मनरेगा बंद कर ‘वीबी-जी-राम-जी योजना’ लागू करना हिमाचल के हित में नहीं: मुख्यमंत्री सुक्खू
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समीक्षा बैठक में ग्रामीण विकास विभाग को सशक्त बनाने के लिए कई अहम फैसले, पंचायत भवनों और स्वयं सहायता समूहों के लिए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
शिमला, 9 जुलाई | दिनेश कुमार शर्मा
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शिमला में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को बंद कर उसकी जगह ‘वीबी-जी-राम-जी योजना’ लागू करना हिमाचल प्रदेश के हित में नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मनरेगा के तहत केंद्र सरकार परियोजनाओं के लिए 100 प्रतिशत धनराशि उपलब्ध कराती थी, जबकि नई योजना में कुल खर्च का 10 प्रतिशत राज्य सरकार को वहन करना होगा। इससे प्रदेश के पहले से सीमित वित्तीय संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाया जाएगा।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। उन्होंने विभाग में रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरने और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई भर्तियां करने के निर्देश दिए।
उन्होंने निर्माणाधीन पंचायत भवनों के कार्यों को शीघ्र पूरा करने के लिए 30 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने की घोषणा की। इसके अलावा ऊना में निर्माणाधीन जिला पंचायत संसाधन केंद्र के लिए भी अतिरिक्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि अब तक 310 स्वयं सहायता समूहों को 65.56 लाख रुपये की ऋण सहायता प्रदान की जा चुकी है। उनके उत्पादों के विपणन के लिए शिमला में ‘हिमाचल हाट’ का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही समूहों को फूड वैन उपलब्ध करवाई गई हैं और भविष्य में ऐसी और वैन उपलब्ध कराने की योजना है।
उन्होंने विभाग की सभी प्रमुख योजनाओं को मुख्यमंत्री डैशबोर्ड से जोड़ने के भी निर्देश दिए, ताकि योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके।
बैठक में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
