लुधियाना नगर निगम में तबादला नीति पर सवाल, एक ही सीट पर ‘जमे’ कर्मचारीरोटेशन आदेश के बावजूद सालों से नहीं बदली कुर्सी,
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लुधियाना | 6 मई 2026/ब्यूरो
लुधियाना: नगर निगम में कर्मचारियों के तबादलों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि रोटेशन पॉलिसी का सही से पालन नहीं हो रहा, जिसके चलते कई कर्मचारी 5 से 7 साल तक एक ही विभाग या सीट पर काम कर रहे हैं।
कहां फंस रहा है पेच ?
1. तबादले रुकने के आरोप :
निगम सूत्रों के अनुसार, अक्सर यह देखा गया है कि तबादला आदेश जारी होने के बाद भी कई कर्मचारी बाहरी दबाव के चलते अपनी पुरानी सीट पर बने रहते हैं। मनचाही पोस्टिंग न छूटे, इसके लिए हर स्तर पर कोशिशें की जाती हैं।
2. नियमों की अनदेखी:
नियमानुसार हर 3 साल में रोटेशन अनिवार्य है, ताकि काम में पारदर्शिता बनी रहे। लेकिन हकीकत में कई कर्मचारी एक ही कुर्सी पर एक दशक से जमे हैं। इससे न सिर्फ काम करने के तरीके में एकाधिकार बनता है, बल्कि शिकायतों का निपटारा भी प्रभावित होता है।
3. हाउस में उठा मुद्दा:
नगर निगम की बैठकों में कई पार्षदों ने यह मुद्दा उठाया है कि बिना ठोस आधार के कर्मचारियों का तबादला कर दिया जाता है। खासकर सफाई कर्मचारियों को अचानक एक वार्ड से दूसरे वार्ड में भेजने से वहां की सफाई व्यवस्था चरमरा जाती है। पार्षदों ने तबादला प्रक्रिया में पारदर्शिता और पार्षदों से सलाह की मांग की है।
4. पुराना मामला भी गर्म:
पिछले कार्यकाल के दौरान कुछ ऐसे कर्मचारियों का मामला सामने आया था जो लंबे समय ड्यूटी से नदारद थे, फिर भी उनका नाम नियमितीकरण की सूची में शामिल कर लिया गया था। उस समय उच्च स्तर पर इसकी जांच के आदेश दिए गए थे।
5 ट्रांसफर पर राजनीतिक कब्जा:
निगम सूत्रों के अनुसार, कई कर्मचारी अपने राजनीतिक संपर्कों का इस्तेमाल कर तबादला रुकवा लेते हैं। मनचाही सीट पर बने रहने के लिए सत्ता पक्ष के नेताओं की सिफारिश चलती है। इससे रोटेशन पॉलिसी सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है।
प्रशासन के सामने चुनौती
नगर निगम प्रशासन द्वारा समय-समय पर रोटेशन और तबादलों के आदेश जारी किए जाते हैं। लेकिन इन आदेशों को जमीनी स्तर पर 100% लागू करना अभी भी बड़ी चुनौती है। अधिकारियों का मानना है कि सिस्टम को और मजबूत करने की जरूरत है।
आम जनता को नुकसान
एक ही सीट पर लंबे समय तक रहने से कर्मचारी का रवैया ढीला पड़ जाता है। वहीं नए वार्ड में गए कर्मचारी को क्षेत्र समझने में 2-3 महीने लग जाते हैं। नतीजा – सफाई, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट, प्रॉपर्टी टैक्स और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे जरूरी काम लटक जाते हैं।नगर निगम का पक्ष: प्रशासन का कहना है कि जल्द ही सभी विभागों की तबादला सूची अपडेट की जा रही है। नियमों के तहत रोटेशन किया जाएगा ताकि जनता को बेहतर और तेज सेवाएं मिल सकें।बड़ा सवाल: क्या इस बार नगर निगम रोटेशन पॉलिसी को सख्ती से लागू कर पाएगा, या फिर आदेश फिर से फाइलों में दबकर रह जाएंगे?
