रिहायशी इलाके में पटाखों का गोदाम बना मौत का कारण! आग में 27 वर्षीय साहिल की दर्दनाक मौत
AAP नेता गोल्डी सब्बरवाल के रिश्तेदार की गई जान, दूसरी मंजिल पर रखे पटाखों में आग लगने से गिरी दीवार; रिहायशी इमारत में पटाखों के भंडारण की अनुमति पर उठे गंभीर सवाल
लुधियाना। विक्रम सैनी
लुधियाना में पटाखों के भंडारण को लेकर एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता गोल्डी सब्बरवाल से जुड़े पटाखों के गोदाम में लगी भीषण आग ने एक परिवार की खुशियां उजाड़ दीं। आग के दौरान इमारत की दीवार गिरने से 27 वर्षीय साहिल सब्बरवाल की मलबे में दबकर मौत हो गई। मृतक को AAP नेता का चचेरा भाई बताया जा रहा है।
दूसरी मंजिल पर रखा था पटाखों का स्टॉक
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इमारत की दूसरी मंजिल पर एक कमरे और किचन में पटाखों का स्टॉक रखा हुआ था। इसी दौरान वहां आग लग गई। आग फैलने पर साहिल इमारत के अंदर एक किनारे खड़ा हो गया, लेकिन अचानक दीवार गिरने से वह मलबे के नीचे दब गया। इस हादसे में उसकी जान चली गई।
रिहायशी इमारत में पटाखों का भंडारण कैसे?
इस दर्दनाक हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि इमारत रिहायशी इस्तेमाल के लिए थी तो वहां पटाखों का इतना बड़ा स्टॉक किस अनुमति के आधार पर रखा गया था?
क्या गोदाम के पास पटाखों के भंडारण का वैध लाइसेंस था? क्या अग्निशमन विभाग से सुरक्षा संबंधी मंजूरी ली गई थी? क्या संबंधित विभागों ने समय-समय पर निरीक्षण किया था?
इन सवालों के जवाब अब प्रशासनिक जांच से सामने आने चाहिए।
हादसे के बाद प्रशासन की जिम्मेदारी तय होगी?
पटाखे अत्यधिक ज्वलनशील होते हैं। इनके भंडारण के लिए निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन करना जरूरी है। यदि जांच में बिना जरूरी अनुमति या सुरक्षा इंतजामों के पटाखे रखने की बात सामने आती है, तो संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
जांच में सामने आने चाहिए ये अहम सवाल
- क्या गोदाम में पटाखे रखने का वैध लाइसेंस था?
- क्या दूसरी मंजिल पर पटाखों का स्टॉक रखने की अनुमति थी?
- क्या अग्निशमन विभाग ने सुरक्षा इंतजामों की जांच की थी?
- रिहायशी इमारत में पटाखों का भंडारण किसकी अनुमति से किया जा रहा था?
- क्या संबंधित विभागों को पहले से इसकी जानकारी थी?
एक परिवार की खुशियां उजड़ीं, अब जवाबदेही जरूरी
साहिल की मौत ने पटाखों के भंडारण और प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर रिहायशी इलाकों में इस तरह के ज्वलनशील सामान का भंडारण कैसे हो रहा है? क्या संबंधित विभागों की ओर से पहले कोई जांच की गई थी?
अब जरूरत है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, लाइसेंस और सुरक्षा संबंधी रिकॉर्ड की पड़ताल की जाए तथा यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
जीत समाचार का सवाल: क्या प्रशासन किसी और बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? आखिर लोगों की जान की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
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