मिठाइयों की चमक के पीछे छिपा जहर! रंगों और एक्सपायरी मिठाइयों का खेल कब रुकेगा?
लुधियाना में एक्सपायर मिठाइयों को दोबारा तैयार कर बेचने के मामले ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े किए सवाल; प्रतिबंधित रंगों के इस्तेमाल
और मिलावट करने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग, सैंपलिंग तक सीमित न रहे विभाग का अभियान
लुधियाना (विक्रम सैनी)
त्योहारों पर मिठाइयों की खरीदारी में लोग अक्सर उनकी चमक, रंग और कीमत देखकर फैसला कर लेते हैं, लेकिन यही आकर्षक रंग कहीं सेहत के लिए खतरा तो नहीं बन रहे? मिठाइयों में प्रतिबंधित रंगों के कथित इस्तेमाल, बासी और एक्सपायर मिठाइयों को दोबारा तैयार कर बाजार में बेचने की आशंका ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जब त्योहारों पर मिठाइयों की मांग कई गुना बढ़ जाती है, तो खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी आखिर कितनी प्रभावी रहती है?
कुछ दिन पहले स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक ऐसी फैक्टरी पकड़े जाने की जानकारी सामने आई थी, जहां कथित तौर पर एक्सपायर मिठाइयों को रिसाइकिल कर उनमें रंगों का इस्तेमाल करके दोबारा मिठाइयां तैयार की जा रही थीं। अब सवाल यह है कि इन मिठाइयों की सप्लाई किन दुकानों तक होती थी, किन दुकानदारों ने इन्हें खरीदा और क्या विभाग ने संबंधित सप्लाई चेन की पूरी जांच की है? यदि एक्सपायर मिठाइयां बाजार तक पहुंच रही थीं, तो इसकी जिम्मेदारी केवल फैक्टरी संचालक की ही नहीं, बल्कि सप्लाई और बिक्री की पूरी व्यवस्था की जांच से भी तय होनी चाहिए।
चमकीले रंगों के लालच में सेहत से खिलवाड़!
मिठाइयों को आकर्षक बनाने के लिए खाद्य रंगों का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन हर रंग खाने योग्य नहीं होता। रोडामाइन-बी और मेटानिल येलो जैसे गैर-स्वीकृत रंगों का खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे रसायनों के सेवन से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। वहीं, खाद्य पदार्थों में केवल वही रंग इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जिन्हें संबंधित खाद्य श्रेणी के लिए निर्धारित नियमों के तहत अनुमति मिली हो और जो तय सीमा के भीतर हों।
इसके बावजूद यदि कोई दुकानदार अधिक चमकदार मिठाइयां बेचने के लिए प्रतिबंधित औद्योगिक रंगों का इस्तेमाल करता है, तो यह उपभोक्ताओं की सेहत के साथ खिलवाड़ है। ऐसे मामलों में केवल मिठाई का सैंपल भर लेना पर्याप्त नहीं होना चाहिए। जांच में गड़बड़ी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई और जिम्मेदार लोगों की पहचान भी जरूरी है।
सस्ते के चक्कर में बीमारी का जोखिम
त्योहारों के दौरान कम कीमत पर मिलने वाली मिठाइयां खरीदते समय विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। कम कीमत अपने आप में मिलावट का प्रमाण नहीं है, लेकिन असामान्य रूप से चमकीले रंग, बासी गंध, बदला हुआ स्वाद, खराब बनावट और साफ-सफाई की कमी जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, दूषित, खराब या गलत तरीके से तैयार खाद्य पदार्थ पेट संबंधी परेशानियों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं। कुछ प्रतिबंधित रसायनों से लंबे समय तक संपर्क गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। इसलिए उपभोक्ताओं को मिठाइयों की गुणवत्ता के साथ उनकी ताजगी और निर्माण की स्वच्छता पर भी ध्यान देना चाहिए।
दुकानदारों से सवाल: पुरानी मिठाई का हिसाब कौन लेगा?
यदि एक्सपायर मिठाइयों को दोबारा तैयार करके बेचने का मामला सामने आया है, तो खाद्य सुरक्षा विभाग को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित कारोबारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। क्या उनके स्टॉक की जांच हुई? क्या मिठाइयों की खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड खंगाले गए? क्या यह पता लगाया गया कि ऐसी मिठाइयां किन दुकानों पर सप्लाई की गई थीं?
दुकानदारों की जिम्मेदारी है कि वे ग्राहकों को सुरक्षित, ताजा और नियमों के अनुरूप खाद्य सामग्री उपलब्ध कराएं। पुरानी मिठाइयों को नया रूप देकर बेचना या गैर-स्वीकृत रंगों का इस्तेमाल करना साबित होने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी विशेष दुकान या कारोबारी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई सिर्फ सैंपलिंग तक क्यों?
त्योहारों में खाद्य सुरक्षा विभाग की सक्रियता बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन सवाल यह है कि कार्रवाई का असर बाजार में कितनी दूर तक दिखाई देता है। यदि विभाग को एक्सपायर मिठाइयों को दोबारा तैयार करने वाली फैक्टरी का पता चला, तो उसके बाद सप्लायरों और खुदरा दुकानों तक जांच पहुंचाना भी जरूरी है।
विभाग को मिठाई निर्माण इकाइयों, गोदामों और दुकानों में साफ-सफाई, भंडारण, निर्माण तिथि, उपयोग की अंतिम तिथि और खाद्य रंगों के इस्तेमाल की जांच करनी चाहिए। जहां उल्लंघन मिले, वहां नियमों के अनुसार स्टॉक जब्त करने, कारोबार पर रोक लगाने, जुर्माना लगाने या अभियोजन की कार्रवाई पर विचार किया जाना चाहिए।
सबसे अहम बात यह है कि विभाग को कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि लोगों को पता चले कि कितने निरीक्षण हुए, कितने नमूने लिए गए, कितने मामलों में मिलावट या अन्य उल्लंघन मिले और दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाए गए।
डॉक्टर की सलाह: मिठाई खरीदते समय बरतें सावधानी
पेट रोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश गुप्ता के अनुसार, प्रतिबंधित रंगों वाली मिठाइयों का सेवन नुकसानदेह हो सकता है। इसी तरह बासी और एक्सपायर मिठाइयां भी सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकती हैं। उन्होंने लोगों को अच्छी और भरोसेमंद दुकान से मिठाई खरीदने तथा गुणवत्ता पर संदेह होने पर स्वास्थ्य विभाग को सूचित करने की सलाह दी।
अब जवाबदेही तय करने का समय
त्योहार खुशियां बांटने के लिए होते हैं, बीमारियां बांटने के लिए नहीं। यदि मिठाइयों में प्रतिबंधित रंगों और एक्सपायर सामग्री के इस्तेमाल की शिकायतें या मामले सामने आते हैं, तो प्रशासन को केवल छापेमारी की औपचारिकता तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जांच का दायरा फैक्टरी से लेकर सप्लायर और खुदरा दुकानदार तक पहुंचना चाहिए।
सवाल साफ है—क्या खाद्य सुरक्षा विभाग त्योहारों के बाद भी ऐसी निगरानी जारी रखेगा, या अभियान केवल त्योहारों तक सीमित रह जाएगा? जनता को आश्वासन नहीं, पारदर्शी जांच, ठोस कार्रवाई और सुरक्षित खाद्य पदार्थों की गारंटी चाहिए।

