जीत समाचार की खबर का असर! ट्रांसफर के करीब 18 दिन बाद घनश्याम क्लर्क ने छोड़ी सीट, नगर निगम में उठे कई सवाल

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जॉइंट कमिश्नर PCS को दी गई शिकायत के बाद हरकत में आया प्रशासन; सुपरिंटेंडेंट विवेक ने चार्ज छोड़ने की पुष्टि

लुधियाना।25 अक्टूबर 2026 कुमार/विक्की

नगर निगम में कर्मचारियों की ट्रांसफर और रिलीविंग को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जीत समाचार द्वारा मामला प्रमुखता से उठाए जाने के बाद घनश्याम क्लर्क द्वारा अपनी सीट का चार्ज छोड़ने की जानकारी सामने आई है। आरोप है कि ट्रांसफर होने के बावजूद कर्मचारी करीब 17 दिनों तक उसी सीट पर काम करता रहा। अब सवाल यह है कि ट्रांसफर आदेश लागू होने में इतनी देरी क्यों हुई और इसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है?

सूत्रों के अनुसार, नगर निगम में ट्रांसफर किए गए कर्मचारियों में से 12 कर्मचारियों ने अपनी नई तैनाती पर ज्वाइन कर लिया था, जबकि एक कर्मचारी की ज्वाइनिंग को लेकर सवाल उठ रहे थे। इसी मामले में शिकायत जॉइंट कमिश्नर PCS को भी दी गई थी। शिकायतकर्ता ने अधिकारियों से मांग की कि ट्रांसफर आदेशों का पालन सुनिश्चित किया जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि संबंधित कर्मचारी को निर्धारित समय पर रिलीव क्यों नहीं किया गया।

विवेक सुपरिंटेंडेंट  ने क्या कहा ?

इस मामले में सुपरिंटेंडेंट विवेक  से बातचीत की गई। उन्होंने बताया कि संबंधित कर्मचारी ने चार्ज छोड़ दिया है और जल्द ही उसकी सीट का चार्ज दूसरे कर्मचारी को सौंप दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि नए कर्मचारी को सीट से संबंधित कामकाज की पूरी जानकारी दी जाएगी, ताकि सरकारी कामकाज प्रभावित न हो।विवेक कुमार के अनुसार, जीत समाचार में मामला सामने आने और दिनेश कुमार शर्मा के नाम से शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों ने ट्रांसफर किए गए कर्मचारियों को रिलीव करने के निर्देश दिए थे।

एक सीट पर इतना लंबा इंतजार क्यों?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब किसी कर्मचारी की ट्रांसफर हो जाती है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रिलीव करने में देरी क्यों होती है? क्या ट्रांसफर आदेश सभी कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होते हैं या फिर कुछ मामलों में अलग प्रक्रिया अपनाई जाती है?सूत्रों की ओर से राजनीतिक संरक्षण की आशंका भी जताई जा रही है, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट करना चाहिए कि कर्मचारी की रिलीविंग में देरी के क्या कारण थे और क्या इस मामले में किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई।

क्या होगी विभागीय कार्रवाई?

शिकायतकर्ता का कहना है कि चार्ज छोड़ना ही पर्याप्त नहीं है। यदि जांच में ट्रांसफर आदेशों की अवहेलना या ड्यूटी संबंधी नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो जिम्मेदारी तय कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। अब यह देखना होगा कि संबंधित जॉइंट कमिश्नर PCS  और नगर निगम प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।नगर निगम में ट्रांसफर प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा हैं। ऐसे आदेशों का समय पर पालन होना जरूरी है, ताकि कर्मचारियों की तैनाती को लेकर भ्रम न रहे और जनता से जुड़े काम प्रभावित न हों।

जीत समाचार का सवाल: जब नगर निगम प्रशासन ट्रांसफर के आदेश जारी करता है, तो क्या उनका पालन सभी कर्मचारियों के लिए समान रूप से सुनिश्चित किया जाएगा? या फिर ट्रांसफर के बाद भी किसी कर्मचारी का लंबे समय तक उसी सीट पर बने रहना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता रहेगा?

जीत समाचार इस मामले में विभागीय कार्रवाई और अधिकारियों के अगले आदेश पर नजर बनाए रखेगा।

 

“Jeet Samachar Daily Hindi Newspaper Ludhiana – RNI PUNHIN/2013/60106. Read today’s e-paper online at zeetsamachar.com”

 

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