हिमाचल एक्सक्लूसिव स्टोरी भारतीय जनता पार्टी में धूमल गुटके विधायकों को निपटाने का कार्य

0

Views: 40

सरकार बनाने में जिन्होंने दिया था महत्वपूर्ण योगदान उन्हें गिन गिन कर निपटाया सबको घर बैठाया जो बचे हैं सभी भाजपा के निशाने पर

रमेश धवाला,बीरेंद्र कंवर बलदेव सहित कई भाजपा नेताओं को मिली धूमल परिवार का साथ देने की सजा

हमने वफा की हमारे साथ बेवफाई हुई हमारा कसूर क्या था जिस चमन को सिंचने में बरसों बीताए उसी के सिंहासन पर कांग्रेस के नेताओं को बैठाया

भारतीय जनता पार्टी जो इनकी ना हुई वह किसकी होगी

हिमाचल के अंदर की राजनीति की एक्सक्लूसिव स्टोरी जीत समाचार सतीश शर्मा की विशेष रिपोर्ट

हमीरपुर/ ज्वाला जी देहरा/ बंगाणा। हमने जो कहा

कि उस बेवफा का हमें क्या मिला यह गाना नहीं बल्कि हकीकत है भारतीय जनता पार्टी के उन नेताओं की जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी खासकर प्रेम कुमार धूमल की सरकार बनाने में तथा भाजपा की पहली बार 5 साल चलने वाली गैर कांग्रेस सरकार को प्रदेश में मजबूत करने का कार्य किया जी हां हम बात कर रहे हैं देहरा के विधायक रहे रमेश धवाला की। 1998 से पहले संगठन को मजबूत करने के लिए ज्वालामुखी में एक कार्यक्रम होता है जिसमें प्रेम कुमार धूमल तथा शांता कुमार गुटों में बंटी भाजपा में घमासान होता है उस घमासान में एक चेहरा निकाल कर आता है

जिसका नाम है बलदेव शर्मा बलदेव शर्मा ने खुलकर ज्वालामुखी बैठक में प्रेम कुमार धूमल का साथ दिया शांता कुमार को खरी खोटी सुनाई इस कार्यक्रम में भाजपा के प्रमुख नेता शामिल हुए थे बाद में 1998 के चुनाव आए तो बलदेव शर्मा को टिकट तो मिला लेकिन रमेश धवला ने आजाद चुनाव लड़कर जीत हासिल की इसी जीत के बाद देहरा से रमेश धवला भी देहरा चुनाव जीत गए।

चुनाव के परिणाम आए सरकार बनने की बात आई तो रमेश धवाला का अपहरण किया गया जबरदस्ती उसे उठाकर कांग्रेस पार्टी में मिलाने के लिए जो तांडवहुआ इसका गवाह पूरा हिमाचल बना हमने भी उसे तांडव का दृश्य अपनी आंखों से देखा रात को हाली लॉज में धवाला को रखा गया राजा वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के लिए संघर्ष कर रहे थे। संघर्ष में निकले हिमाचल से गए लोगों की गाड़ियां तोड़ी गई उन्हें पीटा गया दौड़ा दौड़ा कर रेस्ट हाउस से निकाला गया।

बाद में रमेश धवाला ने भाजपा के कहने पर प्रेम कुमार धूमल का साथ दिया तथा हिमाचल विकास कांग्रेस के पंडित सुखराम, ठाकुर महेंद्र सिंह, मंसाराम तथा प्रकाश चौधरी बाद में रामलाल मारकंडे ने भाजपा हिविंका गठबंधन की सरकार 5 साल चली। उसके बाद प्रेम कुमार धूमल एक बार फिर मुख्यमंत्रीबने। 2017 का चुनाव आया तो प्रेम कुमार धूमल को जब हमीरपुर की जगह सुजानपुर से चुनाव लड़ाया तो प्रदेश में भाजपा तो जीत गई लेकिन प्रेम कुमार धूमल 1919 वोटो से चुनाव हार गए। हिमाचल प्रदेश के पहले जीते हुए विधायक वीरेंद्र कंवर ने कहा की मैं अपनी सीट खाली करता हूं प्रेम कुमार धूमल यहां से चुनाव लड़कर विधानसभा जा सकते हैं उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाए। बस यही कसूर था वीरेंद्र कंवर का। उसके बाद वीरेंद्र ने तो सीट खाली नहीं की उन्हें मंत्रिमंडल में भी स्थान मिला लेकिन भाजपा की नजरों में खटकने पर 2022 में वीरेंद्र कंवर का पत्ता भी साफ करदिया।

बलदेव शर्मा को भी साइड लाइन कर दिया गया उनकी जगह भारतीय जनता पार्टी से कांग्रेस में शामिल हुए विधायक इंद्रदतत लखनपाल को टिकट दिया गया। इस तरह एक ही तीर से कई निशाने लगाएं गये। जिस राजेंद्र राणा ने 1919 वोटो से प्रेम कुमार धूमल को हराया था भाजपा को जीत दिलाई थी उस राजेंद्र राणा को भी निपटाने के लिए कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी रहे कप्तान रंजीत को सुजानपुर में कांग्रेस का विधायक बना दिया गया। इस हमाम में राजेंद्र राणा ही नहीं बल्कि उनके जैसे भारतीय जनता पार्टी के अनेक लोगों को भाजपा से हराने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। भारतीय जनता पार्टी का संघर्ष का कालखंड हमने अपनी आंखों से देखा है बलदेव शर्मा वीरेंद्र कंवर, रमेश धवला का एक जमाने में भाजपा को मजबूत करने में क्या योगदान था उनमें सुजानपुर के पूर्व विधायक राजेंद्र राणा भी शामिल थे जब प्रेम कुमार धूमल ने उन्हें मुख्यमंत्री का मीडिया सलाहकार बनाया था उसके बाद ही कांग्रेस पार्टी में उन्हें शामिल करवा कर उनका बना बनाया करियर भी समाप्त किया गया।

देवभूमि हिमाचल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी जो विश्व की सबसे बड़ी पार्टी होने का दम भरती है उसी को निपटाने के लिए बड़ा खेल हिमाचल प्रदेश में हुआ है। 2027 के चुनाव में हिमाचल प्रदेश भारतीय जनता पार्टी में कितना बड़ा विस्फोट हो सकता है यह तो तभी पता चलेगा लेकिन माहौल विघटन का बना हुआ है टॉप न्यूज की स्पेशल खबर के बारे में आपकी क्या राय है कमेंट जरूरकरें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *