गणतंत्र दिवस का ऐतिहासिक महत्व
Views: 6
दैनिक जीत समाचार की रिपोर्ट
गणतंत्र दिवस, या 26 जनवरी, भारत का एक प्रमुख राष्ट्रीय पर्व है जो 1950 में संविधान लागू होने की याद दिलाता है। यह दिन पूर्ण स्वराज की घोषणा से जुड़ा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि1930 में लाहौर अधिवेशन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 26 जनवरी को पूर्ण स्वराज दिवस घोषित किया था। महात्मा गांधी ने इसे स्वतंत्रता संकल्प दिवस नाम दिया, जो 1931 से हर साल मनाया गया। 1947 में स्वतंत्रता मिलने के बाद भी भारत ब्रिटिश डोमिनियन रहा, लेकिन संविधान सभा ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर की अध्यक्षता में संविधान तैयार किया।
संविधान 26 नवंबर 1949 को अपनाया गया, लेकिन 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ ताकि 1930 की याद बनी रहे। इस दिन भारत गणराज्य बना, डॉ. राजेंद्र प्रसाद पहले राष्ट्रपति बने, और सी. राजगोपालाचारी ने गवर्नर-जनरल पद छोड़ा।
पहली परेड और परंपराएं 1950 में पहली गणतंत्र दिवस परेड इरविन एम्फी थिएटर में हुई, जहां राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद घोड़ा-गाड़ी से आए। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो मुख्य अतिथि थे। दिल्ली में राजपथ पर अब भव्य परेड होती है, जो सेना, संस्कृति और उपलब्धियों को दर्शाती है।
यह परेड नई पहचान बनाने का प्रतीक बनी। हर साल राष्ट्रपति परेड की सलामी लेते हैं।
विशेष संवाददाता, लुधियाना से26 जनवरी 2026: 76वें गणतंत्र दिवस पर भारत का गौरवशाली सफरलुधियाना, 26 जनवरी। आज देश 76वें गणतंत्र दिवस पर संविधान की महत्ता मना रहा है, जो 1950 से लोकतंत्र की नींव है। स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान की यह याद दिलाता है।
संविधान सभा ने 7,600 संशोधनों पर बहस के बाद इसे अपनाया। यह विविधता में एकता का प्रतीक है। पंजाब में भी भव्य परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रम हो रहे।
