नगर निगम जोन-D में एक और बिल्डिंग पर सवाल! ब्लॉक-28 के निर्माण में नियमों का पालन हो रहा है या सरकारी राजस्व को लग रही चपत?

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पार्किंग की व्यवस्था कागजों में, हकीकत में कुछ और होने का संदेह! नक्शा, कंपाउंडिंग फीस, फ्रंट सेटबैक और साइड सेटबैक की हो निष्पक्ष जांच

जीत समाचार ने PCS अधिकारी के सामने उठाया मामला; बोले– बिल्डिंग का नक्शा और कंपाउंडिंग फीस चेक करवाऊंगा, दोषी मिला तो होगी कानूनी कार्रवाई

लुधियाना, 03 नवंबर 2026 शर्मा

नगर निगम लुधियाना की बिल्डिंग ब्रांच में कथित अनियमितताओं को लेकर जीत समाचार लगातार अपनी पत्रकारिता की जिम्मेदारी निभा रहा है। शहर में जहां भी किसी निर्माण को लेकर नक्शे, पार्किंग, सेटबैक या कंपाउंडिंग फीस पर संदेह पैदा होता है, जीत समाचार उस मामले को प्रशासन के सामने उठाता रहेगा। अब नगर निगम के जोन-D के ब्लॉक-28 में तैयार हो रही एक और निर्माणाधीन बिल्डिंग को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस बिल्डिंग का निर्माण स्वीकृत नक्शे के मुताबिक हो रहा है या फिर कंपाउंडिंग फीस के आधार पर निर्माण को नियमित करवाने की प्रक्रिया अपनाई गई है? क्या नगर निगम के रिकॉर्ड में सरकारी फीस जमा है? और क्या बिल्डिंग बायलॉज के तहत जरूरी प्रावधानों का मौके पर पालन भी किया जा रहा है?

पार्किंग व्यवस्था पर सबसे पहले हो जांच!

इस बिल्डिंग को लेकर पार्किंग की व्यवस्था सबसे अहम सवाल बनकर सामने आ रही है। कागजों में पार्किंग दिखाई देना अलग बात है, लेकिन मौके पर वास्तव में कितनी जगह उपलब्ध है, इसकी जांच जरूरी है।क्या बिल्डिंग के स्वीकृत नक्शे में पार्किंग की व्यवस्था दिखाई गई है? क्या मौके पर उतनी जगह छोड़ी गई है? या फिर भविष्य में बिल्डिंग में आने वाले वाहनों को सड़क पर ही खड़ा होना पड़ेगा? यदि पार्किंग की व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित है तो इसका खामियाजा आसपास के लोगों और राहगीरों को भुगतना पड़ सकता है। नगर निगम कमिश्नर को चाहिए कि संबंधित अधिकारियों से मौके पर पार्किंग की वास्तविक स्थिति की जांच करवाएं।

फ्रंट सेटबैक और साइड सेटबैक की भी हो पैमाइश

सिर्फ पार्किंग ही नहीं, इस बिल्डिंग के फ्रंट सेटबैक और साइड सेटबैक की भी मौके पर पैमाइश करवाई जानी चाहिए। स्वीकृत नक्शे में जितनी जगह छोड़ना निर्धारित है, क्या निर्माण में भी उतनी ही जगह छोड़ी गई है?

यदि मौके पर निर्माण और नक्शे में अंतर पाया जाता है तो उसकी रिपोर्ट तैयार की जाए। साथ ही यह भी जांच हो कि संबंधित बिल्डिंग इंस्पेक्टर ने निर्माण के दौरान निरीक्षण किया था या नहीं और यदि किया था तो उसकी रिपोर्ट क्या है?

कंपाउंडिंग फीस जमा हुई या नियमों के मुताबिक बन रही है बिल्डिंग?

जीत समाचार का अगला सवाल कंपाउंडिंग फीस को लेकर है। नगर निगम प्रशासन स्पष्ट करे कि क्या इस बिल्डिंग का नक्शा पास है? यदि निर्माण में कोई विचलन है तो क्या उसे मौजूदा नियमों के तहत कंपाउंड किया जा सकता है? यदि फीस जमा हुई है तो कितनी राशि जमा हुई और किस नियम के तहत?

सरकारी राजस्व की सुरक्षा भी नगर निगम की जिम्मेदारी है। यदि किसी निर्माण में फीस जमा होनी चाहिए और वह जमा नहीं हुई, या ऐसा निर्माण नियमित करने की कोशिश हो रही है जिसकी कंपाउंडिंग नियमों के तहत संभव नहीं है, तो इसकी जांच होनी चाहिए।

कमिश्नर साहब को भेजी गई बिल्डिंग की फोटो पर अधिकारियों से क्या जवाब मांगा जाता है?

जीत समाचार ने पहले भी कई ऐसी इमारतों के मामले सामने रखे हैं, जिनमें निर्माण और बिल्डिंग बायलॉज के पालन को लेकर सवाल उठाए गए। जब किसी बिल्डिंग की फोटो या जानकारी नगर निगम कमिश्नर तक पहुंचाई जाती है और कमिश्नर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगते हैं, तो यह भी जांच का विषय है कि मौके की वास्तविक स्थिति क्या है और अधिकारियों की रिपोर्ट कितनी तथ्यात्मक है।

क्या केवल दफ्तर में बैठकर रिपोर्ट तैयार कर देने से निर्माण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है? क्या अधिकारियों को मौके पर जाकर निरीक्षण नहीं करना चाहिए? पत्रकारों द्वारा सार्वजनिक हित में उठाए गए सवालों और उपलब्ध करवाई गई जानकारी पर प्रशासन का जवाब मांगना भी जवाबदेही की प्रक्रिया का हिस्सा है।

PCS अधिकारी बोले– बिल्डिंग मेरे ध्यान में लाई गई है, जांच करवाऊंगा

इस मामले को लेकर जब जीत समाचार की ओर से नगर निगम के उच्च अधिकारी PCS अधिकारी से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि यह बिल्डिंग उनके ध्यान में लाई गई है। वह इसका पता करवाएंगे और चेक करवाएंगे कि इसका नक्शा पास है या कंपाउंडिंग फीस जमा करवाई गई है।

अधिकारी ने यह भी कहा कि यदि जांच में कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अब देखना यह होगा कि अधिकारी के इस आश्वासन के बाद जांच कब शुरू होती है और क्या बिल्डिंग की मौके पर पैमाइश करवाकर पूरी स्थिति सामने लाई जाती है।

जीत समाचार की पड़ताल जारी रहेगी, अगली बार सामने आएंगे और सवाल!

जीत समाचार का मकसद किसी अधिकारी या बिल्डिंग मालिक को बिना जांच दोषी ठहराना नहीं, बल्कि शहर में नियमों के मुताबिक निर्माण करवाने और सरकारी राजस्व की सुरक्षा से जुड़े सवाल उठाना है। यदि नगर निगम कमिश्नर द्वारा ऐसी सभी संदिग्ध निर्माणाधीन इमारतों की निष्पक्ष जांच करवाई जाए तो कई मामलों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

अब देखना यह है कि नगर निगम कमिश्नर इस मामले पर कब तक संज्ञान लेते हैं और संबंधित अधिकारियों से केवल रिपोर्ट मांगते हैं या मौके पर जांच करवाकर जवाबदेही भी तय करते हैं।

एक तरफ बिल्डिंगें तैयार हो रही हैं, दूसरी तरफ पार्किंग, सेटबैक और कंपाउंडिंग फीस को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आखिर बिल्डिंग बायलॉज का पालन करवाने की जिम्मेदारी किसकी है?

जीत समाचार का संकल्प—जहां भी सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने या बिल्डिंग बायलॉज के उल्लंघन का संदेह होगा, वहां सवाल उठेंगे और तथ्यों के साथ पड़ताल जारी रहेगी।

अगला खुलासा जल्द… अब सिर्फ बिल्डिंग नहीं, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी होंगे सवाल!

जीत समाचार — सवाल भी पूछेंगे, जवाबदेही भी मांगेंगे।

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