नगर निगम जोन-सी ब्लॉक-29 में कमर्शियल बिल्डिंग का निर्माण जारी, चालान के बाद भी काम कैसे चलता रहा?

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पार्किंग पर सवाल, सड़क की चौड़ाई भी जांच के घेरे में | हर सवाल पर जवाब—“चालान काट दिया है” | अब एमटीपी और इंस्पेक्टर जोन-सी कमिश्नर की जवाबदेही पर निगाह

लुधियाना, 30 अगस्त (अरुण कुमार/ विकी)

नगर निगम लुधियाना के जोन-सी की बिल्डिंग ब्रांच एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जीत समाचार की पड़ताल में ब्लॉक-29 में बन रही एक कमर्शियल बिल्डिंग को लेकर ऐसे सवाल सामने आए हैं, जिनका जवाब अब नगर निगम के उच्च अधिकारियों को देना होगा।सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर किसी बिल्डिंग में नियमों के तहत कमर्शियल पार्किंग जरूरी है, तो मौके पर पार्किंग की व्यवस्था क्या है? और यदि निर्माण में कोई अनियमितता पाई गई थी तो क्या केवल चालान काटना ही कार्रवाई है?

चालान काटो और निर्माण चलने दो’ का आरोप

शिकायतकर्ता का आरोप है कि जोन-सी में कुछ मामलों में पहले चालान काटे जाते हैं और इसके बाद भी निर्माण जारी रहता है। बाद में “कंपाउंडिंग फीस जमा है” कहकर मामले को सामान्य बताने की कोशिश की जाती है।यहां सवाल यह है कि कंपाउंडिंग के बाद निर्माण कितना वैध हुआ, किस नियम के तहत हुआ और कितनी फीस जमा हुई—इसका पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता?

सबसे बड़ा सवाल: जोन-सी में बिल्डिंग का ‘3 पॉइंट खेल’!

1. पार्किंग जीरो—कमर्शियल बिल्डिंग में वाहन कहां खड़े होंगे?

कमर्शियल बिल्डिंग में पार्किंग व्यवस्था को लेकर नियमों का पालन जरूरी है। लेकिन इस मामले में शिकायतकर्ता का दावा है कि मौके पर पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था दिखाई नहीं देती।अगर बिल्डिंग में पार्किंग का प्रावधान है तो वह मौके पर कहां है? और अगर पार्किंग की व्यवस्था नहीं है तो निर्माण को लेकर विभाग ने क्या जांच की?

2. सड़क की चौड़ाई पर भी बड़ा सवाल

शिकायतकर्ता ने बिल्डिंग के सामने सड़क की चौड़ाई और कमर्शियल निर्माण की अनुमति को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि निर्धारित मानकों के अनुरूप सड़क न होने के बावजूद निर्माण कैसे आगे बढ़ा?कागजों में सड़क की चौड़ाई क्या दर्ज है और मौके पर वास्तविक चौड़ाई कितनी है? यह साफ करने के लिए नगर निगम की मौके पर पैमाइश और रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।जीत समाचार स्पष्ट करता है कि सड़क की निर्धारित चौड़ाई और कमर्शियल निर्माण की पात्रता का अंतिम निष्कर्ष संबंधित नगर निगम रिकॉर्ड और लागू नियमों की जांच के बाद ही निकल सकता है।

3. इंस्पेक्टर जोन-सी की निगरानी पर सवाल!

जिस अधिकारी के क्षेत्र में निर्माण हुआ, उसी की निगरानी व्यवस्था अब सवालों में है। आरोप है कि कार्रवाई के बजाय “ चालान काट दिया है” कहकर मामला टाल दिया जाता है।

एमटीपी और इंस्पेक्टर जोन-सी की निगरानी पर बड़ा सवाल

जीत समाचार किसी अधिकारी को दोषी ठहराने के बजाय जवाबदेही तय करने वाले सीधे सवाल उठा रहा है—आखिर इस बिल्डिंग के निर्माण की मौके पर निगरानी किस अधिकारी ने की? चालान काटने के बाद निर्माण जारी कैसे रहा और दोबारा निरीक्षण किसने किया? अगर निरीक्षण हुआ था तो रिपोर्ट में क्या दर्ज है? और यदि निर्माण नियमों के अनुरूप नहीं था, तो उसे समय रहते रोकने के लिए कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

कमिश्नर साहब, अब आपकी बारी!

नगर निगम कमिश्नर से मांग है कि ब्लॉक-21 की इस बिल्डिंग की स्वीकृत योजना, मौके पर निर्माण, पार्किंग व्यवस्था, चालान और कंपाउंडिंग फीस की पूरी जांच करवाई जाए।अगर सब कुछ नियमों के अनुसार है तो स्थिति साफ होनी चाहिए। लेकिन अगर नियमों का उल्लंघन मिला तो जिम्मेदारी सिर्फ बिल्डिंग मालिक की होगी या निगरानी करने वाले अधिकारियों की भी ?

जीत समाचार सरकार के राजस्व और शहर में नियमों के मुताबिक निर्माण के मुद्दे को लगातार उठाता रहेगा।

Part-1 जल्द!

ब्लॉक-29 की इसी बिल्डिंग पर जीत समाचार जल्द लेकर आएगा Part-1—पार्किंग से लेकर चालान और कंपाउंडिंग तक के दस्तावेजों पर उठेंगे सीधे सवाल।

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