कौन सच बोल रहा—इंस्पेक्टर जोन-सी ,या कैमरा? | जोन-सी ब्लॉक-37 में ‘खाली प्लॉट’ की रिपोर्ट, तस्वीरों में निर्माण की हलचल
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ब्लॉक-37 की कथित नाजायज कॉलोनी | रिपोर्ट में ‘खाली प्लॉट’, मौके की तस्वीरों में निर्माण गतिविधि | क्या ‘NOC’ दिखाकर उच्च अधिकारियों को गुमराह किया गया?
लुधियाना (जीत समाचार ब्यूरो)
नगर निगम लुधियाना की जोन-सी बिल्डिंग ब्रांच, ब्लॉक-37 में कथित नाजायज कॉलोनी को लेकर ‘जीत समाचार’ लगातार खबरें प्रकाशित कर प्रशासन को जगाने की कोशिश कर रहा है। अब सूत्रों के हवाले से एक और बड़ा दावा सामने आया है। आरोप है कि जोन-सी के बिल्डिंग इंस्पेक्टर ने अपने उच्च अधिकारियों को ऐसी रिपोर्ट भेजी, जिसमें मौके पर कोई काम न चलने की बात कही गई। लेकिन ‘जीत समाचार’ के पास मौजूद मौके की फोटो कि तस्वीरों में मिस्त्री काम करते दिखाई दे रही है।
इंस्पेक्टर जोन-सी की रिपोर्ट बनाम जमीनी तस्वीरें
सूत्रों के अनुसार इंस्पेक्टर की रिपोर्ट में कहा गया कि “वहां कोई काम नहीं चल रहा।” आरोप यह भी है कि रजिस्ट्री से संबंधित एक ‘नकल’ दिखाकर उच्च अधिकारियों को मौके की वास्तविक स्थिति से अलग जानकारी दी गई। अब सवाल उठ रहा है कि अगर मौके पर निर्माण या अन्य गतिविधि चल रही थी, तो रिपोर्ट में काम न होने की बात किस आधार पर लिखी गई?
इंस्पेक्टर जोन-सी से पूछे सवाल, जवाब में दफ्तर का हवाला
जब ‘जीत समाचार’ ने जोन-सी के बिल्डिंग इंस्पेक्टर से मौके पर काम चलने के संबंध में सवाल किया तो उनका जवाब था मैंने अपनी रिपोर्ट बनाकर भेज दी है। जब उनसे पूछा गया कि रिपोर्ट में क्या लिखा है, क्या नक्शा पास है और क्या नगर निगम से आवश्यक मंजूरी ली गई है, तो उन्होंने कहा—ये तो हम अपने दफ्तर में ही बता सकते हैं, आपको नहीं बता सकते। अब सवाल यह है कि जब तस्वीरें कुछ और कहानी बयान कर रही हैं, तो पूरी जानकारी सार्वजनिक करने में झिझक क्यों?
एटीपी जोन सी ने कहा—“मैं देखता हूं”
मामले में एटीपी जोन सी से संपर्क करने पर उन्होंने कहा—“मैं देखता हूं काम चलता है या नहीं।”‘जीत समाचार’ के अनुसार जब उन्हें मौके की तस्वीरें दिखाई गईं तो उनमें मिस्त्री ईंट लगाते दिखाई दे रही थी।अब निगाहें एटीपी सी की आगे की कार्रवाई पर हैं—क्या वह मामले की निष्पक्ष जांच कराएंगे या रिपोर्ट को ही अंतिम सच मान लिया जाएगा?
सबसे बड़ा सवाल: रिपोर्ट पर भरोसा करें या तस्वीरों पर?
1 अगर मौके पर काम नहीं हो रहा था तो मिस्त्री ईंटें क्यों लगा रहे थे?
2 क्या उच्च अधिकारियों को भेजी गई रिपोर्ट में मौके की पूरी स्थिति बताई गई?
3 नक्शा मंजूर है या नहीं और आवश्यक फीस अथवा चालान की क्या स्थिति है?
4 क्या संबंधित विभाग अब मौके की दोबारा जांच करेगा?
‘पर्दा है पर्दा…’ या अब उठेगा पर्दा ?
‘जीत समाचार’ का सवाल है कि क्या उच्च अधिकारी अब भी केवल रिपोर्ट पर भरोसा करेंगे, या मौके की फोटो और वीडियो की जांच कर सच्चाई सामने लाएंगे?
अब देखना यह है कि ब्लॉक-37 में कथित तौर पर चल रही गतिविधियों पर कार्रवाई होती है या मामला फिर कागजों और रिपोर्टों में ही उलझकर रह जाता है।
