ईंट भट्ठों में अब 30% पराली पेलेट्स का इस्तेमाल अनिवार्य, बठिंडा के 143 भट्ठों पर लागू होंगे आदेश
इस सीजन में 20 हजार टन धान की पराली से बनी पेलेट्स की खपत का अनुमान; डीसी ने भट्ठा मालिकों को सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए पेलेट्स यूनिटों से एमओयू करने की अपील की
बठिंडा, 25 अक्टूबर (विक्रम सैनी)
वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने और धान की पराली जलाने की समस्या को कम करने के लिए ईंट भट्ठों में अब ईंधन के तौर पर 30 फीसदी धान की पराली से बनी पेलेट्स का इस्तेमाल करना जरूरी होगा। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम), नई दिल्ली के दिशा-निर्देशों के तहत इन आदेशों को लागू करने के लिए भट्ठों तक पेलेट्स की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
डिप्टी कमिश्नर बठिंडा राजेश धीमान ने जिले के ईंट भट्ठा मालिकों के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि जिले में करीब 143 ईंट भट्ठे संचालित हैं। चालू सीजन के दौरान इन भट्ठों में लगभग 20,000 टन धान की पराली से बनी पेलेट्स इस्तेमाल होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि आदेशों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए भट्ठा मालिकों और पेलेट्स बनाने वाली इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
पराली जलाने की समस्या कम करने में मिलेगी मदद
डीसी ने बताया कि ईंट बनाने की प्रक्रिया में पेलेट्स का इस्तेमाल कोयले के साथ ईंधन के रूप में किया जाता है। इससे धान की पराली का उपयोगी विकल्प के तौर पर इस्तेमाल बढ़ेगा और खेतों में पराली जलाने की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता घटाने और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी बढ़ावा मिलेगा।उन्होंने कहा कि ईंट भट्ठों का संचालन लगभग पांच महीने तक रहता है। इस अवधि में अनुमानित 20,000 टन पेलेट्स की जरूरत को देखते हुए उनकी नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
पेलेट्स बनाने वाली इकाइयों से एमओयू करने की अपील
डिप्टी कमिश्नर ने भट्ठा मालिकों से अपील की कि वे अपने आसपास स्थित पेलेट्स निर्माण इकाइयों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) करें, ताकि पूरे सीजन में ईंधन की सप्लाई बाधित न हो और निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन किया जा सके।
बैठक में पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक्सईएन रूबी सिद्धू, डीएफएससी गुरतार सिंह, डीएफएसओ हर्षित मेहता, ईंट भट्ठा मालिक तथा संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

