हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद वह पैसा वापस लेकर बाबा बालक नाथ के श्रद्धालुओं पर खर्च होना चाहिए
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दियोटसिद्ध। सतीश शर्मा विट्टू।
मंदिरों का पैसा मंदिरों के विकास पर ही खर्च होगा श्रद्धालुओं को सुविधाएं देने के लिए लेकिन फिर भी क्या इसे हाई कोर्ट के निर्देशों के बावजूद श्रद्धालुओं पर खर्च किया जाता है। नहीं बाबा बालक नाथ मंदिर से करोड़ों रुपए सरकार को ड्राफ्ट बनाकर पूर्व में भेजे गए। हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद वह पैसा वापस लेकर बाबा बालक नाथ के श्रद्धालुओं पर खर्च होना चाहिए। अगर पैसा मंदिर में श्रद्धालुओं पर खर्च होना है तो बजट में इस पेज का प्रयोग लोगों को अपना इलाज करवाने तथा बेटियो की शादियों के लिए क्यों दिया जाता है। इसके अलावा बाबा बालक नाथ ट्रस्ट में पारित किया गया हैकि जितने भी ट्रस्टी बने हैं कोई भी मानदेय नहीं लेगा
लेकिन फिर भी मीटिंग में पारित करवाया जाता है कि ट्रस्ट टीम को मानदेय मिलना चाहिए। बाबा बालक नाथ ट्रस्ट के विभिन्न कर्मचारी रिटायर हो चुके हैं उनकी जगह नए कर्मचारी नहीं रखे जा रहे। लंगर में हॉस्पिटैलिटी के लिए कर्मचारियों की भर्ती करना अति जरूरी है। बाबा बालक नाथ ट्रस्ट देश का पहला ट्रस्ट है जिसके पास अपना कोई अधीक्षक नहीं है। बिना सुपरीटेंडेंट के ट्रस्ट कार्य कर रहा है।
वन विभाग की जमीन पर कब्जे किए गए हैं
बाबा बालक नाथ को जाने वाले रास्ते पर लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है जहां 14 फुट रास्ता है कई जगह तीन-चार फीट ही बचा हुआ है। राजस्व विभाग इस पर कार्रवाई क्यों नहीं करता। वन विभाग की जमीन पर कब्जे किए गए हैं। पूरा एरिया अवैध कब्जों की मार से परेशान है लेकिन अवैध कब्जों को आज तक नहीं हटाया गया
कब्जों को आज तक नहीं हटाया गया
मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग की व्यवस्था
किए जाने की जरूरत है लेकिन पार्किंग का कार्य भी वर्षों से आधार में लटका हुआ है। बाबा बालक नाथ मंदिर को जाने वाले बड़सर से शाह तलाई सड़क के किनारे श्रद्धालुओं पीने के पानी के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
श्रद्धालुओं के लिए रास्ते में कोई सार्वजनिक शौचालय का निर्माण नहीं किया गया है।
इसके अलावा बाबा बालक नाथ मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए रास्ते में कोई सार्वजनिक शौचालय का निर्माण नहीं किया गया है। सड़क के किनारे श्रद्धालु रात को भी पैदल मंदिर तक पहुंचाते हैं लेकिन इस रास्ते पर विद्युत लाइट का प्रबंध नहीं किया गया है।
करोड रुपए का चढ़ावा मंदिर में चढ़ता है
लेकिन श्रद्धालुओं पर खर्च होने की जगह अन्य विभिन्न कार्यों पर खर्च किया जाता है। मंदिर परिसर में सराय में रंग रोगन किए जाने की जरूरत है। वाई-फाई सुविधा के लिए भी श्रद्धालुओं को परेशान होना पड़ता है।
ट्रस्ट में 13 सरकारी तथा 12 गैर सरकारी ट्रस्टी होने चाहिए लेकिन
बाबा बालक नाथ ट्रस्ट में इसके अलावा 20 स्पेशल इनवाइटेड ट्रस्टी बनाए गए हैं उनका औचित्य क्या है। मंदिर में चढ़ावे की गणना करने के लिए समय पर ट्रस्टी उपलब्ध नहीं होते तो बिना ट्रस्ट टीम के चढ़ावा गिरना पड़ता है।
