कमिश्नर को पता था, फिर भी ‘सहायक क्लर्क’ को दी पब्लिक डीलिंग’: 1st Appeal में कबूलनामा, दस्तखत आरोपी क्लर्क के
Views: 63
सवाल: विजिलेंस केस वाला सहायक क्लर्क फाइलें निपटा रहा, ‘पंजाब पोर्टल’ का जवाब भी खुद दे रहा – सिस्टम सोया या बिका ?
लुधियाना से विक्की की रिपोर्ट
लुधियाना: दैनिक जीत समाचार के खुलासे के बाद 1st Appeal का वह दस्तावेज़ मिला है जो नगर निगम लुधियाना के ‘भ्रष्टाचार बचाओ गैंग’ को बेनकाब करता है।
दस्तावेज़ में साफ लिखा है:
शिकायतकर्ता की शिकायत और पीडीएफ फाइल साथ नत्थी कर रहा हूं और जो अखबार में न्यूज़ लगी है, वो भी साथ में लगा रहा हूं। ऐसे सहायक क्लर्क भ्रष्टाचार को पब्लिक डीलिंग देकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।उपरोक्त विषय संबंधी बताया जाता है कि शिकायत का मानयोग अदालत में कोर्ट केस चल रहा है और मानयोग अदालत वल्लों जो वी केस संबंधी आदेश प्राप्त होंगे, उस संबंधी आप नूं जानकारी दे दित्ती जावेगी।”
यह दस्तावेज़ 3 कड़वे सच उजागर करता है:
1. ‘कानून’ नहीं, ‘सेटिंग’ चल रही है
CVC गाइडलाइन + पंजाब सिविल सर्विस रूल्स कहते हैं: “भ्रष्टाचार का चालान पेश होते ही कर्मचारी को सस्पेंड करो। पब्लिक डीलिंग/फाइनेंशियल पावर वाली सीट से तुरंत हटाओ।”
हकीकत: सहायक क्लर्क लखवीर सिंह ‘लकी’ पर विजिलेंस केस चल रहा है, कोर्ट में मामला खुद कबूल कर रहा है, फिर भी पब्लिक डीलिंग कर रहा है। ‘कोर्ट का फैसला आएगा तो बता देंगे’ – यह जवाब आरोपी खुद दे रहा है।
2. ‘कमिश्नर को पता था’ – फिर एक्शन क्यों नहीं ?
1st Appeal में दर्ज है: “EVEN Though THE LUDHIANA CORPORATION COMMISSIONER WAS AWARE OF IT”।
सवाल सीधा है – जब कमिश्नर को पता था कि ‘लकी’ पर केस है, तो 69 तबादलों में इसका नाम क्यों नहीं? 9 मई के हुक्म के बाद भी ‘लकी’ सेफ कैसे ?
3. ‘पंजाब पोर्टल’ का मजाक किसने बनाया ?
CM भगवंत मान ने कहा था: “पोर्टल पर शिकायत करो, 30 दिन में इंसाफ।” लेकिन यहां ‘सहायक क्लर्क’ यानी आरोपी सहायक क्लर्क का दफ्तर ही जवाब दे रहा है कि ‘कोर्ट में केस है’।
सवाल: क्या शिकायत की जांच आरोपी खुद करेगा ? क्या ‘जीरो टॉलरेंस’ सिर्फ बैनर-पोस्टर तक है
सबसे बड़ा सवाल: ‘लकी’ के पीछे कौन ?
निगम सूत्र नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं:
” सहायक क्लर्क लखवीर सिंह ‘लकी’ को तहबाज़ारी/प्रॉपर्टी टैक्स जैसी ‘मलाईदार सीट’ पर राजनीतिक पावर और उच्च अधिकारियों की ‘सेटिंग’ से बिठाया गया है। 2024 से विजिलेंस केस है, पर सस्पेंड नहीं किया गया। क्योंकि अगर ‘लकी’ बोला तो बड़े साहबों के नाम भी खुल जाएंगे।” ‘रोटेशन पॉलिसी’ कहती है 3 साल में सीट बदलो। ‘लकी’ 9 साल से एक ही कुर्सी पर। ‘कुर्सी कल्चर’ का यही सबसे बड़ा सबूत है।
“Jeet Samachar Daily Hindi Newspaper Ludhiana – RNI PUNHIN/2013/60106. Read today’s e-paper online at zeetsamachar.com”
