जोन ए में नए अधिकारी, क्या बदलेगी कार्यप्रणाली ?
बिल्डिंग ब्रांच में फेरबदल के बाद दो चर्चित निर्माण फिर सुर्खियों में पहले सील हुईं बिल्डिंगें, अब नए अधिकारियों के आने के बाद कार्रवाई की दिशा पर नजर
लुधियाना | जीत समाचार | 17 सितंबर 2026 | गुरुवार | विशेष रिपोर्ट
लुधियाना नगर निगम की जोन ए बिल्डिंग ब्रांच में अधिकारियों के फेरबदल के बाद कुछ पुराने बिल्डिंग मामलों को लेकर फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जिन निर्माणों पर पहले जांच के बाद सीलिंग अथवा काम बंद करवाने जैसी कार्रवाई की गई थी, अब उन मामलों में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, इस पर सबकी नजर है।जानकारी के अनुसार, Zone-D के ATP का तबादला Zone-A में हुआ है, जबकि Zone-C से बिल्डिंग इंस्पेक्टर के भी Zone-A में आने की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल यह है कि नए अधिकारी पुराने लंबित मामलों में कानून के मुताबिक कार्रवाई को आगे बढ़ाएंगे या नहीं।
नूरवाला रोड की चौथी मंजिल फिर चर्चा में
पहला मामला नूरवाला रोड स्थित चौथी मंजिल वाली बिल्डिंग से जुड़ा बताया जा रहा है। इस निर्माण को लेकर पहले कार्रवाई और चौथी मंजिल के निर्माण संबंधी अनुमति/लेटर पर रोक की बात सामने आई थी।अब नए अधिकारियों के आने के बाद इस बिल्डिंग को लेकर आगे क्या विभागीय निर्णय होता है, यह देखने वाली बात होगी।
ब्लॉक-25 की छह मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग पर भी नजर
दूसरा मामला ब्लॉक-25 में बनी छह मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग का है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस निर्माण को लेकर भी पहले सीलिंग की कार्रवाई की गई थी।अब सूत्रों की ओर से दावा किया जा रहा है कि बिल्डिंग की सील खुलवाने अथवा उसे विभागीय स्तर पर राहत दिलाने के प्रयास किए जा सकते हैं।इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। इसलिए जीत समाचार किसी अधिकारी या व्यक्ति पर भ्रष्टाचार अथवा मिलीभगत का आरोप तथ्य के रूप में नहीं लगा रहा।
सबसे बड़ा सवाल—कानून चलेगा या पुरानी फाइलों का असर?
अगर किसी निर्माण को विभागीय जांच में नियमों के विपरीत पाया गया था और इसी आधार पर कार्रवाई की गई थी, तो नए अधिकारियों के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही रहेगा कि आगे की कार्रवाई किस आधार पर और किस रिकॉर्ड के अनुसार की जाती है।
क्या पहले की जांच रिपोर्ट बरकरार रहेगी?
क्या दोबारा निरीक्षण होगा?
क्या निर्माणकर्ता को कोई वैधानिक राहत मिलती है?
और यदि राहत मिलती है तो उसका आधार क्या होगा?
इन सवालों के जवाब विभागीय रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होंगे।
सूत्रों का दावा—‘राजनीतिक प्रभाव’ की भी चर्चा
इस मामले में सूत्रों की ओर से यह दावा भी किया जा रहा है कि संबंधित निर्माण को विभागीय स्तर पर राहत दिलाने के लिए राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल किया जा सकता है।
जीत समाचार इस दावे की पुष्टि नहीं करता। यदि ऐसा कोई प्रभाव या हस्तक्षेप हुआ है तो उसका प्रमाण सामने आना और सक्षम प्राधिकारी द्वारा उसकी जांच किया जाना जरूरी है।
PCS अधिकारी ने कहा—‘कानून सबसे ऊपर है’
जीत समाचार ने मामले को लेकर बिल्डिंग ब्रांच के संबंधित PCS अधिकारी से बात की। उन्होंने कहा:बदली तो होती रहती है, पर कानून सबसे ऊपर है। जो कानून के हिसाब से बिल्डिंग नहीं बनी, उसे सील कर दिया गया है और जो बिल्डिंगें अवैध बनी हुई हैं, उन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसमें जो कर्मचारी दोषी पाया गया, उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”अधिकारी के इस बयान से स्पष्ट है कि विभाग की ओर से कार्रवाई को कानूनी प्रक्रिया और जांच के निष्कर्षों के आधार पर करने की बात कही गई है।
MTP की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
मामले में नगर निगम के MTP विभाग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि किसी निर्माण को सील किए जाने के बाद उसकी स्थिति, स्वीकृति और आगे की कार्रवाई की प्रभावी निगरानी जरूरी है।अब सवाल यह है कि संबंधित मामलों में MTP स्तर पर क्या निरीक्षण और जांच की गई और उसकी रिपोर्ट क्या है?
इसका जवाब संबंधित विभाग से लिया जाना बाकी है।
अब असली परीक्षा Zone-A की!
एक तरफ पुराने मामलों की फाइलें हैं, दूसरी तरफ नए अधिकारी और उनके सामने कानून के मुताबिक कार्रवाई की चुनौती।
1 क्या पहले सील की गई बिल्डिंगों पर कार्रवाई आगे बढ़ेगी?
2 क्या नियमों के विपरीत पाए गए निर्माणों पर सील बरकरार रहेगी?
3 या नए फैसले पुराने विवादों को फिर हवा देंगे?
इन सवालों का जवाब आने वाले दिनों में विभागीय रिकॉर्ड और मौके की स्थिति से सामने आएगा।
जीत समाचार इन दोनों मामलों से जुड़े दस्तावेजों और तस्वीरों की पड़ताल जारी रखेगा।
अब देखना है—फैसला फाइल करेगी या कानून?
बने रहिए जीत समाचार के साथ।
सवाल भी होंगे, दस्तावेज भी होंगे और संबंधित पक्ष का जवाब भी।

