खेल

राष्ट्रपति भवन में हिमाचल की कला का गौरव, पहाड़ी लघु चित्रकला को मिला राष्ट्रीय सम्मान

देश के सर्वोच्च मंच पर हिमाचल की कला का परचम, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के प्रख्यात कलाकार डॉ. बलविंद्र कुमार को राष्ट्रपति भवन में किया सम्मानित, राष्ट्रीय मंच पर चमकी हिमाचल की सांस्कृतिक विरासत

शिमला (अभिषेक न्यूज़ एडिटर जीत समाचार) |

हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को उस समय राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली, जब राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष समारोह में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) के प्रख्यात कलाकार एवं शिक्षक डॉ. बलविंद्र कुमार को पहाड़ी लघु चित्रकला के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया।
राष्ट्रपति भवन में भारतीय पारंपरिक कला शैलियों के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से आयोजित इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में देशभर से केवल 12 चुनिंदा कलाकारों को आमंत्रित किया गया था। इस अवसर पर डॉ. बलविंद्र कुमार ने हिमाचल की ऐतिहासिक पहाड़ी लघु चित्रकला की विविध शैलियों को अपनी उत्कृष्ट कलाकृतियों के माध्यम से प्रस्तुत कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया।
डॉ. बलविंद्र कुमार की प्रदर्शित कलाकृतियों में गुलेर शैली की ‘रागिनी बसंती’, ‘कुमारसंभव’ पर आधारित कार्तिकेय जन्मोत्सव, चंबा शैली, मंडी शैली की शिवरात्रि, कुल्लू दशहरा तथा बसोहली शैली में वन एवं प्राणी विषयक चित्र विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। इन सभी चित्रों में प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया गया, जो हिमाचल की पारंपरिक कला की मौलिकता और प्रकृति से उसके गहरे संबंध को दर्शाता है।

23 वर्षों से कला संरक्षण में जुटे हैं डॉ. बलविंद्र कुमार
कांगड़ा जिले के पालमपुर क्षेत्र के निवासी डॉ. बलविंद्र कुमार पिछले 23 वर्षों से पहाड़ी लघु चित्रकला के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। वर्ष 2009 से वे हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के अंतर्विषयक अध्ययन संस्थान में एमएफए (पहाड़ी लघु चित्रकला) के विद्यार्थियों को इस पारंपरिक कला का प्रशिक्षण दे रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक प्रदर्शनियों, कार्यशालाओं और कला आयोजनों में हिमाचली कला को नई पहचान दिलाई है।
उनकी चित्रकृतियों में हिमाचल के मेले, त्योहार, लोक संस्कृति, लोकजीवन तथा महाकवि कालिदास की रचनाओं के भावों को पहाड़ी शैली में जीवंत रूप दिया गया है।
डॉ. बलविंद्र कुमार ने इस सम्मान को हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का सम्मान बताते हुए कहा कि यह पुरस्कार उन्हें पहाड़ी लघु चित्रकला को विलुप्त होने से बचाने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयासों के लिए मिला है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि पूरे प्रदेश के कलाकारों और कला प्रेमियों के लिए गर्व का विषय है।
जीत समाचार की ओर से डॉ. बलविंद्र कुमार को इस राष्ट्रीय उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

You may have missed