जोन-सी में फिर शुरू हुआ पुराना खेल? नई ATP की तैनाती के बाद भी कमर्शियल इमारतों पर कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति!
कई इमारतें निर्माणाधीन तो कई तैयार होने की कगार पर; नक्शे और कंपाउंडिंग फीस को लेकर उठे सवाल, सरकारी खजाने को संभावित नुकसान की जांच कब होगी?
लुधियाना, 1 नवंबर (विक्की कुमार)
लुधियाना नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच जोन-सी एक बार फिर चर्चा में है। नए ATP की तैनाती के बाद लोगों को उम्मीद थी कि क्षेत्र में अवैध निर्माणों पर लगाम लगेगी और सरकारी नियमों के अनुसार ही कमर्शियल इमारतों का निर्माण होगा। लेकिन क्षेत्र से सामने आ रही तस्वीरें और शिकायतें कई सवाल खड़े कर रही हैं।
जोन-सी के ब्लॉक-29 क्षेत्र में कई कमर्शियल इमारतों के निर्माण का मामला सामने आ रहा है। कुछ इमारतें तैयार होने की कगार पर हैं, जबकि कुछ का निर्माण अभी शुरू हुआ है। सवाल यह है कि क्या इन सभी इमारतों के नक्शे नगर निगम से मंजूर हैं? क्या इनकी निर्धारित कंपाउंडिंग फीस और अन्य सरकारी शुल्क जमा करवाए गए हैं? यदि सभी काम नियमों के अनुसार हो रहे हैं, तो विभाग को इनका रिकॉर्ड सार्वजनिक करने में क्या परेशानी है?
कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति तो नहीं?
क्षेत्र में सामने आ रही शिकायतों के अनुसार, कुछ इमारतों पर कार्रवाई होने की बात तो कही जाती है, लेकिन निर्माण की स्थिति में अपेक्षित बदलाव दिखाई नहीं देता। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या विभागीय कार्रवाई केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह गई है?
नगर निगम की जिम्मेदारी है कि किसी भी कमर्शियल इमारत का निर्माण स्वीकृत नक्शे और लागू बिल्डिंग बायलॉज के अनुसार हो। यदि किसी निर्माण में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। केवल नोटिस या चालान जारी करना पर्याप्त नहीं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि नियमों का पालन हो।
सरकारी खजाने को नुकसान की आशंका, फीस का रिकॉर्ड सामने आए
सबसे महत्वपूर्ण सवाल सरकारी राजस्व को लेकर है। यदि किसी इमारत का नक्शा मंजूर नहीं है या निर्धारित कंपाउंडिंग फीस और अन्य शुल्क जमा नहीं करवाए गए हैं, तो इससे नगर निगम के राजस्व को नुकसान हो सकता है।
जीत समाचार का सवाल है कि आखिर विभाग यह जांच कब करेगा कि क्षेत्र में बन रही कमर्शियल इमारतों से सरकार को मिलने वाला पूरा राजस्व जमा हो रहा है या नहीं? प्रत्येक संबंधित इमारत का नक्शा, फीस और निर्माण की स्थिति रिकॉर्ड के आधार पर जांची जानी चाहिए।
क्या पुराने अधिकारियों वाली परंपरा ही जारी रहेगी?
जोन-सी में पहले भी बिल्डिंग ब्रांच की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठते रहे हैं। नए ATP की तैनाती के बाद उम्मीद थी कि कामकाज में पारदर्शिता आएगी और पुराने विवादों से सबक लेकर नई व्यवस्था बनाई जाएगी। लेकिन मौजूदा शिकायतों ने फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या विभाग में वास्तव में बदलाव आया है या पुरानी कार्यप्रणाली ही जारी है?
जीत समाचार के पास कुछ निर्माणाधीन इमारतों की तस्वीरें भी पहुंची हैं, जिन्हें पाठकों के सामने रखा जा रहा है। इन तस्वीरों और शिकायतों के आधार पर नगर निगम प्रशासन से मांग है कि संबंधित स्थलों का निरीक्षण करवाकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए।
PCS अधिकारी ने कार्रवाई का दिया भरोसा
इस मामले को जब नगर निगम के संबंधित PCS अधिकारी के ध्यान में लाया गया, तो उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में लाया गया है और इस पर जरूर कार्रवाई की जाएगी।
अब देखने वाली बात यह होगी कि यह कार्रवाई कब होती है और जांच में क्या सामने आता है। क्या संबंधित इमारतों के नक्शे और कंपाउंडिंग फीस की जांच होगी? क्या मौके पर जाकर निर्माण की वास्तविक स्थिति देखी जाएगी? और यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसकी जवाबदेही तय होगी?
जीत समाचार का स्पष्ट उद्देश्य है कि सरकार के राजस्व का नुकसान न हो, नगर निगम के नियमों का पालन हो और शहर में हर इमारत कानून के मुताबिक बने। सवाल उठाना हमारा काम है, लेकिन इन सवालों का जवाब देना और कार्रवाई करना नगर निगम प्रशासन की जिम्मेदारी है।

