जीत समाचार का बड़ा खुलासा! नगर निगम जोन-C ब्लॉक 37 में तीन निर्माणाधीन कोठियों पर सवाल! शिकायतें, फोटो और चालान के बावजूद लेंटर तक पहुंचा काम
₹50 हजार के चालान का दावा, भुगतान की स्थिति पर सवाल; बिल्डिंग ब्रांच की कार्रवाई और नए कमिश्नर की निगरानी पर उठे सवाल
लुधियाना | 25 अक्टूबर 2026 जॉनी/कुमार
लुधियाना नगर निगम के जोन-C ब्लॉक 37 की बिल्डिंग ब्रांच एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जीत समाचार के पास सामने आए मामले में एक ही स्थान पर तीन कोठियों का निर्माण किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। दावा है कि निर्माण की शुरुआती तस्वीरें अधिकारियों को भेजी गई थीं, लेकिन इसके बावजूद काम रुकने के बजाय लेंटर के स्तर तक पहुंच गया।
शिकायतें हुईं, फिर भी निर्माण कैसे बढ़ा?
सूत्रों के अनुसार, पहले तैनात बिल्डिंग इंस्पेक्टर लक्की को निर्माण की तस्वीरें व्हाट्सऐप के जरिए भेजी गई थीं। बताया जा रहा है कि तीनों निर्माणों के संबंध में करीब ₹50 हजार के चालान काटे जाने और भुगतान जमा करवाने के लिए कहे जाने की बात सामने आई थी। हालांकि, चालान की वास्तविक राशि, भुगतान की स्थिति और संबंधित रिकॉर्ड की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
नई इंस्पेक्टर ने रुकवाया काम, फिर लेंटर तक कैसे पहुंचा निर्माण?
सूत्रों के अनुसार, नगर निगम जोन-C की नई बिल्डिंग इंस्पेक्टर के ध्यान में मामला आने के बाद निर्माण कार्य रुकवा दिया गया था। लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद मकान मालिकों ने कथित तौर पर अपनी मर्जी और राजनीतिक रसूख का हवाला देते हुए निर्माण जारी रखा और काम लेंटर तक पहुंच गया।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इंस्पेक्टर ने खुद मौके पर निर्माण रुकवा दिया था, तो उसके बाद दोबारा काम कैसे शुरू हुआ? क्या मकान मालिकों ने निगम के आदेशों की अनदेखी की या निर्माण रोकने के आदेशों को लागू करवाने में कहीं चूक हुई? क्या संबंधित अधिकारियों ने दोबारा मौके का निरीक्षण किया?अब नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच और उच्च अधिकारियों को इस मामले में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि निर्माण रोकने के आदेशों की अवहेलना हुई है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। राजनीतिक रसूख के इस्तेमाल के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
निगम के राजस्व और बिल्डिंग नियमों पर सवाल
नियमों के अनुसार, संबंधित निर्माण के लिए आवश्यक मंजूरी, नक्शे, लागू फीस और अन्य वैधानिक औपचारिकताओं की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। केवल चालान काटे जाने से निर्माण अपने आप वैध नहीं हो जाता। यदि आवश्यक मंजूरियां नहीं ली गईं, तो नगर निगम को रिकॉर्ड की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
जीत समाचार के सीधे सवाल:
1 क्या तीनों कोठियों के नक्शे स्वीकृत हैं?
2 कथित ₹50 हजार के चालान की वास्तविक स्थिति क्या है?
3 क्या चालान की रकम जमा हुई और उसके बाद निर्माण जारी रखने की अनुमति दी गई?
4 काम रुकवाने के बावजूद निर्माण आगे बढ़ा तो जिम्मेदारी किसकी है?
5 क्या नगर निगम कमिश्नर इस मामले की जांच करवाएंगे?
अब देखना यह है कि नगर निगम का उच्च अधिकारी इस मामले में रिकॉर्ड की जांच करवाकर स्थिति स्पष्ट करता है या नहीं। जीत समाचार इस मामले में संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी सामने लाने का प्रयास करेगा।

