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“गज़लों का ताज” वेब सीरीज का पहला शेड्यूल पूरा, रणजीत सिंह खैहरा बोले— गज़लें देती हैं आत्मिक शांति

शहीदी पार्क व मिनी रोज़ गार्डन में हुई शूटिंग, कमल नैन लुधियानवी की तीन गज़लों का हुआ फिल्मांकन

लुधियाना, (जीत समाचार):
गज़ल केवल शायरी की एक विधा नहीं, बल्कि इंसान के जज़्बातों और संवेदनाओं की सबसे खूबसूरत अभिव्यक्ति है। गज़लें प्रेम, दर्द, उम्मीद और जीवन के अनुभवों को इस तरह प्रस्तुत करती हैं कि सुनने वाला कुछ पल के लिए तनाव और भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर होकर आत्मिक शांति का अनुभव करता है। यह विचार प्रसिद्ध समाजसेवी एवं राजनीतिक व्यक्तित्व रणजीत सिंह खैहरा ने शहीदी पार्क, किदवई नगर में साहिर लुधियानवी वेब सिने प्रोडक्शंस की आगामी वेब सीरीज “गज़लों का ताज” के पहले शूटिंग शेड्यूल के उद्घाटन अवसर पर व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि आज के समय में जब लोग मानसिक तनाव, अकेलेपन और प्रतिस्पर्धा के दबाव से जूझ रहे हैं, ऐसे दौर में साहित्य और विशेष रूप से गज़ल इंसान को आत्मिक सुकून देने का कार्य करती है। गज़लें केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि प्रेम, भाईचारे, इंसानियत और आत्ममंथन का संदेश देने वाली सशक्त विधा हैं।
वेब सीरीज के पहले शेड्यूल के दौरान सुप्रसिद्ध गज़ल गायक कमल नैन लुधियानवी की तीन गज़लों— “मैं इश्क़ में तुमको दूँ क्या निशानी”, “मुद्दत के बाद मिले हो, पूरी शिद्दत के साथ मिले हो” तथा “कैसे-कैसे रंग दिखाती है ज़िंदगी” की शूटिंग शहीदी पार्क और मिनी रोज़ गार्डन में सफलतापूर्वक पूरी की गई।
इन गज़लों के बोल प्रसिद्ध कवि एवं शायर अशोक राही ने लिखे हैं, जबकि संगीत एवं वीडियो निर्देशन एम. सिंह ने किया। शूटिंग के दौरान पूरी टीम ने उत्साह के साथ कार्य किया और कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर वेब सीरीज के मुख्य कलाकार रणवीर उपाध्याय, अश्विनी महाजन, परमिंदर सिंह पम्मा, मनदीप प्रिंसी, वरिंदर सिंह बडयाल, कोहिनूर जीत सिंह खैहरा सहित अनेक गणमान्य नागरिक और दर्शक उपस्थित रहे।
जीत समाचार का मानना है कि “गज़लों का ताज” जैसी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां न केवल गज़ल की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाएंगी, बल्कि समाज में साहित्य, संगीत और संवेदनाओं के प्रति नई जागरूकता भी पैदा करेंगी।

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