हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री नयनादेवी मंदिर ने कचरे से ऊर्जा बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और सराहनीय कदम उठाया
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हिमाचल से ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट
इस परियोजना की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
वेस्ट-टू-एनर्जी (कचरे से ऊर्जा): मंदिर के लंगर में बचने वाली जूठन और फूड वेस्ट का उपयोग अब बायोगैस उत्पादन के लिए किया जा रहा है।
उत्पादन क्षमता: वर्तमान में इस प्लांट से प्रतिदिन लगभग 20 किलो गैस तैयार की जा रही है।
सफलतापूर्वक क्रियान्वयन: मंदिर प्रशासन ने इसका सफल परीक्षण कर लिया है और उत्पादित गैस का उपयोग रसोई कार्यों में शुरू कर दिया गया है।
भविष्य की योजना: ट्रस्ट की योजना इस प्लांट की क्षमता बढ़ाने और भविष्य में पूरे नैना देवी टाउन के घरेलू किचन वेस्ट को इसमें शामिल करने की है, ताकि इसे एक आदर्श ‘मॉडल टेंपल टाउन’ बनाया जा सके।
पर्यावरण लाभ: यह पहल न केवल कचरा प्रबंधन (वेस्ट डिस्पोजल) में मदद करेगी, बल्कि आसपास के वातावरण को शुद्ध और स्वच्छ रखने में भी सहायक होगी।
अध्यक्ष एवं एसडीएम धर्मपाल चौधरी ने बताया
मंदिर न्यास श्री नयना देवी के अध्यक्ष एवं एसडीएम धर्मपाल चौधरी ने बताया कि आने वाले समय में इस बायोगैस संयंत्र की क्षमता को और बढ़ाया जाएगा, ताकि प्रतिदिन कई गैस सिलैंडरों के बराबर गैस तैयार की जा सके। लंगर के वेस्ट से बायोगैस तैयार करने वाला नयना देवी हिमाचल का पहला शक्तिपीठ बन गया है।
इस पहल के माध्यम से श्री नयना देवी मंदिर अब प्रदेश के अन्य धार्मिक स्थलों के लिए स्वच्छ ऊर्जा और स्थिरता की एक मिसाल बन गया है।
क्या आप इस बायोगैस प्लांट की तकनीकी कार्यप्रणाली या मंदिर ट्रस्ट की अन्य आगामी योजनाओं के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं?
