जन्मदिन के बहाने विशेष लेख
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हिमाचल से सतीश शर्मा की रिपोर्ट.
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह का जन्म एक आम मध्यवर्गीय परिवार में हुआ उनके पिता हिमाचल पथ परिवहन निगम में नौकरी करते थे तथा माता आम परिवारों की तरह घर में रहकर बच्चों का पालन पोषण करती थी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह के माता-पिता के भी सपने थे की बेटा बड़ा होकर जीवन में अपने लक्ष्य निर्धारित करें पढ़ाई के लिए शिमला में शिक्षा का मौका मिला कॉलेज की शिक्षा के बाद विश्वविद्यालय में पढ़ाई की कानून की पढ़ाई साथ में राजनीति की पढ़ाई। आम मां-बाप की तरह उनके माता-पिता भी सोचते थे कि बेटा बड़ा होकर नामी वकील बने लेकिन कहते हैं कंपनी का असर हमेशा रहता है एनएसयूआई से जुड़े तो उनकी मुलाकात आनंद शर्मा, विद्या स्टोक्स, बिप्लब ठाकुर, पंडित सुखराम से हुई। छात्र राजनीति से कांग्रेस की पौध युवा कांग्रेस में प्रवेश हुआ फिर अपने दम पर नगर निगम में कार्य करने का मौका मिला बाद में कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बने तथा एक दिन हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए आसान नहीं था सफर इस सफर में बहुत से अपने दूर हो गए तथा ऐसे लोगों का भी साथ मिला जो विचारधारा से तो कभी अपने नहीं थे लेकिन रिश्तों से अपनों से भी बढ़कर। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल चाहे पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार उनका अपार प्यार तथा स्नेह मिला।
आज हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं तथा विकट परिस्थितियों में हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहेहैं। केंद्र में कांग्रेस हाई कमान सोनिया गांधी प्रियंका गांधी तथा राहुल गांधी के लाडले बन गए हैं।
हिमाचल प्रदेश की सता उन्हें चांदी की प्लेट में डालकर नहीं सौंपी गई। उन्होंने संघर्ष से प्राप्त की है।
उनके जीवन का एक प्रसंग
उन दिनों उप मंडल बड़सर में अमर उजाला दैनिक समाचार के लिए रिपोर्टिंग का कार्य करता था। कांग्रेस पार्टी की एक बैठक मैहरे में आयोजित की जा रही थी कांग्रेस पार्टी के उन दिनों बड़सर में दो गुट थे राजेंद्र जार तथा मनजीत सिंह डोगरा कांग्रेस पार्टी का एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा था कांग्रेस की लीडर बड़सर दौरे पर थी। मनजीत सिंह डोगरा अपने समर्थकों के साथ मैडम का इंतजार कर रहे थे लेकिन मैडम का रूट बदलकर उन्हें सभा स्थल तक पहुंचाने का कार्य किया गया जैसे ही मैडम बाजार में पहुंची नारेबाजी शुरू हो गई फिर क्या था एक घेरा बना कर मैडम को सभा स्थल तक पहुंचाया गया वहां जब कार्यक्रम शुरू हुआ तो नारेबाजी शुरू हो गई कार्यक्रम को हैक करने का कार्यक्रम फिर जो हुआ वैसा कभी नहीं हुआ लाठियां भांजी गई गागर जो पानी पीने के लिए रखी गई थी किसी के सिर पर फोड़ दी गई। इतनी लाठियां चली की महाभारत जैसा नजारा था। पूर्व विधायक मनजीत सिंह डोगरा तथा उनके समर्थकों को सभा स्थल से भगाया गया। पत्रकारिता में ऐसा तांडव मैंने अपने जीवन में कभी नहीं देखा जब 1998 में शिमला में निचले हिमाचल से गए भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को पिटा गया था तब भी नहीं। मैहरे में आयोजित उस कार्यक्रम में सुखविंदर सिंह तथा उनके समर्थक भी उपस्थित थे।
हिमाचल के मुख्यमंत्री बने तो विभिन्न समस्याओं का सामना करते हुए मुख्यमंत्री निरंतर आगे बढ़ रहेहैं। हिमाचल के इतिहास में पहली बार है जब मुख्यमंत्री कैबिनेट मंत्री विधायकों तथा उच्च प्रशासनिक अधिकारियों के वेतन में कटौती की गई है। 2027 में विधानसभा के चुनाव हैं। मुख्यमंत्री की प्रशासनिक पकड़ कड़ी होनी चाहिए। मुख्यमंत्री पहले मुख्यमंत्री हैं जिनका साथ देने के लिए उनकी धर्मपत्नी भी विधानसभा में है भले ही उनकी पार्टी के कई नेता भारतीय जनता पार्टी के नाव में सवार होकर महाभारत की तरह उनके विरोध में खड़े हो गए हैं। इस पूरे युद्ध में महाभारत की संज्ञा दी जाए तो पांडव कौन तथा कौरव कौन इसका निर्णय हिमाचल की जनता को करना चाहिए किसका साथ देना चाहिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह का अथवा भाजपा का। मेरे जैसे योद्धा को भी मुश्किल है फैसला करना लेकिन बरबरीक की तरह मेरा भी इतिहास रहा है हारने वालों की तरफ से लड़ने का पत्रकारिता में तो हमेशा पत्रकार जमीनी हकीकत दिखता है। पत्रकारिता निष्पक्ष निडर हो इसी को मध्य नजर रखकर लेख मुख्यमंत्री के जन्मदिन पर लिखा है आपकी क्या राय है कमेंट जरुर करें।
क्या हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार रिपीट करेगी मुख्यमंत्री के फैसला से आप आप कितने खुश हैं। अपनी राय जरुर दें।
