बाबा बालक नाथ की तपोभूमि शाहतलाई में अव्यवस्था का आलम; मंदिर प्रशासन के दावों की खुली पोल
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जीत समाचार: विशेष पड़ताल
शाह तलाई 8 अप्रैल 2026 ब्यूरो चीफ
सिद्ध पीठ बाबा बालक नाथ की तपोभूमि शाहतलाई, जहाँ बाबा जी ने माता रतनो की गैयां चराई थीं, आज वहां के मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जहाँ एक ओर प्रशासन कागजों में श्रद्धालुओं के लिए बड़े-बड़े इंतजामों के दावे करता है, वहीं ‘जीत समाचार’ की ग्राउंड रिपोर्ट में हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आई।
बारिश में भीगते श्रद्धालु, मौन प्रशासन
श्रद्धालुओं की अटूट आस्था चरण गंगा और बाबा जी के धूने के साथ जुड़ी है। भारी बारिश के बावजूद श्रद्धालु खुले आसमान के नीचे धूना लगाकर बैठने को मजबूर हैं। मंदिर अधिकारी की अनदेखी का आलम यह है कि बारिश से बचने के लिए वहां कोई समुचित शेड या किनारा उपलब्ध नहीं है। श्रद्धालु भीगते हुए अपनी परंपराएं पूरी कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन चैन की नींद सो रहा है।
श्रद्धालुओं का फूटा गुस्सा: “सिर्फ दान लेते हैं, सुविधा नहीं देते”
श्रद्धालु यादविंदर सिंह ने बताया कि लाखों रुपये का दान देने के बावजूद धूना स्थल पर कोई व्यवस्था नहीं है। वहीं, बचपन से यहाँ आ रहे श्रद्धालु विक्की कुमार ने तीखे शब्द इस्तेमाल करते हुए कहा, “प्रशासन हमेशा फेल रहा है। हमारी सरकार से मांग है कि यहाँ ऐसा अधिकारी तैनात किया जाए जो श्रद्धालुओं के प्रति वफादार हो। सालों से जमे अधिकारियों का तबादला होना चाहिए ताकि नई सोच के साथ मंदिर का सुधार हो सके।”
दानियों के भरोसे व्यवस्था, अफसर झाड़ रहे पल्ला
‘जीत समाचार’ की पड़ताल में यह भी सामने आया कि वर्तमान धूना स्थल भी चंडीगढ़ के एक श्रद्धालु ने अपनी श्रद्धा से बनवाया था। मंदिर प्रशासन ने न तो इसकी देखरेख की और न ही यहाँ शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं विकसित कीं।
अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने का खेल
आरोप है कि मंदिर एसडीओ और स्थानीय अधिकारी केवल बड़े अफसरों के निरीक्षण के वक्त कागजी घोड़े दौड़ाकर ‘ऑल इज वेल’ की तस्वीर पेश करते हैं। असलियत में श्रद्धालु बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। जब तक इन अधिकारियों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक हालात सुधरने की उम्मीद कम है।
सावधान! ‘जीत समाचार’ जल्द ही मंदिर प्रशासन के कुछ और बड़े कारनामों का खुलासा करेगा।
पढ़ते रहिए, जीत समाचार… सच्चाई के साथ।
