9 जुलाई को शिकायत, फिर भी जोन-C के ब्लॉक-21 में कथित अवैध निर्माण पर कार्रवाई कहां?

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शिकायतकर्ता ने कमिश्नर तक पहुंचाया था मामला, अब बिल्डिंग तैयार होने की चर्चा! ATP की चुप्पी और बिल्डिंग इंस्पेक्टर की भूमिका पर उठे सवाल

शिकायत के बावजूद निर्माण जारी रहने के आरोप, नगर निगम के राजस्व और अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल

लुधियाना | 29 अक्टूबर 2026 विक्की कुमार

लुधियाना नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच के जोन-C में कथित अवैध निर्माण को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामला ब्लॉक-21 की एक बिल्डिंग से जुड़ा है, जिसकी शिकायत 9 जुलाई 2026 को ही नगर निगम कमिश्नर को भेजी गई थी। शिकायतकर्ता ने निर्माण की जांच करवाने, नक्शे और जरूरी मंजूरियों का रिकॉर्ड चेक करने तथा नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई करने की मांग की थी। लेकिन अब कई महीने बीत जाने के बाद भी शिकायत पर हुई कार्रवाई को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

शिकायत पुरानी, लेकिन निर्माण की रफ्तार पर सवाल!

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि संबंधित बिल्डिंग का निर्माण कथित तौर पर जरूरी मंजूरियों और नियमों का पालन किए बिना किया जा रहा है। शिकायतकर्ता ने मांग की थी कि मौके पर निरीक्षण कर यह जांचा जाए कि बिल्डिंग का नक्शा मंजूर है या नहीं और निर्माण स्वीकृत नक्शे के अनुसार हो रहा है या नहीं।

अब सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि शिकायत के बावजूद बिल्डिंग का निर्माण आगे बढ़ा और इमारत तैयार होने की स्थिति तक पहुंच गई। यदि ऐसा है, तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिकायत मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों ने मौके पर क्या जांच की? क्या निर्माण रुकवाने या नियमों की जांच के लिए कोई कार्रवाई की गई? और यदि निर्माण नियमों के मुताबिक था, तो विभाग रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं कर रहा?

जोन-C के ATP से जवाब का इंतजार, इंस्पेक्टर की भूमिका भी जांच के घेरे में!

इस मामले में जोन-C के ATP से बिल्डिंग की मंजूरी, नक्शे और शिकायत पर की गई कार्रवाई की जानकारी मांगे जाने की जरूरत है। साथ ही, निर्माण के दौरान संबंधित क्षेत्र में तैनात बिल्डिंग इंस्पेक्टर की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।यदि 9 जुलाई को शिकायत मिलने के बाद निर्माण जारी रहा, तो क्या संबंधित अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया था? क्या बिल्डिंग के नक्शे और फीस संबंधी रिकॉर्ड की जांच हुई? क्या शिकायत पर कोई लिखित रिपोर्ट तैयार की गई? इन सवालों का जवाब नगर निगम के आधिकारिक रिकॉर्ड से ही मिल सकता है।

सवाल यह भी है कि शिकायत मिलने के बाद समय रहते जांच हुई या मामला फाइलों तक ही सीमित रह गया?

कमिश्नर तक पहुंची शिकायत, फिर भी कार्रवाई की जानकारी क्यों नहीं?

शिकायतकर्ता ने कमिश्नर को भेजे पत्र में मांग की थी कि निर्माण की निष्पक्ष जांच करवाई जाए और नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित लोगों के खिलाफ पंजाब नगर निगम कानून और भवन निर्माण नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए। शिकायत में यह भी मांग की गई थी कि यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए।

अब सवाल उठता है कि शिकायत पर विभाग ने क्या कदम उठाए? क्या जांच पूरी हो चुकी है? क्या बिल्डिंग का नक्शा मंजूर है? और यदि निर्माण में कोई अनियमितता पाई गई, तो जिम्मेदारी किसकी तय की गई?

यदि किसी बिल्डिंग में निर्धारित नियमों के विपरीत निर्माण हुआ है या जरूरी फीस जमा नहीं करवाई गई है, तो नगर निगम के राजस्व पर असर पड़ने की आशंका हो सकती है। हालांकि, इस मामले में राजस्व को नुकसान होने की अभी पुष्टि नहीं हुई है। इसकी सच्चाई जानने के लिए स्वीकृत नक्शे, फीस की रसीदें, निरीक्षण रिपोर्ट और संबंधित फाइल की जांच जरूरी है।

जीत समाचार के सीधे सवाल

1 9 जुलाई को मिली शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?

2 क्या ब्लॉक-21 की संबंधित बिल्डिंग का नक्शा मंजूर है?

3 क्या निर्माण स्वीकृत नक्शे और भवन निर्माण नियमों के मुताबिक हुआ?

4 शिकायत के बाद मौके का निरीक्षण किस अधिकारी ने किया?

5 यदि कोई अनियमितता मिली, तो अब तक जिम्मेदारी क्यों तय नहीं हुई?

अब देखना होगा कि नगर निगम कमिश्नर इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और जोन-C की बिल्डिंग ब्रांच शिकायत पर हुई कार्रवाई का रिकॉर्ड सार्वजनिक करती है या नहीं।

जीत समाचार इस मामले में संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा। फिलहाल बिल्डिंग की वैधता और अधिकारियों की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष जांच तथा आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही निकाला जा सकेगा।

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