जब से बाबा बालक नाथ ट्रस्ट बना है रज्जू मार्ग से मंदिर को जोड़ने के लिए बजट में किए जाते प्रावधान क्यों नहीं बन पाया आज तक राजू मार्ग ?

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दियोटसिद्ध। सतीश शर्मा विट्टू।
1987 विधायक मनजीत सिंह डोगरा के प्रयासों से राजा वीरभद्र सिंह ने हिंदू मंदिर बाबा बालक नाथ का अधिग्रहण कर इस मंदिर को ट्रस्ट के अधीन लेकर मंदिर का संचालन शुरू करवाया। पहले इसका संचालन महंत द्वारा किया जाता था लेकिन उसके बाद व्यवस्था बदली तथा सरकारी हस्तक्षेप से मंदिर में विकास शुरू किया गया जब से ट्रस्ट बना है रज्जू मार्ग बनाकर श्रद्धालुओं को गुफा तक पहुंचाने का कार्य विभिन्न बजट में किया जाता है। इसके लिए करोड़ों रुपए का प्रावधान बजट में भी किया जाता है लेकिन पिछले 10 वर्षों से रज्जू मार्ग बनाए जाने के लिए सब्ज बाग दिखाए जाते हैं लेकिन हकीकत में रज्जू मार्ग का निर्माण नहीं करवाया गया। सबसे पहले मुंबई की एक कंपनी को इसके लिए सर्वे करने के लिए ट्रस्ट ने प्रावधान किया था लेकिन हर बार कागजों में ही सर्व होते हैं
श्रद्धालुओं को रज्जू मार्ग की सुविधा आज तक नहीं मिल पाई है। वैष्णो देवी हरिद्वार तथा विभिन्न स्थानों पर रज्जू मार्ग सुविधा उपलब्ध करवाई गई है लेकिन बाबा बालक नाथ में नहीं। प्रेम कुमार धूमल के मुख्यमंत्री बने तो पंजाब की अकाली सरकार के साथ आनंदपुर साहिब से बाबा बालक नाथ को जोड़ने के लिए प्लान बनाया गया लेकिन वह भी कागजों में ही रहा। बड़ा सवाल की बाबा बालक नाथ मंदिर में रज्जू मार्ग कब बनेगा।

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