लुधियाना नगर निगम ज़ोन-A में बड़ा सवाल! चालान कटने के बावजूद तीसरी मंजिल का लेंटर?
ब्लॉक-25 की कमर्शियल बिल्डिंग पर सवालों की बौछार, ड्राफ्टमैन को इंस्पेक्टर की जिम्मेदारी सौंपने पर भी उठे सवाल
चालान हुआ तो निर्माण कैसे आगे बढ़ा? कंपाउंडिंग फीस और सरकारी खजाने के राजस्व का हिसाब कौन देगा?
लुधियाना।26 अक्टूबर 2026 विक्की/कुमार
नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच ज़ोन-A के ब्लॉक-25 में एक कमर्शियल बिल्डिंग के निर्माण को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जीत समाचार के पास सामने आई जानकारी और तस्वीरों के आधार पर दावा किया जा रहा है कि बिल्डिंग का निर्माण तीसरी मंजिल तक पहुंच गया है, जबकि कुछ दिन पहले ही इस संबंध में चालान काटे जाने की बात सामने आई थी।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि बिल्डिंग के खिलाफ कार्रवाई की गई थी, तो उसके बाद निर्माण की मौजूदा स्थिति की जांच किसने की? क्या नगर निगम के संबंधित अधिकारियों ने मौके पर जाकर निर्माण रुकवाने या नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कोई कदम उठाया?
ड्राफ्टमैन को इंस्पेक्टर की जिम्मेदारी, निगरानी व्यवस्था पर सवाल!
इस मामले में संबंधित कर्मचारी की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, एक ड्राफ्टमैन को इंस्पेक्टर की भूमिका से जुड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसे में सवाल यह है कि उसे किन आधिकारिक आदेशों के तहत मौके पर निरीक्षण और इंस्पेक्टर से संबंधित जिम्मेदारियां दी गई हैं?क्या इस व्यवस्था से बिल्डिंग ब्रांच की निगरानी प्रभावित हो रही है? नगर निगम प्रशासन को इस बारे में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
चालान के बाद भी निर्माण? सरकारी राजस्व की जांच जरूरी!
इस मामले में कंपाउंडिंग फीस, नक्शे की मंजूरी और बिल्डिंग के वास्तविक उपयोग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि निर्माण में नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो यह जांच होनी चाहिए कि सरकार को निर्धारित फीस पूरी मिली है या नहीं।इसके साथ ही, साथ लगती एक अन्य बिल्डिंग में लगाए गए शटर और उससे संबंधित फीस के बारे में भी जानकारी सामने लाने की मांग की जा रही है। दोनों बिल्डिंगों के नक्शे, चालान, कंपाउंडिंग फीस और जमा राशि के रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।यदि किसी बिल्डिंग की फीस कम जमा हुई है या नियमों के उल्लंघन से सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा है, तो जिम्मेदारी तय करके नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
वन-टाइम पेमेंट के आदेशों का पालन हुआ या नहीं?
सूत्रों के हवाले से यह सवाल भी उठ रहा है कि संबंधित बिल्डिंगों की फीस एकमुश्त जमा करवाई गई या अलग-अलग किस्तों में भुगतान हुआ। इस संबंध में नगर निगम कमिश्नर के लागू आदेशों और विभागीय नियमों की जांच होनी चाहिए।यदि वन-टाइम पेमेंट अनिवार्य थी, तो रिकॉर्ड से स्पष्ट होना चाहिए कि भुगतान किस नियम और किन शर्तों के तहत स्वीकार किया गया। दस्तावेजी जांच के बिना किसी अधिकारी या बिल्डिंग मालिक पर मिलीभगत का आरोप लगाना उचित नहीं होगा।
कमिश्नर साहब, ब्लॉक-25 के रिकॉर्ड की जांच कब?
जीत समाचार द्वारा पहले भी इस बिल्डिंग से संबंधित सवाल उठाए जाने की बात सामने आई थी। अब जरूरत है कि नगर निगम कमिश्नर और बिल्डिंग ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारी मौके की जांच करवाएं तथा दोनों बिल्डिंगों के नक्शे, चालान, फीस और निर्माण की स्थिति से जुड़े तथ्य सार्वजनिक करें।
सबसे बड़ा सवाल—यदि चालान काटा गया था, तो उसके बाद निर्माण की निगरानी किसने की? क्या सरकार को निर्धारित फीस मिली है? और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो जिम्मेदारी किसकी बनती है?

