लुधियाना में ‘रीसायकिल मिठाई’ का कथित खेल! रोज 400 से 800 किलो खपने का दावा, प्रशासन मौन क्यों?
Views: 10
बासी चाशनी और खराब मिठाइयों को नया रूप देने के आरोप | अगर दावा सही है तो हजारों लोगों की सेहत से खिलवाड़ का खतरा | सैंपलिंग से लेकर सप्लाई नेटवर्क तक जांच की मांग
लुधियाना, 29 अगस्त (विक्रम सैनी)
त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले शहर में मिठाइयों की गुणवत्ता को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि कुछ स्थानों पर बासी चाशनी और खराब अथवा पुरानी मिठाइयों को दोबारा तैयार कर रोजाना 400 से 800 किलो तक बाजार में खपाया जा रहा है। यदि यह दावा जांच में सही पाया जाता है तो मामला केवल मिलावट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लोगों की सेहत से जुड़े गंभीर सवाल खड़े होंगे।सबसे बड़ा सवाल है कि इतनी बड़ी मात्रा में कथित तौर पर खराब मिठाई दोबारा बाजार में पहुंच रही है तो खाद्य सुरक्षा विभाग और जिला प्रशासन की निगरानी व्यवस्था कहां है?
बासी मिठाई को ‘नया माल’ बनाने का आरोप
सूत्रों के अनुसार, कुछ कारोबारियों पर आरोप है कि लंबे समय से बची अथवा खराब मिठाइयों को इकट्ठा कर पीसकर दोबारा मिश्रण तैयार किया जाता है। इसमें कथित तौर पर पुरानी चाशनी मिलाकर उसे दोबारा पकाया जाता है और फिर पेड़ा, बर्फी या लड्डू जैसे उत्पादों के रूप में बेचने की कोशिश की जाती है।कुछ मामलों में खराब उत्पाद की गंध और रंग छिपाने के लिए सिंथेटिक रंग या एसेंस के इस्तेमाल के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच और प्रयोगशाला रिपोर्ट के बाद ही हो सकती है।
सवाल मिठाई का नहीं, हजारों लोगों की सेहत का
अगर बासी या दूषित खाद्य पदार्थ बाजार में बेचे जा रहे हैं तो लोगों के स्वास्थ्य पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि खाद्य सुरक्षा विभाग ने अब तक कितने प्रतिष्ठानों की जांच की और कितने नमूने लिए?
त्योहारों के दौरान मिठाइयों की मांग बढ़ने के कारण विभाग के लिए नियमित सैंपलिंग और निगरानी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
‘400 से 800 किलो रोज’ के दावे की जांच कौन करेगा?
सबसे बड़ा दावा यही है कि कथित तौर पर रोजाना 400 से 800 किलो तक रीसायकिल मिठाई बाजार में पहुंचाई जा रही है। यदि यह आंकड़ा गलत है तो प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि सही है तो यह पता लगाना जरूरी है कि इतनी बड़ी मात्रा में खराब मिठाई कहां से आती है, कहां तैयार होती है और किन दुकानों तक पहुंचती है।
राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी सामने
मामले में कुछ लोगों द्वारा राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे आरोपों की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और किसी निर्दोष कारोबारी या अधिकारी पर बेबुनियाद आरोप न लगे।
प्रतिष्ठित हलवाई ने भी जताई चिंता
शहर के लायलपुर स्वीट से परवीन खरबंदा ने कहा कि प्रतिष्ठित और ब्रांडेड कारोबारी अपनी साख को लेकर ऐसे काम करने से बचते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के गलत काम की वजह से पूरे मिठाई कारोबार की छवि प्रभावित होती है।उन्होंने प्रशासन से नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
प्रशासन से जीत समाचार के सीधे सवाल
1 400 से 800 किलो रोजाना रीसायकिल मिठाई के दावे की जांच कब होगी?
2 अब तक कितने सैंपल लिए गए और कितने फेल हुए?
3 कितने कारोबारियों पर कार्रवाई हुई?
4 क्या खराब मिठाइयों और बासी चाशनी के स्रोत की जांच होगी?
5 क्या पूरे सप्लाई नेटवर्क को ट्रेस किया जाएगा?
जनता की सेहत से बड़ा कोई मुनाफा नहीं हो सकता। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो केवल दुकान पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि खराब माल की सप्लाई से लेकर उसे बाजार में बेचने तक की पूरी कड़ी की जांच जरूरी होगी।
अब देखना यह है कि प्रशासन इन गंभीर दावों का संज्ञान लेकर जांच करता है या त्योहारों की भीड़ में यह मामला भी कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाता है।
