जोन-सी में डेढ़ मंजिल की मंजूरी, बना दी ढाई मंजिल इमारत! | शिकायत पर आया ‘कंपाउंडिंग फीस जमा है’ का जवाब
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1100 पोर्टल पर शिकायत के बाद भी सवाल कायम | नक्शे से ज्यादा निर्माण की जांच कौन करेगा? | शिकायतकर्ता बोला—क्या ऐसे मिलेगा इंसाफ?
लुधियाना, 28 अगस्त (जीत समाचार ब्यूरो)
नगर निगम जोन-सी के ब्लॉक-16 में एक कमर्शियल बिल्डिंग को लेकर की गई शिकायत ने बिल्डिंग ब्रांच की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि डेढ़ मंजिल के मुताबिक निर्माण की अनुमति होने के बावजूद मौके पर ढाई मंजिल तक निर्माण कर दिया गया।
शिकायतकर्ता ने इस संबंध में 1100 पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाई और आरोप लगाया कि बिल्डिंग स्वीकृत नक्शे के मुताबिक नहीं बनाई जा रही। लेकिन शिकायत के बाद सामने आए जवाब ने शिकायतकर्ता को और सवाल उठाने का मौका दे दिया।
कंपाउंडिंग फीस जमा… तो क्या नक्शा भी बदल गया?
यही सबसे बड़ा सवाल है!अगर बिल्डिंग नक्शे के मुताबिक नहीं बनी, तो सिर्फ कंपाउंडिंग फीस जमा होने से पूरा निर्माण कैसे सही माना जा सकता है?
1 क्या मौके पर वास्तविक निर्माण और स्वीकृत नक्शे का मिलान हुआ?
2 क्या अतिरिक्त मंजिलों की अनुमति ली गई थी?
3 और अगर अनुमति नहीं थी तो कार्रवाई क्यों नहीं?
बिल्ली को दूध की रखवाली’ वाला सवाल क्यों ?
शिकायतकर्ता का कहना है कि जिस एरिया में बिल्डिंग बनी, उसी क्षेत्र के संबंधित इंस्पेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर शिकायत का जवाब दिया गया।शिकायतकर्ता ने इसी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा—
“जब निगरानी भी उसी की और रिपोर्ट भी उसी की, तो निष्पक्ष जांच कैसे होगी?”हालांकि, संबंधित अधिकारी की मिलीभगत या किसी गलत कार्य में भूमिका बिना जांच के साबित नहीं मानी जा सकती।
शिकायतकर्ता ने उठाया जांच की निष्पक्षता पर सवाल
शिकायतकर्ता का कहना है कि जिस एरिया में बिल्डिंग का निर्माण हुआ, उसी क्षेत्र से जुड़े अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर शिकायत का जवाब दिया गया। इसी वजह से शिकायतकर्ता ने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि “जिसके क्षेत्र में निर्माण हुआ, उसी से रिपोर्ट लेने पर निष्पक्ष जांच कैसे होगी?”
अब कमिश्नर साहब की अग्निपरीक्षा!
जीत समाचार के पास शिकायत की कॉपी और बिल्डिंग की तस्वीरें मौजूद हैं। अब देखना होगा कि नगर निगम कमिश्नर इस मामले में स्वतंत्र जांच करवाते हैं या नहीं।
सवाल सिर्फ एक बिल्डिंग का नहीं—सवाल है कि नगर निगम में नक्शा चलेगा या कंपाउंडिंग का कागज?
