ज़ोन-D में पार्किंग के बिना बन रही इमारतें! क्या बिल्डिंग ब्रांच के अधिकारी निभा रहे हैं अपनी जिम्मेदारी?
ब्लॉक-18 में एक और निर्माण को लेकर उठे सवाल; नक्शा पास होने का दावा तो किया जाता है, लेकिन पार्किंग की व्यवस्था कहां है? नए कमिश्नर के सामने बिल्डिंग ब्रांच की कार्यप्रणाली बड़ी चुनौती।
लुधियाना, 01 नवंबर 2026 विक्की कुमार
लुधियाना नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच में आखिर चल क्या रहा है? क्या सेवादार से लेकर बिल्डिंग इंस्पेक्टर, हेड ड्राफ्टमैन और अन्य अधिकारियों तक निर्माण कार्यों की जांच सही ढंग से की जा रही है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि ज़ोन-D के ब्लॉक-18 में एक बार फिर ऐसी इमारत का मामला सामने आया है, जिसके निर्माण में पार्किंग व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि जब भी किसी इमारत को लेकर अधिकारियों से सवाल किया जाता है, तो अक्सर जवाब मिलता है कि नक्शा पास है। लेकिन सवाल यह है कि यदि नक्शा पास है, तो क्या मौके पर पार्किंग की व्यवस्था भी नियमों के अनुसार छोड़ी गई है? केवल नक्शा पास होने का दावा कर देने से क्या निर्माण से जुड़ी सभी जिम्मेदारियां पूरी हो जाती हैं?
शहर में पार्किंग की समस्या, लेकिन इमारतों में व्यवस्था कहां?
आज लुधियाना शहर की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक पार्किंग भी है। बाजारों और व्यावसायिक क्षेत्रों में वाहनों को खड़ा करने के लिए जगह नहीं मिलती। ऐसे में यदि नई इमारतों के निर्माण के दौरान ही पार्किंग की उचित व्यवस्था नहीं छोड़ी जाती, तो आने वाले समय में आम लोगों को और परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
अब ज़ोन-D के ब्लॉक-18 में एक और निर्माण शुरू होने की बात सामने आई है। सवाल यह है कि क्या बिल्डिंग ब्रांच के अधिकारी निर्माण के शुरुआती चरण में ही मौके का निरीक्षण करेंगे और पार्किंग सहित सभी जरूरी नियमों का पालन सुनिश्चित करवाएंगे?
बिल्डिंग इंस्पेक्टर और हेड ड्राफ्टमैन की जिम्मेदारी पर सवाल
ब्लॉक-18 में तैनात बिल्डिंग इंस्पेक्टर और हेड ड्राफ्टमैन की जिम्मेदारी है कि वे अपने क्षेत्र में होने वाले निर्माण कार्यों की जांच करें और सुनिश्चित करें कि इमारतें स्वीकृत नक्शे तथा लागू बिल्डिंग बायलॉज के अनुसार बन रही हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब निर्माण की जांच की जाती है, तो पार्किंग व्यवस्था की स्थिति अधिकारियों की नजर में क्यों नहीं आती? क्या मौके पर निरीक्षण केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाता है? यदि समय रहते जांच हो जाए, तो निर्माण पूरा होने के बाद पैदा होने वाली समस्याओं से बचा जा सकता है।
नए कमिश्नर के सामने बड़ी चुनौती
नगर निगम में नए कमिश्नर के आने के बाद शहरवासियों की निगाहें बिल्डिंग ब्रांच की कार्यप्रणाली पर टिकी हुई हैं। क्या नए कमिश्नर इस पुरानी व्यवस्था में बदलाव लाएंगे? क्या ज़ोन-D सहित सभी जोनों में निर्माणाधीन इमारतों की जांच करवाई जाएगी? और क्या नक्शे के साथ-साथ पार्किंग, फीस तथा अन्य स्वीकृतियों का रिकॉर्ड भी जांचा जाएगा?
अब नगर निगम प्रशासन से सीधे सवाल हैं:
1 क्या ब्लॉक-18 की संबंधित इमारत का नक्शा स्वीकृत है?
2 क्या मौके पर पार्किंग की व्यवस्था स्वीकृत नक्शे के अनुरूप है?
3 क्या संबंधित अधिकारियों ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया है?
4 यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो जिम्मेदार अधिकारी और निर्माणकर्ता के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?
जीत समाचार की नजर ब्लॉक-18 के इस निर्माण पर बनी हुई है। अब देखना होगा कि नगर निगम कमिश्नर इस मामले में जांच करवाकर वास्तविक स्थिति सामने लाते हैं या फिर पार्किंग और बिल्डिंग बायलॉज से जुड़े सवाल पहले की तरह फाइलों में ही दबे रहेंगे।

