एक्सक्लूसिव: बणी में मुख्यमंत्री सुक्खू को बदनाम करने की साजिश का आरोप, कांग्रेस की जंबो कार्यकारिणी पर उठे सवाल
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हिमुडा निदेशक राजेश बन्याल बोले—१५ अगस्त को प्रोटोकॉल के कारण नहीं रुके मुख्यमंत्री | भाजपा के साथ कांग्रेस के कुछ लोगों पर भी दुष्प्रचार में शामिल होने का आरोप
बड़सर, २५ अगस्त (सतीश शर्मा)
बणी में १५ अगस्त को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के काफिले से जुड़ी घटना को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। हिमुडा निदेशक इंजीनियर राजेश बन्याल ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री की छवि खराब करने के लिए घटना को राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया गया।राजेश बन्याल के अनुसार, १५ अगस्त को मुख्यमंत्री राजकीय स्तरीय कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे और निर्धारित समय पर कार्यक्रम स्थल पहुंचना जरूरी था। उनके मुताबिक, प्रोटोकॉल के तहत बिना अनुमति सड़क पर लोगों का इस तरह खड़ा होना उचित नहीं था।
लोगों को गुमराह कर सड़क पर लाया गया
राजेश बन्याल ने दावा किया कि बणी में सड़क किनारे खड़े कुछ लोगों को कथित तौर पर गुमराह करके सड़क पर लाया गया। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री का वहां न रुकना लोगों से मिलने से इनकार करना नहीं था, बल्कि कार्यक्रम के प्रोटोकॉल और समय की बाध्यता के कारण था।उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद घटना को इस तरह प्रचारित किया गया मानो मुख्यमंत्री स्थानीय लोगों से मिलना ही नहीं चाहते थे।
कांग्रेस के कुछ लोगों पर भी लगाए आरोप
राजेश बन्याल ने यह भी आरोप लगाया कि मौके पर भाजपा से जुड़े लोग तो मौजूद थे ही, लेकिन कांग्रेस के कुछ लोग भी कथित तौर पर उनके साथ मिले हुए थे।हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, उनका पक्ष सामने आना बाकी है।
२०० सदस्यों की जंबो कार्यकारिणी पर सवाल
राजेश बन्याल ने कांग्रेस की ब्लॉक कार्यकारिणी को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि करीब २०० सदस्यों वाली जंबो कार्यकारिणी बनाई गई है और मुख्यमंत्री की ओर से क्षेत्र में कई लोगों को जिम्मेदारियां भी दी गई हैं, लेकिन मुख्यमंत्री के खिलाफ कथित दुष्प्रचार पर कार्यकारिणी के अधिकांश सदस्य सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मुख्यमंत्री की छवि को लेकर गलत प्रचार हो रहा है तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखें।
“मुख्यमंत्री के अपने ही क्यों खामोश?”
राजेश बन्याल ने कहा कि बणी की घटना को केवल राजनीतिक विरोध के रूप में देखने के बजाय पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता सामने रखी जानी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस आलाकमान से भी मांग की कि यदि पार्टी कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो पूरे मामले की जांच की जाए।
अब बड़ा सवाल यही है कि १५ अगस्त की बणी घटना में वास्तव में क्या हुआ था और क्या इसे राजनीतिक रूप से गलत तरीके से पेश किया गया? आरोपों पर संबंधित पक्षों और कांग्रेस नेतृत्व की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
