“चिंतपूर्णी”स्थान की खोज 14वीं शताब्दी में माई दास नामक एक दुर्गा भक्त ने की थी।

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हिमाचल 10 फरवरी 2026 : सतीश शर्मा

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ चिंतपूर्णी माता मंदिर की खोज वास्तव में 14वीं शताब्दी में माई दास (जिसे पंडित माई दास भी कहा जाता है) नामक एक समर्पित दुर्गा भक्त द्वारा की गई थी।

मूल कथा: एक मान्यता के अनुसार, माई दास छपरोह गाँव (वर्तमान चिंतपूर्णी) के निवासी थे और उन्होंने देवी छिन्नमस्तिका के दर्शन के बाद इस स्थान पर पिंडी स्थापित की थी।

स्थापना: उन्होंने माता की आज्ञा से घने जंगल में एक वट वृक्ष के नीचे पिंडी स्थापित की थी, जिसे आज चिंताओं को दूर करने वाली माँ चिंतपूर्णी के रूप में जाना जाता है।

आज के पुजारी: माई दास के वंशज ही आज भी मंदिर में पुजारी के रूप में पूजा-अर्चना करते हैं, जो लगभग 12 पीढ़ियों से चली आ रही है।

यह स्थान सती के चरण गिरने के कारण एक प्रमुख शक्तिपीठ माना जाता है।  

चिंतपूर्णी मान्यता के अनुसार मुख्य बातें: आपके सामने लेकर आएंगी

 

हम स्पष्ट नहीं कर सकते यह बातें सच्चे जा झूठ हैं हम सिर्फ आपको बताना चाहते हैं जो किताबों में लिखा गया है इतिहास उसके बारे में हम आपको सिर्फ हम आपको उसके बारे में बता रहे हैं

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