SYL विवाद सुलझाने की दिशा में ‘चंडीगढ़ संवाद’ – टकराव छोड़ सहयोग की ओर बढ़े पंजाब और हरियाणा

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चंडीगढ़:( कमल पवार)

दशकों पुराने सतलुज-यमुना लिंक (SYL) विवाद को खत्म करने की दिशा में मंगलवार को एक ऐतिहासिक मोड़ आया। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में “टकराव की जगह संवाद” की नई विचारधारा उभर कर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद हुई इस बैठक ने दोनों राज्यों के बीच जमी बर्फ को पिघलाने का काम किया है।

बैठक का मुख्य एजेंडा और नई रणनीति

इस बैठक की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि दोनों राज्यों ने अब अदालती आदेशों के इंतजार के बजाय ‘निरंतर तकनीकी विमर्श’ का रास्ता चुना है। तय किया गया है कि दोनों राज्यों के जल संसाधन विभागों के वरिष्ठ अधिकारी अब महीने में कम से कम दो बार बैठक करेंगे ताकि पानी की उपलब्धता और वितरण के आंकड़ों पर सहमति बन सके।

मुख्यमंत्रियों के रुख में बदलाव:

हरियाणा का पक्ष: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट किया कि हरियाणा अपने हक का पानी चाहता है, लेकिन वे इसे सौहार्दपूर्ण तरीके से हासिल करने के पक्षधर हैं। उन्होंने कहा, “हम पड़ोसी हैं और बातचीत से हर समस्या का समाधान संभव है।”

पंजाब का तर्क: मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब के गिरते भूजल स्तर का हवाला देते हुए ‘छोटा भाई-बड़ा भाई’ की भावना से बात की। उन्होंने जोर दिया कि नई विचारधारा के तहत ‘जल संरक्षण और स्मार्ट सिंचाई’ को प्राथमिकता देनी होगी, ताकि किसी भी राज्य के किसानों का नुकसान न हो।

विशेषज्ञों की राय और आगे की राह

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अधिकारियों की नियमित बैठकों का फैसला एक ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकता है। इससे पहले केवल राजनीतिक स्तर पर बयानबाजी होती थी, लेकिन अब डेटा-आधारित समाधान खोजने की कोशिश की जाएगी। केंद्र सरकार भी इस नई कार्यप्रणाली पर नजर रख रही है और अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट को इस सकारात्मक प्रगति की जानकारी दी जाएगी।

जानकारी इन मुख्य बिंदुओं पर आधारित है:

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश:

कोर्ट ने लगातार दोनों राज्यों को विवाद को आपसी सहमति और बैठकों के जरिए सुलझाने के निर्देश दिए हैं।

नेताओं के बयान: पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों द्वारा हाल के समय में दिए गए “छोटा भाई – बड़ा भाई” और “सौहार्दपूर्ण बातचीत” वाले बयानों को इसमें शामिल किया गया है।

प्रशासनिक प्रक्रिया: भविष्य की बैठकों और अधिकारियों के बीच तकनीकी विमर्श की बात वर्तमान रणनीतिक बदलावों को दर्शाती है।

विपक्ष के कड़े तेवर: “बैठकों से नहीं, समाधान से बनेगा काम”

जहाँ एक ओर दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री बातचीत को सकारात्मक बता रहे हैं, वहीं विपक्षी दलों ने इस पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पंजाब विपक्ष: पंजाब में विपक्षी दलों ने सरकार को चेतावनी दी है कि ‘भाईचारे’ के नाम पर पंजाब के हितों और पानी के साथ कोई समझौता न किया जाए। उन्होंने मांग की है कि रिपेरियन सिद्धांत (Riparian Principle) के आधार पर ही कोई फैसला लिया जाए।

हरियाणा विपक्ष: हरियाणा के विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि “अधिकारियों की बैठकों का दौर केवल समय व्यर्थ करने का तरीका है।” उन्होंने केंद्र सरकार से तुरंत दखल देकर नहर निर्माण का कार्य शुरू करवाने की मांग की है।

विशेष कवरेज:

किसानों की चेतावनी और विपक्षी घेराबंदी)

ग्राउंड रिपोर्ट:*

शंभू बॉर्डर पर किसानों का जमावड़ा, कहा- “एक बूंद पानी भी नहीं देंगे”

मुख्यमंत्रियों की बैठक के बीच पंजाब और हरियाणा की सीमाओं पर किसान संगठनों ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। शंभू बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि पंजाब का भूजल स्तर पहले ही ‘डेंजर ज़ोन’ में है। किसानों का कहना है कि “जब हमारे अपने खेत प्यासे हैं, तो हम किसी भी कीमत पर नहर का निर्माण नहीं होने देंगे।” वहीं, हरियाणा के किसानों ने मांग की है कि दक्षिण हरियाणा के सूखे खेतों तक पानी पहुँचाना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।

विपक्ष के कड़े तेवर:

बैठकों से नहीं, समाधान से बनेगा काम”

जहाँ सरकारें इसे सकारात्मक पहल बता रही हैं, वहीं विपक्ष ने इसे ‘चुनावी पैंतरा’ करार दिया है।

पंजाब विपक्ष:

सरकार बातचीत के नाम पर पंजाब के अधिकारों को कमजोर कर रही है। हमें केवल पानी नहीं, बल्कि अपने हक की रक्षा चाहिए।”

हरियाणा विपक्ष:

बैठकों की तारीखें तो पिछले 40 साल से मिल रही हैं। हमें नहर चाहिए, चर्चा नहीं।”

विशेषज्ञों का विश्लेषण:

डेटा साझा करना ही एकमात्र रास्ता’

कृषि और जल प्रबंधन विशेषज्ञों ने इस नई ‘संवाद विचारधारा’ का स्वागत किया है। Central Water Commission (CWC) के पूर्व अधिकारियों का मानना है कि जब तक दोनों राज्य वास्तविक जल प्रवाह (Actual Flow) के आंकड़ों पर एकमत नहीं होते, तब तक स्थायी समाधान मुश्किल है। विशेषज्ञों ने Bhakra Beas Management Board (BBMB) के 2025-26 के जल आंकड़ों को आधार बनाने की सलाह दी है।

बैठक का सार और आगे की राह

तकनीकी विमर्श:

दोनों राज्यों के सचिव 15 फरवरी 2026 को जल वितरण के आंकड़ों पर चर्चा करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा:

इस बैठक की रिपोर्ट केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी।

नई विचारधारा:

‘पानी के बंटवारे’ के बजाय अब ‘पानी की बचत’ और ‘स्मार्ट इरिगेशन’ पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

संपादकीय विश्लेषण:

क्या पंजाब और हरियाणा के बीच की यह नई दोस्ती दशकों पुराने इस जल विवाद का स्थायी समाधान निकाल पाएगी? फिलहाल, अधिकारियों की अगली बैठक 15 फरवरी को तय की गई है। यदि अधिकारी स्तर की ये वार्ताएं सफल रहती हैं, तो यह उत्तर भारत की राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए एक नया अध्याय होगा।

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