दिवाली से पहले एक टन बासी मिठाइयां मिलीं, तो सवाल—अब तक कहां सोया था खाद्य सुरक्षा विभाग?
कोल्ड स्टोरों में दो से तीन महीने पुरानी मिठाइयां जमा होने का मामला उजागर; सिर्फ मिठाइयां नष्ट करने और तीन सैंपल लेने से क्या पूरी होगी जिम्मेदारी? दुकानदारों की जवाबदेही और विभागीय निगरानी पर उठे सवाल
लुधियाना, 31 अक्टूबर (विक्रम सैनी)
दिवाली से ठीक पहले खाद्य सुरक्षा विभाग की कोल्ड स्टोरों पर की गई औचक कार्रवाई ने मिठाई कारोबार में खाद्य पदार्थों के भंडारण और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग की टीम ने करीब दो से तीन महीने पुरानी एक टन से अधिक मिठाइयां नष्ट करवाईं और पेठा, गुलाब जामुन व रसगुल्ले के तीन सैंपल जांच के लिए भेजे। सवाल यह है कि जब इतनी बड़ी मात्रा में मिठाइयां महीनों तक कोल्ड स्टोरों में पड़ी रहीं, तो संबंधित कारोबारियों के भंडारण रिकॉर्ड और गुणवत्ता की नियमित जांच पहले क्यों नहीं हुई?
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आशीष चावला के नेतृत्व में हुई कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल उन हलवाइयों और मिठाई कारोबारियों की जिम्मेदारी का है, जिन्होंने इतनी बड़ी मात्रा में मिठाइयां लंबे समय तक स्टोर करके रखीं। क्या इन मिठाइयों की निर्माण तिथि, भंडारण अवधि और निर्धारित तापमान के रिकॉर्ड की जांच की गई? क्या संबंधित कारोबारियों के लाइसेंस और खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन की पड़ताल की गई? इन सवालों के स्पष्ट जवाब सामने आना जरूरी है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि नष्ट करवाई गई मिठाइयां बाजार तक पहुंचने से पहले ही रोक दी गईं।
त्योहार आते ही छापेमारी, बाकी दिनों में निगरानी कहां?
दिवाली और दूसरे त्योहारों के दौरान मिठाइयों की मांग बढ़ते ही खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई तेज हो जाती है। लेकिन एक टन से अधिक पुरानी मिठाइयों का मिलना नियमित निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करता है। खाद्य सुरक्षा का उद्देश्य केवल खराब या पुराना माल नष्ट करवाना नहीं, बल्कि ऐसी स्थिति पैदा होने से पहले उसे रोकना भी है।
यदि कारोबारियों के कोल्ड स्टोरों में महीनों तक मिठाइयां जमा रहती हैं, तो विभाग को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित प्रतिष्ठानों का पिछला निरीक्षण कब हुआ था, क्या कोई अनियमितता पहले दर्ज की गई थी और नियमों के उल्लंघन पर क्या कार्रवाई हुई। केवल त्योहार से पहले छापेमारी कर देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता; निगरानी पूरे साल प्रभावी रहनी चाहिए।
दुकानदारों के मुनाफे पर जनता की सेहत भारी?
मिठाई कारोबारियों के लिए भी यह मामला चेतावनी है। त्योहार के दौरान अधिक बिक्री और मुनाफे के लालच में पुरानी या अनुचित तरीके से रखी मिठाइयां बेचने की किसी भी कोशिश को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। हालांकि, केवल पुरानी होने के आधार पर हर मिठाई को मिलावटी या स्वास्थ्य के लिए निश्चित रूप से खतरनाक नहीं कहा जा सकता, लेकिन उसकी निर्माण तिथि, शेल्फ लाइफ, भंडारण की स्थिति और गुणवत्ता की जांच बेहद जरूरी है।
विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि नष्ट करवाई गई मिठाइयां किस आधार पर अनुपयुक्त पाई गईं, उनके मालिक कौन थे और क्या जिम्मेदार कारोबारियों के खिलाफ नोटिस, जुर्माने या लाइसेंस संबंधी कार्रवाई की गई। यदि नियमों का उल्लंघन मिला है, तो कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि दूसरे कारोबारियों को भी स्पष्ट संदेश मिले।
तीन सैंपल लेकर खत्म न हो जाए मामला
पेठा, गुलाब जामुन और रसगुल्ले के तीन सैंपल प्रयोगशाला भेजना जांच की प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन असली तस्वीर रिपोर्ट आने के बाद सामने आएगी। विभाग को जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए और यह भी बताना चाहिए कि संबंधित कोल्ड स्टोरों में भंडारण के नियमों का पालन हो रहा था या नहीं।
अब प्रशासन से सीधे सवाल हैं: पुरानी मिठाइयों के भंडारण की जिम्मेदारी किसकी थी? संबंधित कारोबारियों के रिकॉर्ड की जांच हुई या नहीं? नियमों का उल्लंघन मिलने पर क्या कार्रवाई की गई? और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए क्या ठोस व्यवस्था की जाएगी?
दिवाली पर लोगों की सेहत से जुड़ा मामला होने के कारण प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग को कार्रवाई के नतीजे सार्वजनिक करने चाहिए। जनता को केवल छापेमारी की खबर नहीं, बल्कि यह भरोसा भी चाहिए कि बाजार में बिकने वाली मिठाइयों की गुणवत्ता की नियमित जांच हो रही है और नियम तोड़ने वाले कारोबारियों को जवाबदेह बनाया जा रहा है।

