फुटपाथ पर होटल, सड़क पर पैदल यात्री! सिविल लाइन में अतिक्रमण का खुला खेल, क्या नगर निगम जोन-ए की आंखें बंद हैं?
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कार्रवाई या सिर्फ औपचारिकता? फुटपाथों पर कब्जों ने नगर निगम की व्यवस्था पर खड़े किए गंभीर सवाल
लुधियाना | 6 जुलाई 2026 | विक्की कुमार
लुधियाना के पॉश क्षेत्र सिविल लाइन में जीत समाचार की ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान ऐसे दृश्य सामने आए हैं, जिन्होंने नगर निगम जोन-ए के अतिक्रमण हटाओ अभियान की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। जिन फुटपाथों का निर्माण पैदल यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए किया गया था, वहां होटल का सामान, बड़े-बड़े बर्तन, टेबल-कुर्सियां तथा रसोई से जुड़ी सामग्री रखी हुई मिली। कई स्थानों पर फुटपाथ पूरी तरह व्यावसायिक उपयोग में दिखाई दिए।
फुटपाथ या होटल का विस्तार ?
मौके पर देखा गया कि फुटपाथ पर बर्तन धोए जा रहे थे, भोजन तैयार करने का सामान रखा हुआ था तथा टेबल-कुर्सियां भी बाहर लगी हुई थीं। इसके कारण पैदल चलने वाले लोगों को मजबूर होकर सड़क पर चलना पड़ा, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ गई। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी दिन कोई हादसा हो जाता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
क्या प्रभावशाली क्षेत्रों में नियमों का पालन नहीं कराया जाता?
अक्सर नगर निगम द्वारा छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-फड़ी लगाने वालों के खिलाफ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाती है। लेकिन यदि सिविल लाइन जैसे प्रमुख क्षेत्र में लंबे समय से फुटपाथों पर व्यावसायिक कब्जे बने हुए हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या कानून और नियम सभी के लिए समान रूप से लागू होते हैं या नहीं?
क्या कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है ?
जब जीत समाचार ने इस संबंध में नगर निगम जोन-ए के तहबाजारी निरीक्षक से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि समय-समय पर अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया जाता है तथा जल्द ही दोबारा कार्रवाई की जाएगी। हालांकि यह सवाल अब भी बना हुआ है कि यदि अभियान नियमित और प्रभावी है, तो ऐसे अवैध कब्जे बार-बार कैसे दिखाई दे रहे हैं?
जनता के सवाल
क्या फुटपाथ अब पैदल यात्रियों के लिए नहीं बचे हैं?
क्या नगर निगम का अतिक्रमण हटाओ अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह गया है?
क्या सिविल लाइन जैसे क्षेत्रों में कुछ लोगों को नियमों से छूट मिली हुई है?
यदि लोगों को सड़क पर चलना पड़े, तो फुटपाथ बनाने का उद्देश्य क्या रह जाता है?
तहबाजारी निरीक्षक का पक्ष
नगर निगम जोन-ए के तहबाजारी निरीक्षक ने कहा कि विभाग समय-समय पर अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाता है और शीघ्र ही दोबारा कार्रवाई की जाएगी। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अभियान वास्तव में प्रभावी है, तो ऐसे कब्जे बार-बार क्यों दिखाई देते हैं? लोगों का यह भी कहना है कि कार्रवाई केवल कुछ समय के लिए होती है और उसके बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है।
जीत समाचार की मांग
जीत समाचार मांग करता है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि किसी भी स्थान पर अवैध अतिक्रमण पाया जाता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। यदि जांच में नगर निगम के किसी अधिकारी की लापरवाही, उदासीनता या मिलीभगत सामने आती है, तो उसके विरुद्ध भी विभागीय तथा कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि आम नागरिकों का विश्वास प्रशासन पर बना रहे।
जीत समाचार की नजर
अब देखना यह होगा कि नगर निगम इस मामले में ठोस और स्थायी कार्रवाई करता है या फिर फुटपाथों पर अतिक्रमण का यह सिलसिला पहले की तरह जारी रहता है। आखिरकार, सार्वजनिक फुटपाथ नागरिकों की सुविधा और सुरक्षित आवागमन के लिए बनाए जाते हैं, न कि किसी निजी व्यवसाय के विस्तार के लिए।
