ढाई मंजिल की बिल्डिंग, ‘कंपाउंडिंग फीस जमा’ और एमटीपी की हरी झंडी? पार्किंग आखिर है कहां!
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नक्शा क्या कहता है और मौके पर क्या बना? | पार्किंग कहां गई? | अब एमटीपी से लेकर बिल्डिंग ब्रांच तक उठेंगे सवाल |पीसीएस जांच के बाद खुलेगा असली राज
लुधियाना, 29 अगस्त (जीत समाचार ब्यूरो)
नगर निगम लुधियाना की बिल्डिंग ब्रांच एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जोन-सी में एक कमर्शियल बिल्डिंग को लेकर शिकायतकर्ता ने गंभीर सवाल उठाए हैं। मौके पर ढाई मंजिल तक निर्माण होने का दावा किया जा रहा है, जबकि शिकायत के जवाब में संबंधित कर्मचारी की ओर से कहा गया कि “कंपाउंडिंग फीस जमा है।अब सवाल सिर्फ कंपाउंडिंग फीस का नहीं है। सवाल यह है कि क्या बिल्डिंग वास्तव में स्वीकृत नक्शे और लागू बिल्डिंग नियमों के मुताबिक है? पार्किंग की व्यवस्था कहां है? और कंपाउंडिंग की प्रक्रिया से पहले मौके पर किस अधिकारी ने क्या जांच की?
कंपाउंडिंग फीस जमा तो जांच किसने की?
शिकायतकर्ता का सवाल है कि यदि कंपाउंडिंग की प्रक्रिया पूरी की गई है तो उससे संबंधित रिकॉर्ड भी सामने आना चाहिए। आखिर किस स्तर पर बिल्डिंग की जांच हुई, मौके की स्थिति क्या दर्ज की गई और निर्माण का स्वीकृत नक्शे से मिलान किसने किया?
सिर्फ “कंपाउंडिंग फीस जमा है” लिख देने से सारे सवाल खत्म नहीं होते।
एमटीपी की ‘हरी झंडी’ पर सवाल
शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि क्या एमटीपी स्तर पर इस बिल्डिंग की वास्तविक स्थिति की जांच की गई थी? अगर जांच हुई तो पार्किंग, मंजिलों और स्वीकृत नक्शे को लेकर रिपोर्ट में क्या दर्ज है? हालांकि, बिना विभागीय रिकॉर्ड देखे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि एमटीपी ने बिना जांच बिल्डिंग को मंजूरी दी। यही कारण है कि अब पूरे रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
पीसीएस अधिकारी बोले—जांच करवाता हूं
जीत समाचार द्वारा मामला उठाए जाने पर बिल्डिंग ब्रांच के PCS अधिकारी ने कहा: मैं इसकी जांच करवाता हूं। जो कानूनी कार्रवाई बनती है, वह बिल्डिंग पर की जाएगी। अगर कोई कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए सरकार को लिखा जाएगा। अब इस बयान के बाद नजर विभाग की अगली कार्रवाई पर है।
जीत समाचार के सीधे सवाल
1 पार्किंग कहां है? नक्शे में कितनी मंजिल मंजूर हैं और मौके पर कितनी बनी हैं?
2 कंपाउंडिंग किस आधार पर हुई? मौके की जांच किस अधिकारी ने की?
अगर सब कुछ नियमों के मुताबिक है तो नगर निगम रिकॉर्ड सामने रखकर स्थिति स्पष्ट कर सकता है। और अगर जांच में उल्लंघन मिलता है तो सवाल होगा कि निर्माण यहां तक पहुंचा कैसे और जिम्मेदार कौन है?
अब देखना होगा—पीसीएस अधिकारी की जांच के बाद फाइल खुलेगी, जिम्मेदारी तय होगी या फिर “कंपाउंडिंग फीस जमा है” कहकर मामला ठंडा पड़ जाएगा।
जीत समाचार इस मामले की अगली परत भी जनता के सामने लाएगा।
