पंजाब से राजस्थान, गुजरात और बिहार तक शराब का ‘एक्सपोर्ट’! परमिट व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

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लाइसेंसधारी ठेकेदारों की शराब की खेपें दूसरे राज्यों तक पहुंचने के दावे | एक्साइज विभाग से सवाल—परमिट के बाद अंतिम डिलीवरी की निगरानी कौन करता है?

 लुधियाना, 26 अगस्त ( (विक्रम सैनी)

पंजाब में शराब की बिक्री और दूसरे राज्यों तक इसकी आवाजाही को लेकर एक्साइज विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि पंजाब के कुछ लाइसेंसधारी ठेकेदार अतिरिक्त परमिट लेकर शराब की खेपें राजस्थान, गुजरात और बिहार सहित दूसरे राज्यों तक भेज रहे हैं।हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि दूसरे राज्यों को शराब भेजना अपने आप में अवैध नहीं है, यदि इसके लिए सभी जरूरी परमिट और कानूनी मंजूरियां मौजूद हों। सवाल यह है कि परमिट जारी होने के बाद विभाग पूरी खेप की अंतिम डिलीवरी तक निगरानी कैसे करता है।

परमिट से मंजिल तक निगरानी कितनी मजबूत?

बड़ी शराब की खेप पंजाब से बाहर जाने के बाद क्या वह वास्तव में निर्धारित गंतव्य तक पहुंचती है? क्या वाहन नंबर, निर्धारित मार्ग, उठान और अंतिम डिलीवरी का डिजिटल रिकॉर्ड आपस में मिलाया जाता है? यही वे सवाल हैं जिनका स्पष्ट जवाब एक्साइज विभाग से अपेक्षित है।

बिक्री के आंकड़ों पर भी नजर

वर्ष २०२५-२६ में पंजाब में करीब ९४.७८ लाख शराब की पेटियों की बिक्री होने का दावा किया गया है। चालू वित्तीय वर्ष में अब तक करीब २१ लाख पेटियों की बिक्री का अनुमान बताया जा रहा है। ऐसे में यदि आने वाले महीनों में बिक्री के आंकड़ों में अचानक बड़ा उछाल आता है तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि अतिरिक्त शराब पंजाब में खप रही है या दूसरे राज्यों को भेजी जा रही है।

अंबाला में ९९० पेटी शराब बरामद होने के बाद सवाल

हाल ही में अंबाला में पुलिस की कार्रवाई के दौरान पंजाब के रास्ते आ रहे एक ट्रक से ९९० पेटी अवैध अंग्रेजी शराब बरामद होने की बात सामने आई। इस घटना ने पंजाब से दूसरे राज्यों की ओर शराब की आवाजाही और परमिट व्यवस्था की निगरानी को लेकर बहस तेज कर दी है।

अब सवाल यह है कि यदि किसी खेप के पास वैध परमिट है तो विभाग उसके निर्धारित गंतव्य तक पहुंचने की पुष्टि किस तरीके से करता है?

सिर्फ परमिट नहीं, पूरी सप्लाई चेन की निगरानी जरूरी

शराब कारोबार में परमिट जारी करना निगरानी प्रक्रिया का सिर्फ एक हिस्सा है। उठान से लेकर वाहन, रूट, गंतव्य और अंतिम डिलीवरी तक पूरी श्रृंखला का रिकॉर्ड होना जरूरी है। सबसे बड़ा सवाल एक्साइज विभाग से: पंजाब से बाहर जाने वाली शराब की खेपों का एंड-टू-एंड ऑडिट कितनी नियमितता से किया जाता है? यदि जांच में किसी परमिट की आड़ में नियमों के उल्लंघन या अवैध सप्लाई की पुष्टि होती है तो संबंधित लाइसेंसधारियों के साथ-साथ निगरानी में लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।

फिलहाल आरोप और सवाल जांच का विषय हैं। अब निगाहें एक्साइज विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया और किसी संभावित जांच पर टिकी हैं।

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