ड्राइविंग सीट पर चालक बैठा था, फिर भी टो कर ले गई गाड़ी! वायरल वीडियो ने ट्रैफिक व्यवस्था पर खड़े किए सवाल
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लुधियाना (विक्रम सैनी)
लुधियाना शहर में गलत पार्किंग के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर वाहनों को टो करने की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। वायरल हो रहे एक वीडियो ने ट्रैफिक पुलिस और निजी टोइंग कंपनी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में कथित तौर पर दिखाई दे रहा है कि गाड़ी की ड्राइविंग सीट पर चालक बैठा हुआ है, इसके बावजूद टोइंग कर्मचारी वाहन को टो करके वहां से ले जा रहे हैं।
चालक अंदर बैठा था या बाद में आया? यही बना विवाद का केंद्र
वायरल वीडियो सामने आने के बाद शहर में इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई है कि अगर चालक वास्तव में वाहन के अंदर मौजूद था, तो उसकी मौजूदगी में गाड़ी को टो करने की जरूरत और प्रक्रिया क्या थी? वहीं दूसरी तरफ ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि चालक टोइंग शुरू होने के बाद गाड़ी में आकर बैठा था और वाहन को टो करने की प्रक्रिया नियमों के मुताबिक की गई।यानी वीडियो ने एक सीधा सवाल खड़ा कर दिया है—अगर चालक गाड़ी में बैठा था, तो उसे पहले वाहन से उतरने के लिए क्यों नहीं कहा गया? और अगर वह बाद में बैठा, तो इसकी पुष्टि किस आधार पर की गई?
पहले भी टोइंग कंपनी पर उठते रहे हैं सवाल
लुधियाना में गलत पार्किंग वाले वाहनों को टो करने का काम निजी कंपनी को सौंपा गया है। इस कंपनी के खिलाफ पहले भी वाहन मालिकों की ओर से शिकायतें और विवाद सामने आते रहे हैं। आरोप लगे हैं कि टोइंग के दौरान कुछ वाहनों को नुकसान पहुंचा। हालांकि बाद में संबंधित मामलों में दोनों पक्षों के बीच समझौता होने की बात सामने आती रही है।
लेकिन सवाल यह है कि अगर बार-बार विवाद खड़े हो रहे हैं तो प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस इस पूरी व्यवस्था की समीक्षा क्यों नहीं कर रही?
कार्रवाई जरूरी, लेकिन तरीका भी नियमों के मुताबिक होना चाहिए
गलत पार्किंग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और शहर की सड़कों पर ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। लेकिन कार्रवाई के नाम पर नियमों और निर्धारित प्रक्रिया की अनदेखी नहीं की जा सकती।वायरल वीडियो ने अब ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या टोइंग से पहले वाहन चालक को पर्याप्त मौका दिया जाता है? क्या हर टो किए गए वाहन की वीडियो रिकॉर्डिंग होती है? अगर वाहन को नुकसान पहुंचता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती है? और सबसे अहम—टोइंग कंपनी के कर्मचारियों की निगरानी आखिर कौन करता है?
प्रशासन करे वीडियो की निष्पक्ष जांच
शहरवासियों का कहना है कि ट्रैफिक नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। गलत पार्किंग पर चालान और टोइंग की कार्रवाई हो, लेकिन कार्रवाई पारदर्शी और नियमों के तहत होनी चाहिए।अब जरूरत है कि ट्रैफिक पुलिस और संबंधित प्रशासन वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच करवाए और यह स्पष्ट करे कि वीडियो में दिखाई दे रही घटना में नियमों का पालन हुआ या नहीं। साथ ही, यदि टोइंग कंपनी की ओर से किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए।
सवाल सिर्फ एक गाड़ी के टो होने का नहीं है, सवाल उस व्यवस्था का है जिसमें कार्रवाई करने वाले की जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है जितनी वाहन मालिक की।
