हुई।

जीएसटी से जुड़े मामलों में राज्य कराधान विभाग को अपने अधिकार क्षेत्र के अनुसार जांच करनी चाहिए। वहीं, लाइसेंस और विस्फोटक सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर संबंधित सक्षम विभागों को कार्रवाई करनी चाहिए। अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारियों के बीच मामला उलझाकर किसी को भी जवाबदेही से बचने का मौका नहीं मिलना चाहिए।

जांच हो तो सामने आएगा पूरा हिसाब

अब जरूरत इस बात की है कि पटाखों की अधिकृत दुकानों और बिक्री केंद्रों के रिकॉर्ड की जांच की जाए। खरीद बिल, स्टॉक रजिस्टर, बिक्री के बिल, जीएसटी रिटर्न और उपलब्ध माल का मिलान किया जाए। जहां अनियमितता मिले, वहां कानून के मुताबिक कार्रवाई हो और कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक किया जाए।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी कारोबारी ने नियमों का उल्लंघन किया है, तो उससे जवाब कौन मांगेगा? और यदि संबंधित विभागों को अनियमितताओं की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, तो उनकी जवाबदेही कैसे तय होगी?

त्योहारों के दौरान आम नागरिक सुरक्षा और उचित कीमत पर सामान मिलने की उम्मीद करता है। सरकार को भी कर राजस्व का नुकसान नहीं होना चाहिए। इसलिए पटाखा कारोबार की जांच किसी एक दुकानदार तक सीमित रखने के बजाय नियमों के अनुपालन, विभागीय निगरानी और पूरे लेन-देन की पारदर्शिता के आधार पर होनी चाहिए।

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