समराला चौक पर रफ्तार का कहर: मां की अंगुली पकड़े चल रही 4 साल की रोशनी को कार ने कुचला, मौके पर मौत
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ट्रैफिक व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, आखिर कब जागेगा प्रशासन?
लुधियाना (विक्रम सैनी)
समराला चौक इलाके में तेज रफ्तार वाहनों का कहर एक परिवार की जिंदगी में ऐसा अंधेरा छोड़ गया, जिसे शायद कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। 26 अगस्त को अपने माता-पिता के साथ पैदल घर लौट रही महज 4 साल की मासूम रोशनी को पीछे से आई तेज रफ्तार स्कोडा कार ने कुचल दिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि बच्ची ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
सबसे दर्दनाक बात यह है कि हादसे के वक्त बच्ची अपनी मां की अंगुली पकड़कर माता-पिता के साथ पैदल चल रही थी। परिवार शिंगार रोड से सब्जी लेकर हरचरन नगर स्थित अपने घर लौट रहा था। जब वे समराला चौक के पास रॉयल आइसक्रीम के नजदीक पहुंचे, तभी पीछे से आई ग्रे रंग की स्कोडा कार ने बच्ची को अपनी चपेट में ले लिया।
एक झटके में उजड़ गया परिवार
रोशनी अपने माता-पिता की बड़ी बेटी थी। उसकी करीब डेढ़ साल की छोटी बहन भी है। बच्ची की मां गृहिणी हैं, जबकि पिता रोहित फैक्ट्री में सिलाई का काम कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। हादसे के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
ट्रैफिक प्रशासन से बड़ा सवाल—सड़कों पर बेलगाम रफ्तार पर लगाम कब?
इस हादसे ने एक बार फिर लुधियाना की ट्रैफिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के व्यस्त चौकों और मुख्य सड़कों पर तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण, स्पीड मॉनिटरिंग और पैदल चलने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए प्रभावी इंतजाम कितने कारगर हैं, यह सवाल अब प्रशासन के सामने खड़ा है।
जब एक मासूम बच्ची अपने माता-पिता का हाथ पकड़कर सड़क किनारे चल रही हो और फिर भी तेज रफ्तार वाहन उसकी जान ले ले, तो जिम्मेदारी सिर्फ हादसा करने वाले चालक तक सीमित नहीं रह सकती। ऐसे संवेदनशील स्थानों पर स्पीड कंट्रोल, प्रभावी निगरानी, ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी और पैदल यात्रियों की सुरक्षा के इंतजामों की समीक्षा जरूरी है।
शहरवासियों का सवाल है कि आखिर कितनी और जानें जाने के बाद ट्रैफिक प्रशासन व्यस्त चौकों पर तेज रफ्तार वाहनों के खिलाफ सख्त व्यवस्था लागू करेगा?
पुलिस ने आरोपी चालक के खिलाफ आफ आई आर दर्ज की
थाना डिवीजन नंबर-3 की पुलिस ने 27 अगस्त को बच्ची के पिता रोहित के बयानों के आधार पर मयंक अरोड़ा निवासी हरचरन नगर, लुधियाना के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस ने हादसे में इस्तेमाल स्कोडा कार भी बरामद कर ली है। मामले में पुलिस द्वारा आगे की कार्रवाई की जा रही है।
रोशनी तो चली गई, लेकिन उसका परिवार और यह हादसा ट्रैफिक व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल छोड़ गया है—क्या सड़क पर इंसानी जिंदगी से ज्यादा तेज रफ्तार की कोई कीमत है?।
