ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव पर 9 मार्च हो सकती है चर्चा, क्या लोकसभा स्पीकर को हटाने में सफल होगा विपक्ष ?

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लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पर विपक्ष का अविश्वास: 120 सांसदों का नोटिस, लेकिन इतिहास कहता है—कभी हटाया नहीं गया!

दिल्ली 11 फरवरी जीत समाचार

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को हटाने के लिए विपक्ष की तरफ से लाए जाने वाले अविश्वास प्रस्ताव पर वर्तमान बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन 9 मार्च को सदन में चर्चा कराई जा सकती है। सूत्रों ने कहा, “संभावना है कि बजट सत्र के दूसरे भाग के पहले दिन, यानी 9 मार्च को ही लोकसभा अध्यक्ष को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है।” सूत्रों का यह भी कहना है कि मामले का निपटारा होने तक बिरला आसन पर नहीं बैठेंगे। बिरला ने लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को निर्देश दिया है कि वह विपक्ष के नोटिस की जांच कर उचित कार्रवाई करें।

पक्ष ने ओम बिरला को स्पीकर के पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस मंगलवार (10 फरवरी) को लोकसभा महासचिव को सौंपा।

विपक्ष बिरला पर पक्षपातपूर्ण तरीके से सदन संचालित करने, कांग्रेस सदस्यों पर झूठे इल्जाम लगाने तथा अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया।लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने बताया कि विपक्ष की ओर से नोटिस सौंपे जाने के बाद लोकसभा स्पीकर बिरला ने फैसला किया कि वह मामले का निपटारा होने तक आसन पर नहीं बैठेंगे। उन्होंने लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को निर्देश दिया कि नोटिस की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। सूत्रों ने यह भी कहा कि नोटिस पर विचार किया जाएगा। फिर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

निचले सदन में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई, कांग्रेस के मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश और सचेतक मोहम्मद जावेद ने लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को यह नोटिस सौंपा। विपक्ष को दो बार नोटिस सौंपना पड़ा क्योंकि पहली बार जो नोटिस सौंपा गया था कि उसमें सदन के भीतर कुछ घटनाक्रमों का उल्लेख करते समय जिन तिथियों का हवाला दिया गया था उनमें गलती थी।नोटिस पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, DMK और कई अन्य विपक्षी दलों के करीब 120 सांसदों से अधिक सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। विपक्ष ने दावा किया कि 3 फरवरी को आठ विपक्षी सांसदों को पूरे बजट सत्र के लिए मनमाने ढंग से निलंबित कर दिया गया। उन्हें केवल अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए दंडित किया जा रहा है।

विपक्ष का आरोप

नोटिस में BJP सांसद निशिकांत दुबे का नाम लिए बगैर कहा गया है, “बीते चार फरवरी 2025 को भारतीय जनता पार्टी के एक सांसद को दो पूर्व प्रधानमंत्रियों पर पूरी तरह आपत्तिजनक और व्यक्तिगत हमले करने की अनुमति दी गई। स्थापित परंपराओं एवं मर्यादा के मानदंडों की अवहेलना करने के बावजूद उन्हें एक बार भी नहीं टोका गया। हमारे अनुरोध के बावजूद इस सांसद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि वह आदतन ऐसी गतिविधियां करते हैं।”

विपक्ष ने ओम बिरला द्वारा सदन में पांच फरवरी को दिए गए उस वक्तव्य का भी हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि चार फरवरी को कांग्रेस के कई सदस्य सदन के नेता (प्रधानमंत्री) की सीट के पास पहुंचकर किसी अप्रत्याशित घटना को अंजाम देना चाहते थे। इसलिए उनके अनुरोध पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में नहीं आए।

नोटिस में आरोप लगाया गया है, “ये टिप्पणियां कांग्रेस के सदस्यों के खिलाफ खुले तौर पर झूठे आरोप लगाने वाली और अपमानजनक प्रकृति की हैं।” विपक्ष ने कहा कि हम लोकसभा स्पीकर को व्यक्तिगत रूप से सम्मान देते हैं। लेकिन जिस प्रकार से उन्होंने लगातार विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास किया है, उससे हम अत्यंत आहत और व्यथित हैं।

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