देर रात की बारिश ने खोली नगर निगम लुधियाना के दावों की पोल | ढोका मोहल्ला फिर जलमग्न, बांध तोड़कर निकाला पानी
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मानसून की पहली तेज बारिश में फेल हुई जल निकासी व्यवस्था | टावर लाइन में जाम मिलीं रोड जालियां, लोगों में भारी रोष
लुधियाना | 11 जुलाई 2026/ जीत समाचार ब्यूरो
मानसून की पहली तेज बारिश ने नगर निगम लुधियाना के उन दावों की पोल खोलकर रख दी, जिनमें शहर की जल निकासी व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त करने की बात कही जा रही थी। शनिवार देर रात हुई बारिश के बाद शहर के कई इलाके जलमग्न हो गए, लेकिन सबसे गंभीर स्थिति ढोका मोहल्ला में देखने को मिली, जहां एक बार फिर गलियां पानी से भर गईं।
ढोका मोहल्ला में बांध बना परेशानी का कारण
ढोका मोहल्ला और बुद्धा दरिया के बीच बनाए गए मिट्टी के बांध के कारण बारिश का पानी बाहर नहीं निकल सका, जिससे पूरे इलाके में जलभराव की स्थिति बन गई। हालात बिगड़ते देख देर रात बांध को दोबारा तोड़ा गया, जिसके बाद धीरे-धीरे पानी की निकासी शुरू हुई और लोगों ने राहत की सांस ली।
स्थानीय पार्षद अरुण शर्मा ने बताया कि कुछ दिन पहले भी इसी समस्या के चलते बांध तोड़ा गया था, लेकिन बाद में सीचेवाल मिशन से जुड़े लोगों द्वारा पुनः बांध बना दिया गया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सोमवार तक फिर से बांध लगाया गया, तो क्षेत्र के लोग स्वयं दरिया किनारे पहुंचकर उसे तोड़ेंगे और वहीं धरना देंगे।
रात 3 बजे मौके पर पहुंचे विधायक अशोक पराशर पप्पी
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय विधानसभा क्षेत्र के विधायक अशोक पराशर पप्पी भी रात करीब तीन बजे बुद्धा दरिया पहुंचे। उन्होंने मौके पर दरिया के बहाव में रुकावट बन रहे कचरे को तत्काल हटाने के निर्देश दिए, ताकि पानी का प्रवाह सामान्य हो सके और आसपास के इलाकों में जलभराव की समस्या कम हो सके।
टावर लाइन में जाम मिलीं रोड जालियां
उधर, हल्का उत्तरी के टावर लाइन क्षेत्र में भी नगर निगम के दावों की वास्तविकता सामने आ गई। निगम प्रशासन द्वारा मानसून से पहले सभी रोड जालियों की सफाई के दावे किए जा रहे थे, लेकिन मौके पर कई जालियां कचरे और गाद से पूरी तरह जाम मिलीं।
पानी की निकासी नहीं होने के कारण सड़कें लंबे समय तक जलमग्न रहीं। क्षेत्र के समाजसेवी मोहित ने इस स्थिति का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया, जो तेजी से वायरल हो रहा है।
हेल्पलाइन नंबर पर भी नहीं मिला जवाब
समाजसेवी मोहित ने आरोप लगाया कि जलभराव की स्थिति पैदा होने के बाद उन्होंने नगर निगम द्वारा हाल ही में जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर पर कई बार संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया।
उनका कहना है कि व्हाट्सएप कॉल और सामान्य फोन कॉल, दोनों माध्यमों से कई बार संपर्क किया गया, लेकिन लगातार रिंग जाने के बावजूद किसी अधिकारी या कर्मचारी ने फोन रिसीव नहीं किया।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “यदि आपात स्थिति में भी नगर निगम की हेल्पलाइन पर कोई जवाब नहीं मिलेगा, तो ऐसे नंबर जारी करने का क्या औचित्य है?”
समाजसेवी ने दावा किया कि कॉल रिकॉर्ड, स्क्रीनशॉट और कॉलिंग का पूरा प्रमाण उनके पास सुरक्षित है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर सार्वजनिक किया जा सकता है। इससे नगर निगम की शिकायत निवारण प्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
