जी-राम-जी सिर्फ़ रोजगार योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने का ब्लूप्रिंट: अनुराग ठाकुर

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कांग्रेस का “बापू प्रेम” बस दिखावा, गांधी जी का नाम सिर्फ राजनीति के लिए किया इस्तेमाल: अनुराग सिंह ठाकुर

 हिमाचल प्रदेश:18 जनवरी 2026,(सतीश शर्मा ) 
पूर्व केंद्रीय मंत्री व हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने विकसित भारत, गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण), यानी ‘जी राम जी’ पर चिंतपूर्णी विधानसभा के टकारला पंचायत में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि रोजगार की गारंटी की दिशा में ये मोदी सरकार द्वारा उठाया गया अभूतपूर्व कदम है जिससे ना सिर्फ ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी बल्कि यह विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को भी हासिल करने में मददगार साबित होगा। अनुराग ठाकुर ने आज प्रातः मौनी अमावस्या के अवसर पर माता चिंतपूर्णी के दरबार में शीश नवा कर सर्वकल्याण की कामना की।उन्होने कहा कि विकसित भारत जी-राम-जी के रूप में मोदी सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मनरेगा के ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव करते हुए विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025 यह नया कानून न केवल ग्रामीण परिवारों को अधिक दिनों के रोजगार की गारंटी देता है, बल्कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में भी यह सहायक होगा। विकसित भारत–जी राम जी विधेयक 2025 सिर्फ रोजगार योजना नहीं, बल्कि रोजगार और आजीविका मिशन के तौर पर देश की अर्थव्यवस्था को और गति देने वाली योजना बनेगी। इससे ग्रामीण परिवारों की आय सुरक्षा और मजबूत होगी और गांवों में खपत बढ़ेगी। नए कानून की प्रमुख विशेषता यह है कि ग्रामीण परिवारों को प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी दी जाएगी, जो मनरेगा के तहत मिलने वाले 100 दिनों से 25 दिन अधिक है। इससे ग्रामीण परिवारों की आय सुरक्षा मजबूत होगी और वे राष्ट्रीय विकास में अधिक योगदान दे सकेंगे। विकसित भारत-जी राम जी विधेयक 2025’ केवल एक रोजगार योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने का एक ब्लूप्रिंट है।

अनुराग ठाकुर ने कहा कि रोजगार गारंटी जैसी योजना तो 80 के दशक से चल रही है। कांग्रेस ने पहले 1989 में इसका नाम जवाहर रोजगार योजना रखा, फिर 1999 में इसका नाम जवाहर रोजगार समृद्धि योजना रखा, 2001 में सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना तो 2005 में नरेगा रखा… इन्हें तब गांधी जी याद नहीं आए। 2009 का चुनाव आते-आते कांग्रेस को बापू याद आए और योजना का नाम मनरेगा किया। मनरेगा का नाम पहले पहले महात्मा गांधी के नाम पर नहीं रखा गया। वो तो पहले नरेगा थी। बाद में जब 2009 के चुनाव आए तब चुनाव और वोट के कारण महात्मा गांधी याद आए। बापू याद आए। तब उसमें जोड़ा गया महात्मा गांधी। कांग्रेस पार्टी का “बापू प्रेम” बस दिखावा है और इन्होंने गांधी जी के नाम का इस्तेमाल सिर्फ राजनीति के लिए किया है।

कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए अनुराग कहा कि कांग्रेस ने हमेशा गांधी सरनेम का राजनीतिक इस्तेमाल किया, लेकिन महात्मा गांधी के विचारों और आदर्शों को कभी आत्मसात नहीं किया। ‘विकसित भारत जी राम जी’ परियोजना को लेकर कांग्रेस के विरोध पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि यह विरोध केवल राजनीतिक दिखावा है। कांग्रेस के समय इन योजनाओं में घोटाले आम थे और मजदूरों को अपनी मेहनत की दिहाड़ी पाने के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था। जबकि भाजपा सरकार ने पारदर्शिता लाकर सीधे बैंक खातों में भुगतान की व्यवस्था की है, जिससे मजदूरों को समय पर मेहनताना मिल रहा है। कांग्रेस ने अपने शासनकाल में जवाहर रोजगार योजना, जवाहर रोजगार समृद्धि योजना और फूड फॉर वर्क जैसी योजनाएं चलाईं, लेकिन इनमें कभी गांधी के नाम या उनके आदर्शों को महत्व नहीं दिया गया। भाजपा सरकार ने खादी को बढ़ावा दिया, स्वच्छता अभियान को जन आंदोलन बनाया और गांधी के विचारों को व्यवहार में उतारने का कार्य किया है। कांग्रेस केवल गांधी सरनेम के सहारे राजनीति करती रही, जबकि भाजपा सरकार ने गांधी के आदर्शों को जमीन पर उतारते हुए गरीब, मजदूर और ग्रामीण वर्ग के हित में ठोस कार्य किए हैं। सांसद ने केंद्र सरकार की नीतियों को गरीब और श्रमिक हितैषी बताते हुए कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास पहुंचेगा।

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