सिस्टम फेल: धमकियों के साये में लुधियाना, क्या सो रही है भगवंत मान सरकार और पंजाब पुलिस ?

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लुधियाना:10 मार्च 2026 दिनेश कुमार शर्मा

आज लुधियाना के दर्जनों स्कूलों को मिली बम की धमकी ने न केवल मासूम बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डाला, बल्कि पंजाब सरकार और पुलिस के खोखले सुरक्षा दावों की भी पोल खोल दी है। शहर के नामी स्कूलों में मची भगदड़ और सड़कों पर रोते-बिलखते अभिभावक इस बात का सबूत हैं कि राज्य का खुफिया तंत्र और पुलिस प्रशासन इन धमकियों को रोकने में पूरी तरह विफल रहा है।

सरकार के पास कोई ‘प्लान’ नहीं

पिछले कुछ महीनों में पंजाब के कई शहरों में इस तरह की धमकियां बार-बार मिल रही हैं, लेकिन पंजाब सरकार अब तक कोई ठोस ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ या साइबर सुरक्षा ढांचा तैयार नहीं कर पाई है। अभिभावकों का आरोप है कि सरकार केवल बड़े-बड़े विज्ञापनों में सुरक्षा की बात करती है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि एक अज्ञात ईमेल पूरे शहर को बंधक बना लेता है और पुलिस केवल ‘सर्च ऑपरेशन’ के नाम पर खानापूर्ति करती रह जाती है।

पुलिस का कमजोर सूचना तंत्र

साइबर अपराध के इस दौर में पंजाब पुलिस का सूचना तंत्र (Intelligence) बेहद पिछड़ा नजर आ रहा है। धमकी भरे ईमेल भेजने वालों तक पहुंचना तो दूर, पुलिस प्रशासन बच्चों और अभिभावकों को शांत करने के लिए कोई स्पष्ट प्रोटोकॉल तक नहीं बना पाया। स्कूलों के बाहर मची अफरा-तफरी ने यह साफ कर दिया कि आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए पुलिस के पास कोई पुख्ता रणनीति नहीं है।

जनता का सवाल: कब तक डरे रहेंगे बच्चे ?

विपक्ष और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब सरकार और पुलिस प्रशासन एक ‘धमकी भरे ईमेल’ के स्रोत का पता लगाने और उसे रोकने में सक्षम नहीं है, तो वे राज्य की सुरक्षा का दावा कैसे कर सकते हैं? क्या पंजाब सरकार केवल घटना घटने का इंतजार कर रही है? आज की घटना ने साबित कर दिया है कि लुधियाना जैसे बड़े औद्योगिक शहर की सुरक्षा फिलहाल राम भरोसे है।

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