श्री बाबा बालक नाथ में श्रद्धालुओं को वीडियोग्राफी तथा फोटो करने से रोकने के लिए दादागिरी क्यों बीआईपी की वीडियो भी बनाई जाती तथा गुफा में फोटो भी खींचे जाते दोहरे मापदंड क्यों

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श्री बाबा के दरबार में कोई छोटा बड़ा नहीं तो फिर भेदभाव क्यों

 सतीश शर्मा विट्टू की दियोटसिद्ध से स्पेशल रिपोर्ट।
उत्तरी भारत के प्रमुख सिद्ध पीठ बाबा बालक नाथ मंदिर में ट्रस्ट प्रशासन के दोहरे मापदंड लोगों की समझ से परे हैं। बाबा के दरबार में कोई छोटा बड़ा नहीं हर व्यक्ति श्रद्धालु है तथा श्रद्धालुओं से समान व्यवहार होना चाहिए लेकिन श्रद्धालुओं के साथ जो होता है जग जाहिर है। जीत समाचार की टीम चैत्र मास मेलो के दौरान दिन-रात व्यवस्था पर पहरा बनकर अपना कर्तव्य निभा रही है। 1987 में ट्रस्ट का गठन कर इसका नियंत्रण सरकार ने अपने हाथ में लिया है लेकिन अधिकतर व्यवस्थाएं ऐसी हैं कि व्यवस्था के नाम पर श्रद्धालु परेशान होते हैं। ऐसा नहीं है कि सरकार सहयोग नहीं कर रही अथवा ट्रस्ट इस व्यवस्था को बदलने के प्रयास नहीं करता परंतु जो बदला जा सकता है उसे भी बदल नहीं जा रहा। भाषा एवं संस्कृति विभाग तथा ट्रस्ट के कायदे कानून दोहरे मापदंड श्रद्धालुओं की समझ से परे हैं।श्री बाबा बालक नाथ मंदिर में गुफा पर फोटो खींचना तथा वीडियो बनाना मना है लेकिन इसमें भी दोहरे मापदंड है कई श्रद्धालुओं को वीआईपी ट्रीटमेंट दी जाती है जिसमें गुफा के सामने बैठकर सारी छूट दी जाती है
श्रद्धालुओं का कहना है
श्रद्धालुओं ने इस पर सवाल भी उठाए थे। श्रद्धालुओं का कहना है कि दोहरे मापदंड क्यों। बाबा बालक नाथ मंदिर की तरह ही प्रदेश के कई मंदिरों में व्यवस्था है कि श्रद्धालु फोटो खींच सकते हैं वीडियो बना सकते हैं तथा सोशल मीडिया में रील भी डाल सकते हैं। बाबा बालक नाथ मंदिर में लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं करोड़ों रुपए चढ़ाते हैं लेकिन श्रद्धालुओं के साथ जो दुर्व्यवहार किया जाता है वह समझ से परे हैं। इस पर रोक लगनी चाहिए।
मंदिर में ट्रस्ट ने करोड़ों रुपए की साराए ट्रस्ट को हैंड ओवर ही नहीं किया 
श्री बाबा बालक नाथ मंदिर में ट्रस्ट ने करोड़ों रुपए की साराए बनाई है 74 मास मेलो में श्रद्धालुओं को ठहरने के लिए उसे सारी को श्रद्धालुओं को समर्पित किया जाना चाहिए लेकिन अभी तक उसे ट्रस्ट को हैंड ओवर ही नहीं किया गया है। जिसमें लगभग20 कमरे बने हैं। इसके अलावा हाल भी हैं परंतु श्रद्धालु सोने के लिए परेशान होते हैं क्योंकि साराए को श्रद्धालुओं के लिए समर्पित किया जाना है। इसके अलावा करोड़ों रुपए का प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य जारी है।

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